क्या 'इंडिया एनर्जी वीक 2026' का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा और निवेश में वृद्धि करेगा?
सारांश
Key Takeaways
- इंडिया एनर्जी वीक 2026 का आयोजन 27 से 30 जनवरी तक गोवा में होगा।
- इसमें 120 से अधिक देशों से भागीदारी की उम्मीद है।
- कार्यक्रम में ऊर्जा सुरक्षा और निवेश पर चर्चा होगी।
- भारत का इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम एक ग्लोबल उदाहरण बन चुका है।
- गैस पाइपलाइन नेटवर्क में 66 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने मंगलवार को जानकारी दी कि ‘इंडिया एनर्जी वीक 2026’ का आयोजन 27 से 30 जनवरी तक गोवा में होने जा रहा है। इस सम्मेलन में विश्व भर के मंत्री, प्रमुख कंपनियों के सीईओ, नीति निर्माताओं, वित्तीय संस्थानों, शिक्षाविदों और तकनीकी विशेषज्ञों की भागीदारी होगी।
यह कार्यक्रम ऐसे समय पर हो रहा है जब वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। यह 2026 की पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बैठक होगी, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने, निवेश को प्रोत्साहित करने और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।
एक सरकारी बयान में बताया गया कि 'इंडिया एनर्जी वीक (आईईडब्ल्यू) 2026' संवाद और सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच बनेगा। पिछले आयोजनों की सफलता को देखते हुए, इस बार 120 से अधिक देशों से भागीदारों की उम्मीद है।
पिछले साल, 2025 के आयोजन में 68,000 से अधिक लोग, 570 प्रदर्शक और 5,400 सम्मेलन प्रतिनिधि शामिल हुए थे, जिसमें 100 से अधिक सत्र आयोजित किए गए थे। इस बार का आयोजन उससे भी बड़ा होने की संभावना है।
'इंडिया एनर्जी वीक 2026' का आयोजन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा किया जाता है। इसे भारतीय पेट्रोलियम उद्योग महासंघ और डीएमजी इवेंट्स मिलकर आयोजित करते हैं। यह मंच ऊर्जा सुरक्षा, सस्ती ऊर्जा और टिकाऊ विकास पर वैश्विक सहयोग का अवसर प्रदान करेगा।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक 2025 के अनुसार, 2050 तक दुनिया में बढ़ने वाली ऊर्जा मांग का 23 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले भारत का होगा, जो किसी भी अन्य देश से ज्यादा है।
इसी कारण, 'इंडिया एनर्जी वीक 2026' में नीति निर्माता और उद्योग के लीडर्स मिलकर एक मजबूत ऊर्जा प्रणाली बनाने और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने पर विचार करेंगे।
भारत का इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम अब दुनिया के लिए एक आदर्श बन चुका है। इससे अब तक 1.59 लाख करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा की बचत, 813 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी, 270 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल की बचत, और ओएमसी द्वारा इथेनॉल उत्पादकों को 2.32 लाख करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है।
भारत ने अपनी दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के लिए घरेलू खोज और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ किया है। 2014 में जहां 52,000 पेट्रोल पंप थे, वहीं 2025 तक यह संख्या 1 लाख से अधिक हो गई। सीएनजी स्टेशनों की संख्या 968 से बढ़कर 8,477 हो गई है, जबकि पीएनजी घरेलू कनेक्शनों की संख्या 25 लाख से बढ़कर 1.59 करोड़ से अधिक पहुंच गई है।
इसके अलावा, गैस पाइपलाइन नेटवर्क में लगभग 66 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह 25,923 किलोमीटर से अधिक लंबा हो गया है। अब शहरी गैस वितरण (सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन) की पहुंच द्वीपों को छोड़कर पूरे भारत में है। विश्वभर में ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, भारत ने उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कीमतों में स्थिरता बनाए रखी है।