क्या कर्नाटक में नेतृत्व को लेकर सिद्धरामैया और शिवकुमार के समर्थकों में मतभेद हैं?

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क्या कर्नाटक में नेतृत्व को लेकर सिद्धरामैया और शिवकुमार के समर्थकों में मतभेद हैं?

सारांश

कर्नाटक में नेतृत्व के मुद्दे पर सिद्धरामैया और डी.के. शिवकुमार के समर्थकों के बीच स्पष्ट मतभेद सामने आए हैं। महादेवप्पा और जारकिहोली ने सिद्धरामैया की अहमियत को बताया है, जबकि बालकृष्णा ने युवा नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर दिया है।

Key Takeaways

  • कर्नाटक में नेतृत्व को लेकर मतभेद स्पष्ट हो रहे हैं।
  • सिद्धरामैया की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
  • युवा नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

बेंगलुरु, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जिस दिन कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरामैया ने पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत डी. देवराजा उर्स के रिकॉर्ड के बराबर लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का कीर्तिमान स्थापित किया, उसी दिन उनके समर्थकों और उपमुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार के समर्थकों ने नेतृत्व के मुद्दे पर अलग-अलग राय व्यक्त की।

मुख्यमंत्री के समर्थक यह मानते हैं कि इस सरकार का संचालन सिद्धरामैया के बिना करना कठिन है, जबकि शिवकुमार के एक समर्थक विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री को अगली पीढ़ी के नेताओं को तैयार करना चाहिए और उन्हें पूरा विश्वास है कि सिद्धरामैया जिम्मेदारी से आगे की राह तय करेंगे।

मंगलवार को मैसूर में एक सभा को संबोधित करते हुए सामाजिक कल्याण मंत्री एच.सी. महादेवप्पा ने कहा, "मुख्यमंत्री सिद्धरामैया के बिना इस सरकार को बचाना संभव नहीं है। दलितों का मानना है कि सिद्धरामैया को मुख्यमंत्री बने रहना चाहिए। हालांकि, यदि नेतृत्व में बदलाव होता है, तो मुख्यमंत्री का पद दलित को सौंपा जाना चाहिए।"

उन्होंने आगे कहा, "कांग्रेस सरकार को सिद्धरामैया के बिना कल्पना करना कठिन है। कार्यकाल के अंत में, शोषित, दलित, गरीब, पिछड़े वर्ग और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए, और सिद्धरामैया निश्चित रूप से इस दिशा में कार्य करेंगे।"

महादेवप्पा ने यह भी कहा, "यदि सिद्धरामैया किसी विशेष वर्ग या जमींदार ताकतों को खुश करने की कोशिश करते, तो वे अलग ऊंचाई प्राप्त कर सकते थे, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया।"

वहीं, मंत्री सतीश जारकिहोली ने बेलगावी में मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें विश्वास है कि सिद्धरामैया अपना पूरा कार्यकाल पूरा करेंगे।

उन्होंने कहा, "कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी में भ्रम होना स्वाभाविक है। पार्टी में इन भ्रमों को दूर करने और आगे बढ़ने की क्षमता है। मैं सिद्धरामैया को दिवंगत डी. देवराजा उर्स के रिकॉर्ड के बराबर रहने पर बधाई देता हूं।"

ध्यान देने योग्य है कि मंत्री सतीश जारकिहोली और एच.सी. महादेवप्पा दोनों सिद्धरामैया के कट्टर समर्थक हैं और शोषित समुदायों से आते हैं।

वहीं, उपमुख्यमंत्री शिवकुमार के समर्थक वरिष्ठ विधायक एच.सी. बालकृष्णा ने सवाल के जवाब में कहा, "मुख्यमंत्री सिद्धरामैया ने कहा है कि उन्हें पूरा विश्वास है कि वे पूरा कार्यकाल पूरा करेंगे। उन्होंने यह नहीं कहा कि वे निश्चित रूप से पूरा करेंगे। उन्होंने सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाया है। अब उच्च कमान और सिद्धरामैया पर निर्भर है कि पद दूसरों को सौंपना है या नहीं।"

बालकृष्णा ने कहा, "जब एक पीढ़ी रिटायर होती है, तो युवा पीढ़ी को आगे लाना अनिवार्य होता है। कांग्रेस पार्टी को भविष्य में भी जीवित रहना है। जैसे परिवार में बुजुर्ग अपने बच्चों को जिम्मेदारी सौंपते हैं, वही होगा। इसका मतलब यह नहीं कि मैं उनसे मुख्यमंत्री पद छोड़ने को कह रहा हूं। पार्टी ने उन्हें सब कुछ दिया है, और वे सुनिश्चित करेंगे कि पार्टी राज्य में जीवित और मजबूत रहे।"

बालकृष्णा ने कहा, "मुझे इस पर भरोसा है। मुख्यमंत्री सिद्धरामैया ऐसे व्यक्ति नहीं हैं। वे जिम्मेदारी से काम करेंगे और चीजों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाएंगे।"

Point of View

बल्कि पूरे देश की राजनीति पर पड़ सकता है।
NationPress
07/01/2026

Frequently Asked Questions

सिद्धरामैया का राजनीतिक करियर क्या है?
सिद्धरामैया कर्नाटक के मुख्यमंत्री हैं और वे लंबे समय तक इस पद पर रह चुके हैं।
डी.के. शिवकुमार की भूमिका क्या है?
डी.के. शिवकुमार कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं।
क्या नेतृत्व परिवर्तन की संभावना है?
इस विषय पर विभिन्न समर्थकों के बीच मतभेद हैं, लेकिन कोई स्पष्ट निर्णय नहीं हुआ है।
महादेवप्पा का क्या कहना है?
महादेवप्पा का मानना है कि सिद्धरामैया के बिना सरकार को बचाना मुश्किल है।
कर्नाटक में आगामी चुनावों का क्या प्रभाव पड़ेगा?
नेतृत्व के मुद्दे पर मतभेद आगामी चुनावों पर असर डाल सकते हैं।
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