क्या एसआईआर पर सतर्क रहना कर्नाटक कांग्रेस के भविष्य को तय करेगा?
सारांश
Key Takeaways
- कर्नाटक कांग्रेस ने एसआईआर के प्रति सतर्क रहने का आह्वान किया है।
- यह प्रक्रिया पार्टी के भविष्य को प्रभावित करेगी।
- मतदाता अधिकारों की रक्षा के लिए बीएलए को सक्रिय रहना होगा।
- भाजपा पर भी आरोप लगाए गए हैं कि उसने मनरेगा योजना को समाप्त कर दिया है।
- सरकार चुनावों की तैयारी में जुटी हुई है।
बेंगलुरु, १३ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक कांग्रेस ने राज्य में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से पूरी सतर्कता बरतने का आग्रह किया है। पार्टी का मानना है कि यह प्रक्रिया उसके भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
मंगलवार को पैलेस ग्राउंड्स में आयोजित ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ आंदोलन की तैयारी बैठक में उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने कहा कि राज्य में मतदाता सूची का एसआईआर नजदीक है और अधिकारी इसकी प्रक्रिया प्रारंभ कर चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) के मामले में कोई भी ढिलाई सहन नहीं की जाएगी, क्योंकि यही प्रक्रिया पार्टी के भविष्य को प्रभावित करेगी।
उन्होंने बीएलए से मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए सतर्क रहने का अनुरोध किया और ‘वोट चोरी’ अभियान के बारे में चेतावनी दी।
शिवकुमार ने वोट चोरी के खिलाफ चलाए गए अभियान के तहत १.४१ करोड़ हस्ताक्षर एकत्र करने के लिए सभी जिला अध्यक्षों, विधायकों और पदाधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस प्रयास की सराहना की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी का अस्तित्व सामूहिक प्रयास पर निर्भर करता है।
उन्होंने बताया कि १३ फरवरी को एक बड़े आयोजन के लिए चर्चा चल रही है और प्रत्येक तालुक और पंचायत स्तर पर लाभार्थी सम्मेलन आयोजित करने का आह्वान किया।
बैठक को ऐतिहासिक बताते हुए शिवकुमार ने कहा कि अदालतों के आदेशों के कारण पहले स्थानीय निकाय चुनाव नहीं हो सके थे, लेकिन अब अगले चार से पांच महीनों में सभी स्थानीय निकाय चुनाव कराने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी नगर निकाय चुनावों के संबंध में निर्देश जारी किए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार जिला, तालुक और ग्राम पंचायत चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है और आरक्षण सहित अन्य अड़चनों को दूर करने के लिए कैबिनेट स्तर पर निर्णय लिए जा चुके हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से चुनावों की तैयारी में जुटने के लिए कहा।
शिवकुमार ने कहा कि सरकार की गारंटी योजनाएं और विकास कार्य जनता तक पहुंच चुके हैं। गारंटी समितियों और स्थानीय स्तर पर नामांकन के जरिए कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाया गया है। राज्य स्तर पर केवल ६०० नामांकन शेष हैं, जबकि बाकी सभी नियुक्तियां पूरी हो चुकी हैं और कुछ मामूली तकनीकी परिवर्तन बाकी हैं।
उन्होंने बताया कि अब तक २० डीसीसी अध्यक्ष, २५ पदाधिकारी और ४७ विधायक विभिन्न बोर्डों और निगमों के अध्यक्ष बनाए जा चुके हैं। चुनाव में टिकट से वंचित रहे १९ कार्यकर्ताओं को भी अध्यक्ष पद दिए गए हैं।
शिवकुमार ने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उसने ग्रामीण रोजगार की मुख्य धारा की योजना मनरेगा को ‘खत्म’ कर दिया है।
उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह सरकार के दौरान सोनिया गांधी ने गरीबों को रोजगार की संवैधानिक गारंटी का अधिकार दिया था, जिसके चलते कर्नाटक में पंचायत और गांव स्तर पर हर साल लगभग ६,००० करोड़ रुपये के कार्य होते थे।