क्या हरकी पौड़ी में अब गैर-हिंदुओं का प्रवेश निषिद्ध है?
सारांश
Key Takeaways
- गैर-हिंदुओं के लिए हरकी पौड़ी में प्रवेश पर रोक
- श्री गंगा सभा का यह कदम जानकारी और जागरूकता बढ़ाने के लिए है
- इससे पहले भी कई धार्मिक स्थलों पर इसी तरह की पाबंदियाँ रही हैं
- कानून और नियमों के प्रति जागरूकता आवश्यक है
- धार्मिक स्थलों पर सामाजिक सद्भाव बनाए रखना महत्वपूर्ण है
हरिद्वार, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत में ऐसे कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं, जहाँ गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। अब इस सूची में हरिद्वार का नाम भी शामिल हो गया है, जहाँ गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है। हरकी पौड़ी पर श्री गंगा सभा द्वारा पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टर पर लिखा है, "अहिंदू निषेध प्रवेश क्षेत्र।" सभा का कहना है कि पोस्टर लगाने का उद्देश्य लोगों को जानकारी से अवगत कराना है।
श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "कानून की बुनियादी जानकारी हर नागरिक के लिए आवश्यक है। हालिया घटनाओं के बाद गंगा सभा ने महसूस किया कि लोगों को नियमों और कानूनों के प्रति जागरूक करना बहुत जरूरी है। इस उद्देश्य से हरिद्वार के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता से जुड़े बोर्ड लगाए गए हैं, ताकि आमजन, श्रद्धालु और पर्यटक कानून की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकें।"
नितिन गौतम ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में हुई कुछ घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि जानकारी के अभाव में विवाद और गलतफहमियां बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि इन बोर्डों का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और लोगों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों से अवगत कराना है, जिससे कानून-व्यवस्था मजबूत हो और समाज में शांति और सौहार्द बना रहे।
हरिद्वार में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग लंबे समय से उठ रही है और सरकार ने भी इस फैसले को लेकर म्युनिसिपल बायलॉज का अध्ययन करने का हवाला दिया था। इससे पहले श्री गंगा सभा के अध्यक्ष ने एक इंटरव्यू में बायलॉज का जिक्र किया था। उनका कहना था कि ब्रिटिश सरकार ने पंडित मदन मोहन मालवीय के नेतृत्व में हरिद्वार और गंगा के लिए म्युनिसिपल बायलॉज बनाए थे और उन्हीं बायलॉज के अनुसार आज भी हरिद्वार के लिए कानून बनाने चाहिए।
हरिद्वार से पहले तिरुपति बालाजी मंदिर, गुरुवायुर मंदिर, पद्मनाभस्वामी मंदिर, और लिंगराज मंदिर जैसे दक्षिण भारत के मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक है, जबकि कुछ मंदिरों में आस्था के नाम पर शपथ दिलाई जाती है, जो भगवान के प्रति श्रद्धा को दर्शाता है। इन मंदिरों की अपनी विशिष्ट परंपराएं और मान्यताएं हैं, जिसके कारण हिंदू भी ड्रेस कोड का पालन करते हैं।