क्या केरल में लतीश हत्याकांड में 7 दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली?
सारांश
Key Takeaways
- कन्नूर की अदालत ने 7 आरएसएस-भाजपा कार्यकर्ताओं को उम्रकैद की सजा सुनाई।
- यह फैसला 2008 के लतीश हत्याकांड से संबंधित है।
- राजनीतिक हिंसा के खिलाफ एक महत्वपूर्ण न्यायिक संदेश।
- अदालत ने दोषियों पर 1.40 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
- घटना ने समाज में सुरक्षा और कानून के प्रति जागरूकता को बढ़ाया है।
कन्नूर, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केरल के कन्नूर जिले की एक अदालत ने 2008 में घटित माकपा कार्यकर्ता के लतीश हत्याकांड में सात आरएसएस–भाजपा कार्यकर्ताओं को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस निर्णय के साथ उत्तर केरल में राजनीतिक हिंसा के कुछ सबसे भयंकर मामलों में से एक का न्यायिक निष्कर्ष निकला है।
थलस्सेरी की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने दोषियों पर 1.40 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने कानून की चार धाराओं के तहत कुल 35 वर्ष की सजा सुनाई, जो साथ-साथ चलेगी। इससे पहले अदालत ने आरोपी संख्या एक से सात को दोषी ठहराया था, जबकि आरोपी संख्या नौ से बारह को बरी कर दिया गया था। आठवें आरोपी की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी थी।
दोषियों में पी. सुमिथ, के.के. प्रजीश बाबू, बी. निधिन, के. सनाल, रिजोश, सजीश और वी. जयेश शामिल हैं।
ज्ञात हो कि माकपा कार्यकर्ता, सीटू मछुआरा यूनियन के नेता और थिरुवंगाड स्थानीय समिति के सदस्य के. लतीश (28) की 31 दिसंबर 2008 को शाम करीब 5.30 बजे थलस्सेरी के चक्याथुमुक्कु समुद्र तट पर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, हमलावरों ने पहले दहशत फैलाने के लिए बम फेंके और फिर लतीश का पीछा कर तलवारों और कुल्हाड़ियों से उन पर हमला किया। लतीश जान बचाने के लिए एक दोस्त के घर में घुसने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन हमलावरों ने उन्हें पकड़ लिया और घातक हमला कर दिया।
इस हमले में लतीश के दोस्त और माकपा कार्यकर्ता मोहनलाल उर्फ लल्लू गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके अतिरिक्त बम हमले में संतोष, सुरेश और मजीद भी घायल हुए, जिन्हें इलाज की आवश्यकता पड़ी।
अभियोजन का कहना है कि आरोपी विभिन्न स्थानों से हथियारों से लैस होकर आए, लतीश को घेर लिया और सामूहिक रूप से हमला किया। आरोप है कि सुमिथ ने तलवार से पहला वार किया, जबकि प्रजीश बाबू ने कुल्हाड़ी से गर्दन पर घातक चोट पहुंचाई। लतीश के जमीन पर गिरने के बाद भी हमलावरों ने उन्हें लगातार काटा और वार किया, फिर अतिरिक्त बम फेंकते हुए मौके से फरार हो गए।
मामले में सूचीबद्ध 64 गवाहों में से 30 के बयान अदालत में दर्ज किए गए। यह केस लतीश के भाई के. संतोष की शिकायत पर दर्ज किया गया था।
इस फैसले को उत्तर केरल में राजनीतिक हिंसा के खिलाफ एक महत्वपूर्ण न्यायिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।