क्या सोमनाथ मंदिर नारी सशक्तीकरण का सशक्त केंद्र बन गया है?
सारांश
Key Takeaways
- महिला सशक्तीकरण: सोमनाथ मंदिर ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दिया है।
- आर्थिक विकास: 363 महिलाएं कुल मिलाकर 9 करोड़ रुपए की आय अर्जित कर रही हैं।
- समाज में बदलाव: महिलाओं की भागीदारी से समाज में सकारात्मक परिवर्तन हो रहा है।
गांधीनगर, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक श्री सोमनाथ मंदिर को विश्व श्रद्धा और आस्था का केंद्र मानता है। लेकिन, आज यह पवित्र स्थल केवल पूजा-अर्चना और दर्शन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह महिला सशक्तीकरण का एक प्रेरणादायी और सशक्त केंद्र बनकर उभरा है।
सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट द्वारा अपनाए गए जनकेंद्रित और सामाजिक हित के दृष्टिकोण से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की नई दिशा प्राप्त हुई है।
इस ट्रस्ट में वर्तमान में कुल 906 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से 262 महिलाएं हैं। ये आंकड़े केवल संख्याएं नहीं हैं, बल्कि ट्रस्ट की समावेशी विचारधारा और समान अवसर प्रदान करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक हैं। मंदिर के प्रबंधन, सेवा कार्य और दैनिक व्यवस्था में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से कार्य प्रणाली में संवेदनशीलता, अनुशासन और समर्पण का अनोखा संगम देखने को मिलता है।
विशेष रूप से, मंदिर परिसर में स्थित पवित्र बिल्व वन पूरी तरह से महिलाओं द्वारा संचालित किया जाता है। यहां कार्यरत 16 महिलाएं पर्यावरण संरक्षण, हरित संवर्धन और स्वच्छता के साथ मंदिर की पवित्रता को बनाए रखती हैं। यह व्यवस्था महिलाओं के कुशल संचालन और जिम्मेदारी का उत्तम उदाहरण बन गई है।
इसके अतिरिक्त, मंदिर के भोजनालय में 30 महिलाएं निष्ठापूर्वक सेवा प्रदान कर रही हैं। ये महिलाएं हजारों श्रद्धालुओं को प्रेम और सेवाभाव से भोजन परोसकर मंदिर की मानव सेवा परंपरा को जीवंत रखती हैं। प्रसाद वितरण जैसे पवित्र कार्य में 65 महिलाओं की भागीदारी उनके अनुशासन, समर्पण और विश्वसनीयता को दर्शाती है।
कुल मिलाकर, सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के माध्यम से 363 महिलाओं को सीधे रोजगार मिल रहा है, और वे सभी मिलकर सालाना लगभग 9 करोड़ रुपए की आय अर्जित कर रही हैं, जो उनके आर्थिक स्वावलंबन और जीवन स्तर में सुधार का स्पष्ट संकेत है। यह आय समाज के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
इस प्रकार, श्री सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट ने आध्यात्मिक विरासत को सामाजिक दायित्व के साथ जोड़कर महिला सशक्तीकरण का एक अनुकरणीय और योग्य मॉडल विकसित किया है। श्रद्धा के इस पवित्र धाम से आज आत्मविश्वास, स्वाभिमान और स्वावलंबन की सुगंध फैल रही है।