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क्या हरियाणा के नूंह में उग रहा नवाचार? 20 वैरायटी वाले मशरूम प्लांट ने खेती की तस्वीर को बदला

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क्या हरियाणा के नूंह में उग रहा नवाचार? 20 वैरायटी वाले मशरूम प्लांट ने खेती की तस्वीर को बदला

सारांश

हरियाणा के नूंह में एक अनोखा मशरूम प्लांट स्थापित हुआ है, जहां 20 वैरायटी के मशरूम का उत्पादन हो रहा है। यह प्रोजेक्ट न केवल स्थानीय किसानों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहा है, बल्कि कृषि में नवाचार का भी प्रतीक है। जानें इस प्लांट की खासियत और इसके पीछे की कहानी।

मुख्य बातें

नूंह में 20 वैरायटी का मशरूम प्लांट स्थापित हुआ है।
इस प्लांट से रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
सरकारी सहयोग से किसानों की आय में वृद्धि हो रही है।
मशरूम पौष्टिक और शाकाहारी विकल्प हैं।
इस प्रोजेक्ट ने न केवल खेती की तस्वीर बदली है बल्कि नवाचार को भी बढ़ावा दिया है।

नूंह, 27 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। हरियाणा का नूंह जिला, जिसे अक्सर एक पिछड़ा क्षेत्र माना जाता है, अब अपनी छिपी हुई प्रतिभाओं और नवाचारों के कारण एक नई पहचान बना रहा है। यहां के किसान और स्थानीय निवासी पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं। जिले के कई गांवों में देसी गेहूं की खेती पहले से ही प्रसिद्ध है और अब उसकी मांग भी निरंतर बढ़ रही है।

इसी कड़ी में नूंह जिले के जागरूक किसान राहुल वर्मा ने मशरूम की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक अत्याधुनिक मशरूम प्लांट स्थापित कर एक नई मिसाल कायम की है। इस पहल में जिला बागवानी विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है, जिसने 40 प्रतिशत सब्सिडी के तहत 12 लाख रुपए की अनुदान राशि प्रदान की है। इसके साथ ही कंपोस्ट बनाने की यूनिट के लिए भी 12 लाख रुपए की अतिरिक्त अनुदान राशि की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है।

जिला बागवानी अधिकारी डॉ. अब्दुल रजाक ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि नूंह जिले में कुल सात ब्लॉक हैं, जिनमें तावडू ब्लॉक भी शामिल है। तावडू स्थित राहुल वर्मा के फार्म हाउस पर वर्तमान में 10 प्रकार की मशरूम वैरायटी की खेती की जा रही है, जहां प्रतिदिन लगभग 200 से 260 किलोग्राम मशरूम का उत्पादन हो रहा है। इस उत्पादन की सप्लाई एक निजी कंपनी ‘ब्लैंकेट’ को की जा रही है, जो इसे देशभर में वितरित करती है। उन्होंने कहा कि इस मशरूम प्लांट से मेवात क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और स्थानीय युवाओं को काम मिल रहा है। विभाग द्वारा एक सोलर ड्रायर मशीन भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे मशरूम को सुखाकर पैक किया जा सकता है और देश के विभिन्न हिस्सों में आसानी से भेजा जा सकता है।

डॉ. रजाक ने मशरूम के पोषण महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ है और शाकाहारी लोगों के लिए मीट का एक बेहतर विकल्प माना जाता है। यह दिल के मरीजों के लिए भी फायदेमंद है और शरीर की लगभग सभी पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करता है। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट की सफलता को देखते हुए जिले के विभिन्न गांवों से किसान मशरूम की खेती में रुचि दिखा रहे हैं और जानकारी लेने के लिए फार्म हाउस पर पहुंच रहे हैं। तावडू उपमंडल में ही 60 लाख रुपए की लागत वाला एक और मशरूम प्रोजेक्ट प्रस्तावित किया गया है, जिसके लिए आवेदन किया जा चुका है।

जिला बागवानी अधिकारी ने बताया कि यह मशरूम प्लांट न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश में अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट है, जहां एक साथ 20 वैरायटी का उत्पादन और ट्रायल किया जा रहा है। यह प्लांट पूरी तरह कंप्यूटरीकृत है, जिसमें मशरूम की आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग चैंबरों में तापमान और नमी को कंप्यूटर के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा में यह पहला ऐसा प्रोजेक्ट है और संभवतः देश स्तर पर भी यह एक अनोखी पहल है।

वहीं, लाभान्वित किसान राहुल वर्मा ने कहा कि उन्हें जिला बागवानी विभाग का पूरा सहयोग मिल रहा है, जिसके कारण उनका उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और उन्हें अच्छी आमदनी भी हो रही है। उन्होंने बताया कि पहले उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि उनका यह प्रोजेक्ट हरियाणा या देश में अपनी तरह का एकमात्र है, लेकिन अब उन्हें गर्व महसूस हो रहा है कि उन्होंने अपनी खेती के माध्यम से नूंह जिले और हरियाणा का नाम रोशन किया है। यह मशरूम प्लांट इस बात का प्रमाण है कि पिछड़े क्षेत्रों में भी नवाचार, आधुनिक तकनीक और सरकारी सहयोग के जरिए आर्थिक विकास संभव है। यह परियोजना नूंह जिले के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती जा रही है और कई अन्य किसानों ने भी ऐसे प्लांट लगाने के लिए आवेदन किया है, जिन पर विभाग द्वारा विचार किया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल स्थानीय किसानों के लिए नई संभावनाएं खोलता है, बल्कि पूरे देश में कृषि उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को सुधारने में भी मददगार साबित हो रही है।
RashtraPress
16 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नूंह में मशरूम की कितनी वैरायटी उगाई जा रही हैं?
नूंह में वर्तमान में 10 प्रकार की मशरूम वैरायटी की खेती की जा रही है।
इस मशरूम प्लांट से कितनी रोज़गार के अवसर पैदा हो रहे हैं?
इस प्लांट से मेवात क्षेत्र में कई नए रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं।
इस प्रोजेक्ट में किस प्रकार का सरकारी सहयोग मिला है?
इस प्रोजेक्ट को जिला बागवानी विभाग से 40 प्रतिशत सब्सिडी के तहत 12 लाख रुपए की अनुदान राशि मिली है।
क्या मशरूम पौष्टिक होते हैं?
हां, मशरूम प्रोटीन से भरपूर होते हैं और शाकाहारी लोगों के लिए एक बेहतर विकल्प माने जाते हैं।
क्या इस प्रकार के और मशरूम प्रोजेक्ट प्रस्तावित किए जा रहे हैं?
हां, तावडू उपमंडल में 60 लाख रुपए की लागत वाला एक और मशरूम प्रोजेक्ट प्रस्तावित किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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