क्या हरियाणा टीचर्स ट्रांसफर पॉलिसी-2025 पर पुनर्विचार की आवश्यकता है? कंवरपाल गुर्जर ने शिक्षा मंत्री को पत्र लिखा
सारांश
Key Takeaways
- हरियाणा टीचर्स ट्रांसफर पॉलिसी-2025 पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।
- 15 वर्ष की शर्त शिक्षकों के स्थानांतरण में समस्या पैदा कर सकती है।
- शिक्षा व्यवस्था की निरंतरता बनाए रखना जरूरी है।
- कंवरपाल गुर्जर ने शिक्षा मंत्री को पत्र लिखा है।
- पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी की समस्या है।
यमुनानगर, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। हरियाणा में लंबे समय के बाद शिक्षकों के ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस बीच, पूर्व शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने हरियाणा टीचर्स ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी-2025 पर पुनर्विचार कर आवश्यक संशोधन करने की मांग की है। कंवरपाल गुर्जर ने इस संदर्भ में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा को पत्र लिखा।
कंवरपाल गुर्जर ने पत्र में कहा, "नई नीति के अनुसार, किसी ब्लॉक में लगातार 15 वर्ष पूरे कर चुके या करने वाले शिक्षकों को अनिवार्य रूप से स्थानांतरण प्रक्रिया में शामिल किया गया है, जिससे कई शैक्षणिक ब्लॉकों में गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। इस नियम के कारण यमुनानगर जिले के बिलासपुर, साढौरा, छछरौली और प्रतापनगर जैसे शैक्षणिक खंडों के लगभग 35 प्रतिशत स्कूलों से शिक्षक स्थानांतरित हो जाएंगे।"
पूर्व मंत्री ने हरियाणा टीचर्स ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी-2025 में संशोधन की मांग करते हुए कहा कि 15 साल की शर्त को हटाया जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था की निरंतरता बनी रहे और छात्रों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर न पड़े।
कंवरपाल गुर्जर ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि सरकार की पॉलिसी पर सवाल नहीं हैं, बल्कि इसके कारण एक समस्या की बात है। पहाड़ी क्षेत्र से जुड़े ब्लॉक क्षेत्रों से अक्सर शिक्षक ट्रांसफर लेकर चले जाते हैं और उनकी जगह कोई नया टीचर नहीं आता है।
कंवरपाल गुर्जर ने बताया कि उनके कार्यक्रम के दौरान 2004, 2007 और 2011 के शिक्षकों के लिए डिस्ट्रिक्ट अलॉट कर दिए गए थे। इस कारण टीचरों ने अपना जिला चुना था, लेकिन आचार संहिता के कारण उस समय इन क्षेत्रों में शिक्षक नहीं आए। वर्तमान में 35 प्रतिशत से अधिक शिक्षकों के पद खाली हैं। यदि नई पॉलिसी लागू होती है, तो खाली पदों की संख्या क्षेत्र में बढ़ सकती है। इस संबंध में मैंने शिक्षा मंत्री से अनुरोध किया है।