ढेंकनाल में पति ने लकड़ी के डंडे से पत्नी की हत्या की, बाद में पेड़ से लटककर की आत्महत्या
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के ढेंकनाल जिले में शनिवार देर रात एक दिहाड़ी मजदूर ने कथित तौर पर पारिवारिक विवाद के बाद अपनी पत्नी को लकड़ी के भारी डंडे से पीट-पीटकर मार डाला और बाद में पश्चाताप में आकर पेड़ से लटककर आत्महत्या कर ली। यह दोहरी त्रासदी परजंग पुलिस स्टेशन के अंतर्गत दादारा घाटी चौकी के अखुआपाल पंचायत में सामने आई, और इस घटना के बाद दंपती की तीन अल्पवयस्क बेटियाँ बेसहारा हो गईं।
घटनाक्रम: कैसे हुई यह त्रासदी
मृत पुरुष की पहचान 35 वर्षीय रत्नाकर उर्फ मिथुन नाइक और मृत महिला की पहचान 30 वर्षीय रस्मिता नाइक के रूप में हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, रत्नाकर दिहाड़ी मजदूर था और अक्सर शराब के नशे में अपनी पत्नी से झगड़ता था।
शनिवार देर रात पुरानी बातों को लेकर दंपती के बीच तीखी बहस छिड़ गई। गुस्से में आकर रत्नाकर ने रस्मिता पर लकड़ी के भारी तख्ते से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।
तीन बेटियों को सुरक्षित छोड़ा, फिर जीवन समाप्त किया
पत्नी की मौत के बाद रत्नाकर ने अपनी तीनों बेटियों को अपने छोटे भाई के घर ले गया, जो उस समय परिवार सहित बाहर गया हुआ था। उसने बच्चियों को भाई के घर के अंदर बंद किया और बाहर से दरवाज़ा बंद कर दिया। इसके बाद कथित तौर पर पश्चाताप में आकर उसने अपने घर के सामने एक पेड़ से लटककर आत्महत्या कर ली।
पुलिस की प्रतिक्रिया और जाँच
ढेंकनाल के कामाख्यानगर के सब-डिविजनल पुलिस अधिकारी चित्तरंजन बेहरा ने बताया, 'शनिवार देर रात किसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच तीखी बहस हुई। गुस्से में आकर पति ने पत्नी पर भारी लकड़ी के डंडे से हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई। पत्नी की मौत के बाद पछतावे में पति ने आत्महत्या कर ली।'
सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस और साइंटिफिक टीम मौके पर पहुँची और जाँच शुरू की। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए परजंग कम्युनिटी हेल्थ सेंटर भेजा गया। मृतक रत्नाकर की बहन की रिपोर्ट के आधार पर परजंग पुलिस स्टेशन में केस संख्या 491/26 दर्ज किया गया है।
आम जनता पर असर: तीन बच्चियाँ हुईं अनाथ
इस दुखद घटना ने दंपती की तीन बेटियों को एक ही रात में माँ और पिता दोनों से वंचित कर दिया। फ़िलहाल बच्चियाँ चाचा की देखरेख में हैं। यह घटना घरेलू हिंसा और शराब की लत के गंभीर परिणामों को एक बार फिर रेखांकित करती है। आगे यह देखना होगा कि बच्चियों के पुनर्वास और कल्याण के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है।