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क्या एकनाथ शिंदे जयचंद बनते तो मुंबई में भाजपा का मेयर कभी नहीं बनता?

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क्या एकनाथ शिंदे जयचंद बनते तो मुंबई में भाजपा का मेयर कभी नहीं बनता?

सारांश

मुंबई में बीएमसी चुनाव के परिणाम ने शिवसेना (यूबीटी) को बुरी तरह झटका दिया है। महायुति ने बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि संजय राउत ने एकनाथ शिंदे को जयचंद कहकर उनकी भूमिका पर सवाल उठाया है। जानें इस चुनाव के पीछे की कहानी।

मुख्य बातें

महायुति ने बीएमसी चुनाव में बहुमत हासिल किया।
शिवसेना (यूबीटी) को एक बड़ा झटका लगा।
एकनाथ शिंदे को जयचंद के रूप में देखा जा रहा है।
बीएमसी का वार्षिक बजट 74,000 करोड़ रुपए से अधिक है।
महायुति मुंबई में विकास का नया एजेंडा प्रस्तुत कर रही है।

मुंबई, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बीएमसी चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) को एक बड़ा झटका लगा है। महायुति को बहुमत प्राप्त हुआ है। चुनाव परिणामों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खुशी का इजहार किया, जबकि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने घोषणा की है कि बीएमसी का मेयर हमारी पार्टी का होगा। इस बीच, शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने एकनाथ शिंदे को जयचंद करार दिया है।

संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जयचंद की तस्वीर साझा करते हुए लिखा है कि यदि एकनाथ शिंदे शिवसेना के जयचंद नहीं बनते, तो मुंबई में भाजपा का मेयर कभी नहीं बनता! मराठी जनता उन्हें जयचंद के रूप में याद रखेगी।

जहां शिवसेना (यूबीटी) को एक बड़ा झटका लगा है, वहीं महायुति में जश्न का माहौल है, क्योंकि अब देश की सबसे धनी महानगरपालिका पर उनका नियंत्रण है।

ऐतिहासिक रूप से, बीएमसी पिछले 25 वर्षों से शिवसेना का प्रमुख गढ़ रही है। बालासाहेब ठाकरे की विरासत की सुरक्षा के लिए, शिवसेना-यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपने भाई राज ठाकरे के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ और उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

शिवसेना 1985 से बीएमसी पर शासन कर रही थी। 2017 के चुनावों में मुकाबला बेहद करीबी था। शिवसेना ने 84 सीटें, भाजपा ने 82 सीटें, कांग्रेस ने 31 सीटें, एनसीपी ने 9 सीटें और एमएनएस ने 7 सीटें जीतीं। स्पष्ट बहुमत न होने की स्थिति में, भाजपा ने शिवसेना को महापौर का पद रखने की अनुमति दी थी।

1865 में स्थापित बीएमसी केवल एक स्थानीय निकाय नहीं है, बल्कि यह भारत का सबसे धनी निगम है। 74,000 करोड़ रुपए से अधिक के वार्षिक बजट के साथ, इसकी वित्तीय क्षमता कई राज्यों से भी अधिक है।

बीएमसी की जीत पर एकनाथ शिंदे ने कहा कि महाराष्ट्र के कई नगर निगमों में महायुति महापौरों की नियुक्ति करेगी, जिसमें प्रतिष्ठित बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) भी शामिल है। शिंदे ने कहा कि गठबंधन ने ठाणे, कल्याण-डोम्बिवली और पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में महत्वपूर्ण पैठ बना ली है।

शिंदे ने कहा, "महायुति पार्टी का मुंबई में अपना मेयर होगा।"

उन्होंने कहा कि उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) गुट ने 150 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ा और लगभग 60 सीटें जीतीं, लेकिन कुल मिलाकर जनादेश महायुति के 'विकास' एजेंडे के पक्ष में है। शिंदे ने कहा कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्य में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मुंबई नगर निगम में महायुति के नेतृत्व वाली 'ट्रिपल इंजन' सरकार मुंबई के लिए अत्यंत लाभदायक होगी।

-राष्ट्र प्रेस

एएमटी/डीएससी

संपादकीय दृष्टिकोण

यह भविष्य में कई नई संभावनाओं का द्वार खोल सकता है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीएमसी चुनाव का परिणाम क्या है?
महायुति ने बीएमसी चुनाव में बहुमत हासिल किया है, जिससे भाजपा का मेयर बनने का रास्ता साफ हो गया है।
संजय राउत ने एकनाथ शिंदे को क्या कहा?
संजय राउत ने एकनाथ शिंदे को जयचंद कहा और उनके निर्णय पर सवाल उठाए।
बीएमसी का बजट कितना है?
बीएमसी का वार्षिक बजट 74,000 करोड़ रुपए से अधिक है, जो इसे भारत का सबसे धनी निगम बनाता है।
शिवसेना का बीएमसी पर शासन कब से है?
शिवसेना 1985 से बीएमसी पर शासन कर रही थी।
महायुति का मेयर बनने का क्या महत्व है?
महायुति का मेयर बनना राजनीतिक बदलाव और विकास का प्रतीक है, जो मुंबई की राजनीति में नई दिशा दिखाता है।
राष्ट्र प्रेस
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