क्या हैदराबाद में ऑनलाइन ट्रेडिंग धोखाधड़ी के आरोप में व्यक्ति गिरफ्तार हुआ?

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क्या हैदराबाद में ऑनलाइन ट्रेडिंग धोखाधड़ी के आरोप में व्यक्ति गिरफ्तार हुआ?

सारांश

हैदराबाद में एक जनरल स्टोर संचालक को ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर 49.90 लाख रुपए की धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जांच में खुलासा हुआ है कि उसने धोखेबाजों को अपना बैंक खाता दिया था। यह मामला और भी गंभीर है क्योंकि यह विभिन्न राज्यों से जुड़े कई मामलों से संबंधित है।

Key Takeaways

  • ऑनलाइन निवेश में सतर्कता आवश्यक है।
  • साइबर धोखाधड़ी के मामलों में वृद्धि हो रही है।
  • पीड़ितों को तुरंत पुलिस को सूचित करना चाहिए।
  • बैंक खाता साझा करने से बचें।
  • सुरक्षा उपायों का पालन करें।

हैदराबाद, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। हैदराबाद पुलिस ने ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर लोगों से 49.90 लाख रुपए की ठगी करने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।

साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की एक टीम ने हैदराबाद निवासी मोहम्मद अशफाक को गिरफ्तार किया।

पुलिस की जानकारी के अनुसार, अशफाक (33) एक जनरल स्टोर का संचालन करता है। उसने साइबर धोखाधड़ी के लिए कमीशन के आधार पर अपना बैंक खाता साइबर धोखेबाजों को सौंप दिया था। उसने नई दिल्ली में धोखेबाजों से मुलाकात की और उनकी उपस्थिति में इस खाते का उपयोग ऑनलाइन शेयर बाजार से संबंधित धोखाधड़ी में किया गया।

पुलिस जांच में पता चला कि इस खाते में 3.70 करोड़ रुपए जमा हुए थे। साइबर धोखेबाजों ने अशफाक से ओटीपी लेकर इंटरनेट बैंकिंग के जरिए धोखाधड़ी की राशि को डायवर्ट कर दिया। अशफाक को इस मामले में दूसरा आरोपी माना गया है।

शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि उसे एक व्हाट्सएप नंबर से कॉल और मैसेज प्राप्त हुआ। कॉल करने वाले ने अपना नाम मीना भट्ट बताया और उसे "86 डीबीएस इंडिया वेल्थ ग्रुप इन्वेस्टमेंट" नामक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा, जहाँ शेयर खरीदने के लिए एक आंतरिक पोर्टल लिंक साझा किया गया।

पीड़ित ने 2 लाख रुपए जमा किए और बताई गई प्रक्रिया के अनुसार शेयर खरीदे। प्रारंभिक लाभ के बाद उसे अपनी राशि निकालने की अनुमति दी गई।

अधिक लाभ का वादा करते हुए, भट्ट ने उसे बताए गए बैंक खातों में और भी राशि जमा करने के लिए कहा। राशि जमा होने के बाद, उसने कहा कि आईपीओ आवंटन होगा और आईपीओ सब्सक्रिप्शन पूर्ण करने के लिए और अधिक राशि निवेश करने का निर्देश दिया।

चूंकि उसने और पैसे जमा नहीं किए, इसलिए उन्होंने उसे ग्रुप चैट में ब्लॉक कर दिया और संपर्क सूची से हटा दिया। बाद में उसे धोखाधड़ी का एहसास हुआ और उसने ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई और साइबर अपराध पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत भी की।

उसने उनके द्वारा दिए गए बैंक खातों में 49.90 लाख रुपए ट्रांसफर किए थे। शिकायत के आधार पर, आयकर अधिनियम की धारा 66(सी) और 66(डी) के तहत मामला दर्ज किया गया। बीएनएस की धारा 318(4), 319(2), 336(3), 338 और 340(2)।

अशफाक के बैंक खाते में जमा की गई राशि भारत भर के 29 मामलों से संबंधित है। इनमें से बारह मामले तेलंगाना से, चार कर्नाटक से, तीन महाराष्ट्र से, दो-दो गुजरात, उत्तर प्रदेश और ओडिशा से और एक-एक असम, हरियाणा और पश्चिम बंगाल से हैं।

Point of View

और हमें अपने वित्तीय डेटा को सुरक्षित रखने के लिए जागरूक रहना चाहिए। यह मामला एक चेतावनी है कि कैसे धोखेबाज अपनी चालाकियों से लोगों को ठग सकते हैं।
NationPress
07/01/2026

Frequently Asked Questions

अशफाक को क्यों गिरफ्तार किया गया?
अशफाक को ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर लोगों से 49.90 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
साइबर धोखाधड़ी में वह कैसे शामिल हुआ?
अशफाक ने साइबर धोखेबाजों को अपना बैंक खाता दिया और उनके साथ मिलकर धोखाधड़ी की।
क्या पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई की है?
हाँ, पुलिस ने अशफाक के खिलाफ मामला दर्ज किया है और जांच जारी है।
इस धोखाधड़ी का शिकार कितने लोग हुए?
यह धोखाधड़ी भारत के विभिन्न राज्यों में फैली हुई है और 29 मामलों से संबंधित है।
क्या साइबर धोखाधड़ी से बचने के उपाय हैं?
हाँ, ऑनलाइन निवेश करते समय हमेशा सतर्क रहें और अपने वित्तीय डेटा को सुरक्षित रखें।
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