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क्या इंग्लैंड में मोंटी पनेसर को भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा?

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क्या इंग्लैंड में मोंटी पनेसर को भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा?

सारांश

ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने अपने करियर के अंतिम टेस्ट की घोषणा की और नस्लीय भेदभाव के मुद्दे पर बात की। इंग्लैंड के पूर्व स्पिनर मोंटी पनेसर ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। जानिए इस मुद्दे पर क्या कहा गया।

मुख्य बातें

उस्मान ख्वाजा ने अपने विदाई टेस्ट की घोषणा की।
नस्लीय भेदभाव का मुद्दा क्रिकेट में महत्वपूर्ण है।
मोंटी पनेसर ने भेदभाव के अनुभव को साझा किया।
खेल और समाज में भेदभाव खत्म करने की आवश्यकता है।
ख्वाजा पहले पाकिस्तानी और मुस्लिम खिलाड़ी हैं।

लंदन, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ऑस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि सिडनी में रविवार से शुरू होने वाला टेस्ट उनके क्रिकेट करियर का अंतिम टेस्ट होगा। इसके बाद वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह देंगे। अपने विदाई संबोधन में ख्वाजा ने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में नस्लीय भेदभाव का उल्लेख किया, जिसके बाद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया सकते में आ गया है।

ख्वाजा के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इंग्लैंड के पूर्व स्पिनर मोंटी पनेसर ने कहा कि उन्होंने अपने करियर में किसी भी प्रकार के नस्लीय भेदभाव का सामना नहीं किया। उन्हें हमेशा अपने टीम साथियों और इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड का पूरा समर्थन मिला।

पनेसर भारतीय मूल के हैं और इंग्लैंड के लिए 2013 से 2016 के बीच 50 टेस्ट खेल चुके हैं।

पाकिस्तानी मूल के उस्मान ख्वाजा ने अपने संन्यास संबोधन में कहा, "मैंने हमेशा थोड़ा अलग महसूस किया है। मैं एक अश्वेत क्रिकेटर हूं, और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम, मेरी राय में, सबसे बड़ी नेशनल टीम है। यह हमारा गर्व और खुशी है, लेकिन जिस तरह से मेरे साथ बर्ताव किया गया है, उससे मुझे बहुत अलग महसूस हुआ है।"

उन्होंने पर्थ टेस्ट से पहले तीन दिन गोल्फ खेलने के लिए हुई आलोचना पर भी बात की, जहां उन्हें पीठ में ऐंठन हो गई थी, जिससे वह दोनों पारियों में ओपनिंग नहीं कर पाए थे।

उन्होंने कहा, "मेरी पीठ में ऐंठन थी। इसे मैं नियंत्रित नहीं कर सकता था। जिस तरह से मीडिया और पूर्व खिलाड़ियों ने मुझ पर हमला किया, मैं दो दिन तक इसे झेल सकता था, लेकिन मैंने लगभग पांच दिन लगातार इसे झेला। ये वही नस्लभेदी सोच हैं जिसके साथ मैं अपनी पूरी जिंदगी बड़ा हुआ हूं। हम उनसे पूरी तरह आगे नहीं बढ़ पाए हैं। मैंने पहले कभी ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम में किसी के साथ ऐसा बर्ताव होते नहीं देखा, खासकर उनके लिए जिन्होंने मुझ पर टिप्पणी की।"

ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी उस्मान ख्वाजा पहले पाकिस्तानी और मुस्लिम क्रिकेटर हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समाज में भी गहराई से जुड़ा हुआ है। मोंटी पनेसर का अनुभव यह दिखाता है कि भले ही कुछ खिलाड़ियों को भेदभाव का सामना न करना पड़ा हो, लेकिन यह समस्या अभी भी कई के लिए वास्तविकता है। हमें इसे समझने और इसे समाप्त करने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मोंटी पनेसर ने कभी भेदभाव का सामना किया?
नहीं, मोंटी पनेसर ने कहा है कि उन्हें अपने करियर में किसी भी प्रकार के नस्लीय भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा।
उस्मान ख्वाजा ने किस मुद्दे पर बात की?
उस्मान ख्वाजा ने अपने विदाई संबोधन में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में नस्लीय भेदभाव का जिक्र किया।
ख्वाजा का करियर का आखिरी टेस्ट कब है?
ख्वाजा का करियर का आखिरी टेस्ट सिडनी में रविवार को शुरू होने वाला है।
राष्ट्र प्रेस
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