दिल्ली में वाम नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में तमिलनाडु के जिला मुख्यालयों पर उतरेगा वाम मोर्चा
सारांश
मुख्य बातें
वामपंथी दलों ने शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को तमिलनाडु के विभिन्न जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शनों का आह्वान किया। यह आह्वान नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए उस प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेताओं की गिरफ्तारी के बाद आया, जो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग को लेकर आयोजित किया गया था। वामपंथी दलों ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने का आरोप लगाते हुए इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।
दिल्ली में किन नेताओं को लिया गया हिरासत में
संयुक्त बयान के अनुसार, नई दिल्ली में हिरासत में लिए गए लोगों में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के महासचिव एम.ए. बेबी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के महासचिव डी. राजा और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के नेता शामिल हैं। पार्टियों ने यह भी आरोप लगाया कि युवा व छात्र संगठनों के नेताओं, ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं और अन्य प्रमुख कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में रखा गया। कथित तौर पर कई बंदियों को घंटों तक पुलिस वाहनों में बिठाए रखा गया।
प्रदर्शन पर पाबंदी और सुरक्षा व्यवस्था
वामपंथी दलों के संयुक्त बयान में दावा किया गया कि प्रदर्शन से पूर्व अधिकारियों ने राष्ट्रीय राजधानी में व्यापक पाबंदियाँ लागू कर दी थीं। बयान के अनुसार, दिल्ली जाने वाली 254 ट्रेनें रद्द कर दी गईं, 54 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए और 35,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए। दलों ने आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों ने विभिन्न स्थानों पर समूहों को एकत्र होने से रोका और राजनीतिक दलों व जन संगठनों के कार्यालयों को घेर लिया।
वाम दलों का केंद्र पर निशाना
वामपंथी दलों ने कहा कि दिल्ली पुलिस के आचरण और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के लिए केंद्र सरकार सीधे तौर पर जिम्मेदार है। दलों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों को दरकिनार किया। उनका तर्क है कि सुरक्षा व्यवस्था नागरिकों के एकत्र होने और असहमति व्यक्त करने के संवैधानिक अधिकार का हनन नहीं कर सकती।
तमिलनाडु में विरोध का विस्तार
यह प्रदर्शन मूल रूप से कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा वामपंथी दलों और जन संगठनों के समर्थन से बुलाया गया था, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी व्यापक अभियान के तहत उन्हें हटाने की माँग की गई थी। अब वामपंथी दलों ने तमिलनाडु भर में पार्टी इकाइयों और संबद्ध संगठनों से अपील की है कि वे जिला मुख्यालयों पर एकजुट होकर दिल्ली की कार्रवाई का विरोध करें और कुमार को हटाने की माँग को दोहराएँ।
आगे की स्थिति
संयुक्त बयान के अनुसार, प्रस्तावित प्रदर्शनों से यह विरोध राज्यभर के जिला केंद्रों तक फैलने की संभावना है। गौरतलब है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद पहले से ही गहरा था। आने वाले दिनों में यह विरोध और किन राज्यों तक पहुँचता है, यह देखना अहम होगा।