क्या छोटे शहरों के सर्वांगीण विकास से ‘विकसित गुजरात 2047’ की दिशा में कदम बढ़ सकते हैं?

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क्या छोटे शहरों के सर्वांगीण विकास से ‘विकसित गुजरात 2047’ की दिशा में कदम बढ़ सकते हैं?

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण छोटे शहरों के विकास पर केंद्रित है, जो विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में सहायक हो सकता है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अगुवाई में, 2025 तक पांच सैटेलाइट टाउन विकसित करने का निर्णय लिया गया है। क्या यह कदम छोटे शहरों को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है?

Key Takeaways

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण टियर-2 और टियर-3 शहरों पर केंद्रित है।
  • अगले दो महीनों में कंसल्टेंट की नियुक्ति की जाएगी।
  • सैटेलाइट टाउन में आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
  • यह पहल छोटे शहरों को रोजगार के नए अवसर प्रदान करेगी।
  • बड़े शहरों पर बोझ कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम।

गांधीनगर, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने और भारत के सभी राज्यों के संपूर्ण विकास को तेज़ी प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टियर-2 और टियर-3 शहरों के रणनीतिक विकास को आगे बढ़ाने का एक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। इस दृष्टिकोण के अंतर्गत, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में अक्टूबर 2025 तक पांच सैटेलाइट टाउन विकसित करने का निर्णय लिया गया है।

इस निर्णय के कार्यान्वयन के तहत, इन शहरों के मास्टर प्लान तैयार करने के लिए शहरी योजनाकारों को आमंत्रित किया गया है। इसके लिए टेंडर द्वारा शहरी योजनाकारों की नियुक्ति की प्रक्रिया आरंभ की गई है। वर्ष 2030 तक इन शहरों में महानगरों जैसी सुविधाएं विकसित करने का कार्यक्रम है, जिससे बड़े शहरों पर बोझ को कम किया जा सके।

शहरी विकास के इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, राज्य सरकार ने अहमदाबाद के निकट साणंद, वडोदरा के निकट सावली, गांधीनगर के निकट कलोल, सूरत के निकट बारडोली और राजकोट के निकट हीरासर को सैटेलाइट टाउन के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुभव प्राप्त शहरी योजनाकारों को मास्टर प्लान तैयार करने के लिए आमंत्रित किया है। अगले दो महीनों में एक कंसल्टेंट की नियुक्ति की जाएगी, जो एक वर्ष के भीतर इन शहरों के लिए मास्टर प्लान तैयार करेगा।

सैटेलाइट टाउन का अर्थ है बड़े शहर या महानगर के निकट स्थित ऐसा शहर, जहां बड़े शहर तक एक घंटे में पहुँचा जा सके। ऐसे शहरों की पहचान कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनाने का उद्देश्य है, जिससे बड़े शहरों पर बोझ कम हो और इन शहरों में रोजगार के अवसर खुलें। इन शहरों में विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर और नागरिक केंद्रित सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

राज्य सरकार ने प्रारंभिक चरण में अहमदाबाद के निकट साणंद, वडोदरा के निकट सावली, गांधीनगर के निकट कलोल, सूरत के निकट बारडोली तथा राजकोट के निकट हीरासर को ‘सैटेलाइट टाउन’ के रूप में विकसित करने का निर्णय किया है। इन पांच शहरों में मास्टर टाउन प्लानिंग के साथ परिवहन, उद्योगों, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

सैटेलाइट टाउन में अत्याधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, सुव्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन सुविधा (इलेक्ट्रिक बस सुविधा सहित), जलापूर्ति और वेस्ट मैनेजमेंट के लिए उच्च गुणवत्तायुक्त इन्फ्रास्ट्रक्चर, रिंग रोड, अर्बन फॉरेस्ट पार्क, सुंदर तालाब, मॉडल फायर स्टेशन और मिक्स यूज इन्फ्रास्ट्रक्चर (ऑफिस, घर, दुकानें; सब नजदीक में) का निर्माण किया जाएगा। इन सुविधाओं के कार्य को तेजी से शुरू करने के लिए मंजूरी और निगरानी समिति का गठन किया गया है।

शहरी विकास के इस दृष्टिकोण को प्रस्तुत करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ''अर्बन एरिया देश का ग्रोथ सेंटर है, इसलिए विकसित भारत का निर्माण करने के लिए शहरों को आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनाना चाहिए और लक्ष्य निर्धारित कर उसके अनुसार नए उत्पादनों और क्वॉलिटी वर्क पर कार्य कर विकास साधना चाहिए। आज देश में दो लाख से अधिक स्टार्टअप कार्यरत हैं, जिनमें अधिकांश स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्थित हैं। इनमें अनेक स्टार्टअप का नेतृत्व बेटियाँ कर रही हैं। इतना ही नहीं; इन शहरों के बच्चे शिक्षा के अलावा अन्य अनेक गतिविधियों में भी अपेक्षाकृत आगे हैं। इसलिए ऐसे छोटे शहरों में विकास की अनेक क्षमताएँ विद्यमान हैं।''

Point of View

यह स्पष्ट है कि छोटे शहरों का विकास न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगा, बल्कि बड़े शहरों पर बढ़ते बोझ को भी कम करेगा। यह दृष्टिकोण भारतीय समाज में संतुलन लाने का महत्वपूर्ण कदम है।
NationPress
02/01/2026

Frequently Asked Questions

सैटेलाइट टाउन क्या होते हैं?
सैटेलाइट टाउन ऐसे शहर होते हैं जो बड़े शहरों के निकट स्थित होते हैं और वहां से एक घंटे के भीतर पहुँचा जा सकता है।
ये नए सैटेलाइट टाउन कब विकसित होंगे?
इन सैटेलाइट टाउन का विकास अक्टूबर 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
इन शहरों में कौन-कौन सी सुविधाएँ होंगी?
इन शहरों में अत्याधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, सार्वजनिक परिवहन, जलापूर्ति, और वेस्ट मैनेजमेंट जैसी सुविधाएँ होंगी।
क्या यह पहल छोटे शहरों को रोजगार के अवसर प्रदान करेगी?
जी हां, यह पहल छोटे शहरों में रोजगार के नए अवसरों का सृजन करने में सहायक होगी।
क्या इस योजना से बड़े शहरों पर बोझ कम होगा?
हाँ, इस योजना का उद्देश्य छोटे शहरों को आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनाना और बड़े शहरों पर बोझ को कम करना है।
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