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क्या आजाद भारत की पहली उड़ान थी एचटी-2? जानिए 1951 में रचे गए इस ऐतिहासिक पल के बारे में

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क्या आजाद भारत की पहली उड़ान थी एचटी-2? जानिए 1951 में रचे गए इस ऐतिहासिक पल के बारे में

सारांश

जानिए कैसे हिंदुस्तान ट्रेनर-2 ने 1951 में भारतीय विमानन इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा। यह विमान आजाद भारत का पहला स्वदेशी डिज़ाइन और निर्मित विमान था, जिसने अपने शानदार प्रदर्शन से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मुख्य बातें

एचटी-2 आजाद भारत का पहला स्वदेशी विमान था।
इसकी पहली उड़ान 13 अगस्त 1951 को हुई।
विमान का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा किया गया।
इसका उद्देश्य पायलट प्रशिक्षण को सुविधाजनक बनाना था।
एचटी-2 का निर्यात 1958 में घाना को किया गया।

नई दिल्ली, 12 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। वर्ष था 1951, तारीख थी 13 अगस्त, और भारत का आसमान गूंज उठा। बेंगलुरु स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की हवाई पट्टी से एक दुर्लभ, चमकदार, दो-सीट वाला विमान ने शान से उड़ान भरी। यह कोई साधारण उड़ान नहीं थी; यह थी हिंदुस्तान ट्रेनर-2 (एचटी-2) की पहली सार्वजनिक उड़ान, जो आजाद भारत में डिजाइन और निर्मित पहला विमान था।

उस समय देश को आजादी मिले चार साल ही हो चुके थे। बंटवारे की पीड़ा, आर्थिक चुनौतियां और सीमित संसाधनों के बावजूद भारत ने यह साबित कर दिया कि सपनों के पंख केवल खरीदे नहीं जाते, बल्कि उन्हें अपने हाथों से भी गढ़ा जा सकता है।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान एचएएल का कार्य ज्यादातर मित्र राष्ट्रों के विमानों की मरम्मत और असेंबली तक सीमित था। लेकिन आजादी के बाद आरएएफ ने एचएएल को भारत को सौंपा, जिससे भारतीय इंजीनियरों को अपने विमान डिजाइन करने का पहला अवसर मिला। इस मिशन की पूरी जानकारी डिफेंस पोर्टल भारत रक्षक डॉट कॉम में उपलब्ध है। ग्रुप कैप्टन कपिल भार्गव के लेख में उस शानदार पायलट और एचएएल एचटी 2 की खूबसूरत कहानी है।

इस ऐतिहासिक मिशन का नेतृत्व डॉ. वीएम घाटगे ने किया, जिन्होंने जर्मनी में मशहूर वैज्ञानिक डॉ. लुडविग प्रांट्ल के अधीन एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में डॉक्टरेट की थी। 11 अक्टूबर 1948 को परियोजना के लिए सरकारी मंजूरी मिली और काम ने रफ्तार पकड़ी। अगस्त 1949 तक विमान का मॉक-अप तैयार हो गया और फरवरी 1950 में इसका अंतिम डिजाइन फाइनल हुआ।

पहले प्रोटोटाइप में 145 एचपी का गिप्सी मेजर इंजन और लकड़ी का प्रोपेलर लगा था। 27 जुलाई 1951 को इसका इंजन पहली बार चला और 5 अगस्त को एचएएल के चीफ टेस्ट पायलट कैप्टन जमशेद कैकोबाद मुंशी ने इसकी "अनौपचारिक" पहली उड़ान भरी। करीब 40 मिनट तक आसमान में करतब दिखाने के बाद उन्होंने इसे बेहतरीन करार दिया।

इसके बाद 13 अगस्त 1951 को एयर वाइस मार्शल सुब्रोतो मुखर्जी की मौजूदगी में एचटी-2 ने अपनी सार्वजनिक उड़ान भरी। मुंशी ने हवाई करतब से सबका दिल जीत लिया और यह दिन भारत के विमानन इतिहास में मील का पत्थर बन गया।

हिंदुस्तान ट्रेनर-2 एक शानदार दो-सीट वाला विमान था, जिसकी तकनीकी खूबियां इसे अपने समय में खास बनाती थीं। इसकी लंबाई 7.53 मीटर थी और वजन 1,016 किलोग्राम था। यह विमान 210 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति तक पहुंच सकता था। इसमें सर्कस मेजर 150 हॉर्सपावर का इंजन लगाया गया था, जो बाद में और उन्नत किया गया। एचटी-2 में दो सीटें थीं, एक पायलट के लिए और दूसरी प्रशिक्षु के लिए, जिससे यह प्रशिक्षण के लिए आदर्श था।

1953 से एचटी-2 का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू हुआ। भारतीय वायुसेना ने पायलट प्रशिक्षण के लिए लगभग 150 विमान इस्तेमाल किए। नौसेना और फ्लाइंग स्कूलों में भी यह प्रशिक्षक विमान लोकप्रिय रहा। 1958 में यह भारत का पहला निर्यातित विमान बना, जब 12 एचटी-2 घाना को बेचे गए।

लगभग 34 साल तक सेवा देने के बाद 1989 में एचटी-2 को भारतीय वायुसेना से रिटायर किया गया और उसकी जगह एचपीटी-32 ने ली। लेकिन एचटी-2 ने जो आत्मविश्वास, तकनीकी क्षमता और हम भी कर सकते हैं का जज्बा दिया, वह आज भी एचएएल की नसों में दौड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह आजादी के बाद के भारत की आत्मविश्वास और क्षमता को भी प्रतिबिंबित करती है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एचटी-2 का निर्माण कब हुआ?
एचटी-2 का निर्माण 1951 में किया गया था।
एचटी-2 का उद्देश्य क्या था?
एचटी-2 का उद्देश्य पायलट प्रशिक्षण के लिए एक उत्कृष्ट विमान प्रदान करना था।
इस विमान का पहला उड़ान कब हुआ?
एचटी-2 की पहली सार्वजनिक उड़ान 13 अगस्त 1951 को हुई।
एचटी-2 की खासियतें क्या थीं?
एचटी-2 की लंबाई 7.53 मीटर और अधिकतम गति 210 किलोमीटर प्रति घंटे थी।
क्या एचटी-2 का निर्यात हुआ था?
हाँ, 1958 में एचटी-2 का निर्यात घाना के लिए किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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