10 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

हरियाणा मंत्रिमंडल का बड़ा फैसला: छठे वित्त आयोग की सिफारिशें 2026-27 से जारी रहेंगी, 'लाडो लक्ष्मी' आय सीमा बढ़ी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
हरियाणा मंत्रिमंडल का बड़ा फैसला: छठे वित्त आयोग की सिफारिशें 2026-27 से जारी रहेंगी, 'लाडो लक्ष्मी' आय सीमा बढ़ी

सारांश

हरियाणा मंत्रिमंडल ने छठे वित्त आयोग की सिफारिशें 2026-27 से जारी रखने का फैसला किया — जब तक सातवाँ आयोग रिपोर्ट नहीं देता। साथ ही 'लाडो लक्ष्मी' योजना की आय सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹1.80 लाख की गई, जिससे 10 लाख से अधिक लाभार्थी महिलाओं के साथ और भी महिलाएँ जुड़ सकेंगी।

मुख्य बातें

हरियाणा मंत्रिमंडल ने 10 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में छठे राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें 2026-27 से जारी रखने की मंजूरी दी।
राज्य के स्व-कर राजस्व (SOTR) का 7 प्रतिशत स्थानीय निकायों को वास्तविक आधार पर हस्तांतरित किया जाएगा।
निधि वितरण जनसंख्या (80%) और क्षेत्रफल (20%) के आधार पर; ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद में 75:15:10 अनुपात।
स्थानीय निकायों को मिली निधि का 30% से अधिक सड़क पक्कीकरण पर खर्च नहीं होगा; नियम न मानने वाले शहरी निकायों के अनुदान में 20% कटौती ।
दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना की वार्षिक पारिवारिक आय सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹1.80 लाख की गई; वर्तमान में 10 लाख से अधिक महिलाएँ लाभान्वित।

हरियाणा मंत्रिमंडल ने 10 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई बैठक में छठे राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों को 2026-27 से ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों को निधि हस्तांतरण के लिए जारी रखने की मंजूरी दे दी। यह निर्णय तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक सातवें वित्त आयोग की सिफारिशें लागू नहीं हो जातीं।

क्यों लिया गया यह निर्णय

सातवें राज्य वित्त आयोग ने अभी तक सरकार को अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है। ऐसे में, स्थापित प्रशासनिक परंपरा के अनुसार, छठे राज्य वित्त आयोग की स्वीकृत सिफारिशें ही इस अंतरिम अवधि में स्थानीय निकायों को निधि वितरण का आधार बनी रहेंगी। यह प्रक्रिया राज्य सरकार के वित्तीय संसाधनों का निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जाती है।

निधि वितरण का ढाँचा

स्वीकृत ढाँचे के अनुसार, राज्य के स्व-कर राजस्व (SOTR) का 7 प्रतिशत वास्तविक आधार पर स्थानीय निकायों को हस्तांतरित किया जाएगा। ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों के बीच निधि का वितरण जनसंख्या के लिए 80 प्रतिशत और क्षेत्रफल के लिए 20 प्रतिशत के भार के आधार पर होगा।

जिला परिषदों और पंचायत समितियों के लिए निधि वितरण प्रत्येक वर्ष 31 दिसंबर तक परिवार पहचान पत्र पोर्टल पर उपलब्ध जनसंख्या आँकड़ों के आधार पर किया जाएगा। ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के बीच 'आपसी' वितरण 75:15:10 के अनुपात में बनाए रखा जाएगा।

खर्च पर शर्तें और जवाबदेही

मंत्रिमंडल ने निधि के उपयोग पर स्पष्ट शर्तें भी तय की हैं। स्थानीय निकायों को हस्तांतरित कुल निधि का 30 प्रतिशत से अधिक सड़कों के पक्कीकरण पर खर्च करने की अनुमति नहीं होगी। शहरी स्थानीय निकायों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि उनका वास्तविक राजस्व पिछले वर्ष के लेखापरीक्षित खातों में दर्शाए गए बजट राजस्व का कम से कम 85 प्रतिशत होना चाहिए। नियमों का पालन न करने वाले शहरी निकायों को उनके राज्य वित्त आयोग अनुदान में 20 प्रतिशत की कटौती का सामना करना पड़ेगा।

दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना में संशोधन

मंत्रिमंडल ने दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना में भी महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी। इस योजना के अंतर्गत वार्षिक पारिवारिक आय पात्रता सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹1.80 लाख कर दी गई है, जिससे अधिक महिलाएँ इस योजना की पात्र बन सकेंगी। वर्तमान में 10 लाख से अधिक महिलाएँ इस पहल से लाभान्वित हो रही हैं।

गौरतलब है कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता को मज़बूत करना और उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। संशोधनों से योजना का कार्यान्वयन सरल होगा और वित्तीय सहायता का वितरण अधिक सुदृढ़ होगा।

आगे क्या

यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी जब तक सातवाँ राज्य वित्त आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंप देता और उसकी सिफारिशें लागू नहीं हो जातीं। विशेषज्ञों का मानना है कि आय सीमा में यह बढ़ोतरी हरियाणा में ग्रामीण और अर्ध-शहरी महिलाओं की एक बड़ी आबादी को योजना के दायरे में लाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस देरी को भी उजागर करता है जिसमें सातवाँ आयोग अभी तक रिपोर्ट नहीं दे सका। सड़क पक्कीकरण पर 30% की सीमा और शहरी निकायों के लिए 85% राजस्व वसूली की शर्त — ये जवाबदेही के सकारात्मक कदम हैं, लेकिन अनुपालन की निगरानी व्यवस्था कितनी मज़बूत है, यह स्पष्ट नहीं है। लाडो लक्ष्मी योजना की आय सीमा बढ़ाना सराहनीय है, किंतु 10 लाख वर्तमान लाभार्थियों को लाभ वास्तव में समय पर मिल रहा है या नहीं — इस पर स्वतंत्र समीक्षा अभी भी अपेक्षित है।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरियाणा में छठे वित्त आयोग की सिफारिशें क्यों जारी रखी जा रही हैं?
सातवें राज्य वित्त आयोग ने अभी तक सरकार को अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है। इसलिए, स्थापित परंपरा के अनुसार, छठे आयोग की सिफारिशें 2026-27 से तब तक लागू रहेंगी जब तक सातवाँ आयोग अपनी सिफारिशें नहीं दे देता।
स्थानीय निकायों को SOTR का कितना प्रतिशत मिलेगा और वितरण कैसे होगा?
राज्य के स्व-कर राजस्व (SOTR) का 7 प्रतिशत वास्तविक आधार पर स्थानीय निकायों को हस्तांतरित किया जाएगा। ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों को जनसंख्या के लिए 80% और क्षेत्रफल के लिए 20% के अनुपात में निधि मिलेगी, जबकि ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद में यह अनुपात 75:15:10 रहेगा।
दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना में क्या बदलाव हुआ है?
योजना की वार्षिक पारिवारिक आय पात्रता सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹1.80 लाख कर दी गई है। इससे अधिक महिलाएँ इस योजना के दायरे में आ सकेंगी; वर्तमान में 10 लाख से अधिक महिलाएँ इससे लाभान्वित हो रही हैं।
निधि के उपयोग पर क्या शर्तें लगाई गई हैं?
स्थानीय निकायों को मिली कुल निधि का 30 प्रतिशत से अधिक सड़कों के पक्कीकरण पर खर्च नहीं किया जा सकेगा। साथ ही शहरी निकायों का वास्तविक राजस्व बजट राजस्व का कम से कम 85% होना अनिवार्य है; उल्लंघन पर 20% अनुदान कटौती का प्रावधान है।
यह व्यवस्था कब तक लागू रहेगी?
यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक सातवाँ राज्य वित्त आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंप देता और उसकी सिफारिशें लागू नहीं हो जातीं। इसकी कोई निश्चित समय-सीमा अभी घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 12 घंटे पहले
  2. 6 महीने पहले
  3. 8 महीने पहले
  4. 1 साल पहले
  5. 1 साल पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले