बंगाल चुनाव: हिमंता बिस्वा सरमा का ममता पर तीखा वार — बोले, मांस खाने में भी पीछे नहीं
सारांश
Key Takeaways
- हिमंता बिस्वा सरमा ने 23 अप्रैल को बोंगागांव में जनसभा कर ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला।
- उन्होंने कहा कि वे ममता बनर्जी से ज्यादा मांस खाएंगे — यह बयान भाजपा की काउंटर-नैरेटिव रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
- मतुआ समाज के भाजपा के साथ होने का दावा किया गया, जो उत्तर 24 परगना में निर्णायक मतदाता वर्ग है।
- भाजपा उम्मीदवार अशोक डिंडा ने 75 प्रतिशत से अधिक मतदान का दावा करते हुए जीत का भरोसा जताया।
- मिथुन चक्रवर्ती ने बंपर वोटिंग को भाजपा की जीत का संकेत बताया।
- 2021 में भाजपा को 77 सीटें मिली थीं; इस बार पार्टी बड़ी जीत का दावा कर रही है।
कोलकाता, 23 अप्रैल: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के प्रचार अभियान में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने उत्तर 24 परगना जिले के बोंगागांव निर्वाचन क्षेत्र में जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि मतुआ समाज हमेशा से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ खड़ा रहा है और इस बार भी यही तस्वीर है।
मांस खाने पर हिमंता का पलटवार
जब पत्रकारों ने हिमंता बिस्वा सरमा से मछली और मांस खाने के मुद्दे पर सवाल किया, तो उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने कहा, "असम में भी भाजपा की सरकार है और वहां के लोग भी मांस-मछली खाते हैं।" इस पर और आगे बढ़ते हुए उन्होंने कहा कि "मैं तो ममता बनर्जी से भी ज्यादा मांस खा जाऊंगा।" यह बयान चुनावी माहौल में तुरंत चर्चा का केंद्र बन गया।
गौरतलब है कि बंगाल चुनाव में खान-पान की राजनीति एक संवेदनशील मुद्दा रही है। भाजपा पर अक्सर आरोप लगते रहे हैं कि वह मांसाहार के मुद्दे को लेकर बंगाली सांस्कृतिक पहचान पर हमला करती है। ऐसे में हिमंता का यह बयान उस आरोप को सीधे खारिज करने की रणनीतिक कोशिश माना जा रहा है।
मतुआ समाज और भाजपा का चुनावी समीकरण
मतुआ समाज पश्चिम बंगाल में एक बड़ा और निर्णायक मतदाता वर्ग है, जो मुख्य रूप से उत्तर 24 परगना और नदिया जिलों में केंद्रित है। हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट कहा कि "मतुआ समाज ने शुरुआत से ही भाजपा का साथ दिया है और इस बार भी कोई संदेह नहीं।" नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) लागू होने के बाद से मतुआ समाज में भाजपा के प्रति झुकाव और मजबूत हुआ है, क्योंकि इस समुदाय का एक बड़ा हिस्सा बांग्लादेश से विस्थापित हिंदू शरणार्थियों का है।
भाजपा उम्मीदवारों के दावे और जमीनी रिपोर्ट
हारिणघाटा विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार असीम सरकार ने कहा कि पार्टी ने बाहर से कोई नेता नहीं बुलाया और हिमंता बिस्वा सरमा को महज एक दिन पहले सूचित किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि "जीत या हार कुछ भी हो, हर मतदाता को शांतिपूर्वक वोट डालने का अधिकार मिलना चाहिए।"
मोयना विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार और पूर्व क्रिकेटर अशोक डिंडा ने कहा कि टीएमसी हर जगह बाधाएं उत्पन्न करने की कोशिश कर रही है, यहां तक कि अपने ही बूथों पर भी। उन्होंने दावा किया कि मतदान के दौरान 75 प्रतिशत से अधिक वोट पड़ चुके थे और माहौल शांतिपूर्ण रहा।
अशोक डिंडा ने कहा, "सभी ने एक ही बटन दबाया है और वह बटन काला पड़ गया है, जबकि टीएमसी का बटन सफेद रह गया।" यह बयान भाजपा के आत्मविश्वास को दर्शाता है।
मिथुन चक्रवर्ती का बड़ा दावा
भाजपा नेता और वरिष्ठ अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने भी चुनाव के दिन भविष्यवाणी करते हुए कहा कि "आज बंपर मतदान होगा और इसका सीधा मतलब है कि भाजपा सत्ता में आ रही है।" मिथुन चक्रवर्ती का बंगाली मतदाताओं के बीच व्यापक प्रभाव माना जाता है और पार्टी उनकी छवि को चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषण: भाजपा की बंगाल रणनीति
यह ध्यान देने योग्य है कि 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा 77 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल बनी थी, लेकिन ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 213 सीटों के साथ सत्ता बरकरार रखी थी। इस बार भाजपा ने स्टार प्रचारकों की फौज उतारी है जिसमें हिमंता बिस्वा सरमा एक प्रमुख चेहरा हैं। उनकी आक्रामक शैली और जमीनी संपर्क को पार्टी अपना मजबूत पक्ष मानती है।
चुनाव परिणाम आने के बाद स्पष्ट होगा कि मतुआ समाज, CAA और खान-पान की राजनीति जैसे मुद्दों पर भाजपा की रणनीति कितनी कारगर रही। सभी की नजरें अब मतगणना की तारीख पर टिकी हैं।