क्या छत्तीसगढ़ में आईईडी ब्लास्ट के बाद एक व्यक्ति ने मीलों पैदल चलकर अपनी जान बचाई?
सारांश
Key Takeaways
- सहनशक्ति का अद्भुत उदाहरण।
- आईईडी के खतरों का सामना करना।
- माओवादी गतिविधियों से नागरिकों की सुरक्षा का महत्व।
रायपुर/बीजापुर, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के दूरदराज स्थित लंकापल्ली जंगल में शुक्रवार को माओवादियों द्वारा लगाए गए प्रेशर-एक्टिवेटेड इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) के फटने से एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पीड़ित राजू मोदियामी ने घने जंगल में चलते समय विस्फोटक पर पैर रख दिया, जिससे आईईडी का विस्फोट हुआ। धमाका इतना तीव्र था कि उसकी दाहिनी एड़ी पूरी तरह से टूट गई और उसके पैर में गंभीर चोट आई।
दर्द और अत्यधिक खून बहने के बावजूद, मोदियामी ने साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। वह लंगड़ाते हुए कठिन रास्ते से लगभग सात किलोमीटर चलकर पास के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर पहुंचा, जहां स्थानीय चिकित्सा स्टाफ ने उसे प्राथमिक उपचार दिया और आगे के इलाज के लिए बीजापुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
अस्पताल के सूत्रों ने पुष्टि की है कि उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है; डॉक्टर उसकी टूटी हुई एड़ी और उससे जुड़ी समस्याओं का उपचार कर रहे हैं। वह वर्तमान में डॉक्टरों की निगरानी में है और उसे आवश्यक देखभाल मिल रही है।
माओवादी विभिन्न नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आम नागरिकों के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं, जहां विद्रोही सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए अक्सर आईईडी का उपयोग करते हैं।
बस्तर डिवीजन का हिस्सा बीजापुर के जंगल ऐसे उपकरणों के लिए हॉटस्पॉट बने हुए हैं, जो गश्त पर निकलने वालों पर घात लगाने या आवाजाही को रोकने के लिए लगाए जाते हैं।
अधिकारियों ने लंकापल्ली जंगल में किसी भी अतिरिक्त आईईडी का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए तलाशी अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य नागरिकों की मौत को रोकना है। पुलिस ने बताया कि ऐसे धमाके उन आदिवासी समुदायों के लिए खतरा बने हुए हैं, जो अपनी आजीविका के लिए जंगल के संसाधनों पर निर्भर हैं।
मोदियामी के बचने और सुरक्षित स्थान तक पहुंचने की कठिन यात्रा की स्थानीय स्तर पर सराहना की गई है, जो कठिनाइयों के बीच मानव सहनशक्ति का प्रमाण है।
ज्ञात हो कि हाल ही में सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता मिली, जब बीजापुर जिले में एक भीषण मुठभेड़ में चार महिला कैडर सहित छह माओवादियों को मार गिराया गया। डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी), कोबरा और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की एक संयुक्त टीम द्वारा किए गए इस ऑपरेशन ने क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों को बड़ा झटका दिया है।