क्या भारत की अधिकतम ऊर्जा मांग वित्त वर्ष 26 में 242.49 गीगावाट पर पहुंची है?

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क्या भारत की अधिकतम ऊर्जा मांग वित्त वर्ष 26 में 242.49 गीगावाट पर पहुंची है?

सारांश

भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपनी अधिकतम ऊर्जा मांग को 242.49 गीगावाट की ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। यह आंकड़ा, ऊर्जा की बढ़ती मांग और सामर्थ्य को दर्शाता है। जानिए इस महत्वपूर्ण विकास के पीछे क्या कारण हैं और यह हमारे भविष्य पर कैसे प्रभाव डालेगा।

Key Takeaways

  • अधिकतम ऊर्जा मांग: 242.49 गीगावाट
  • डिमांड-सप्लाई का अंतर: 0.03 प्रतिशत
  • ऊर्जा क्षमता: 509.743 गीगावाट
  • ग्रामीण बिजली उपलब्धता: 22.6 घंटे
  • स्वच्छ ऊर्जा क्षमता: 178 गीगावाट

नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत की अधिकतम ऊर्जा मांग वित्त वर्ष 2025-26 में 242.49 गीगावाट तक पहुँच गई है। यह जानकारी सरकार द्वारा शुक्रवार को साझा की गई।

इसके अतिरिक्त, सरकार ने बताया कि ऊर्जा क्षमता और ट्रांसमिशन लाइनों के मजबूती के कारण वित्त वर्ष 2025-26 में डिमांड-सप्लाई का अंतर ऐतिहासिक निचले स्तर 0.03 प्रतिशत पर आ गया है, जो कि वित्त वर्ष 2013-14 में 4.2 प्रतिशत था।

ऊर्जा मंत्रालय ने कहा कि देश में स्थापित कुल ऊर्जा क्षमता 30 नवंबर, 2025 तक बढ़कर 509.743 गीगावाट हो गई है, जबकि 31 मार्च, 2014 में यह 249 गीगावाट थी। इस अवधि में ऊर्जा क्षमता में 104.4 प्रतिशत का इज़ाफा हुआ है।

मंत्रालय ने बयान में कहा, "भारत में प्रति व्यक्ति ऊर्जा की खपत वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1,460 केडब्ल्यूएच हो गई है, जो कि वित्त वर्ष 2013-14 की 957 केडब्ल्यूएच की तुलना में 52.6 प्रतिशत (503 केडब्ल्यूएच) अधिक है।"

इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की औसत उपलब्धता 2014 में 12.5 घंटे से बढ़कर 22.6 घंटे हो गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में अब 2014 के 22.1 घंटे की तुलना में 23.4 घंटे तक बिजली की आपूर्ति होती है, जो बिजली सेवाओं की विश्वसनीयता और पहुंच में महत्वपूर्ण सुधार को दर्शाता है।

अप्रैल 2014 से अब तक, बड़े जलविद्युत संयंत्रों सहित 178 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई है।

सरकार के अनुसार, इसमें 130 गीगावाट सौर ऊर्जा, 33 गीगावाट पवन ऊर्जा, 3.4 गीगावाट बायोमास, 1.35 गीगावाट लघु जलविद्युत और लगभग 9.9 गीगावाट बड़े जलविद्युत उत्पादन क्षमता शामिल है, जो स्वच्छ ऊर्जा के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मंत्रालय ने बताया, "भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की अनुमानित बिजली मांग को पूरा करने के लिए, वित्त वर्ष 2025-26 (30 नवंबर, 2025 तक) में 13.32 गीगावाट की नई कोयला आधारित तापीय क्षमता आवंटित की गई है।"

Point of View

देश की मजबूत आर्थिक स्थिति का संकेत देती है। यह न केवल विकास के लिए आवश्यक है, बल्कि हमारे भविष्य में ऊर्जा की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करता है।
NationPress
16/01/2026

Frequently Asked Questions

भारत की अधिकतम ऊर्जा मांग कब बढ़ी?
भारत की अधिकतम ऊर्जा मांग वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 242.49 गीगावाट पर पहुंच गई है।
डिमांड-सप्लाई का अंतर कितना है?
वित्त वर्ष 2025-26 में डिमांड-सप्लाई का अंतर 0.03 प्रतिशत पर है।
भारत की ऊर्जा क्षमता कितनी है?
भारत की ऊर्जा क्षमता 30 नवंबर, 2025 तक 509.743 गीगावाट हो गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की औसत उपलब्धता कितनी है?
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की औसत उपलब्धता 22.6 घंटे है।
क्या भारत स्वच्छ ऊर्जा के प्रति प्रतिबद्ध है?
जी हां, भारत ने 178 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी है, जिसमें सौर, पवन और जलविद्युत शामिल हैं।
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