अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025: भारतीय वायुसेना का लेह से कार निकोबार तक योग अभियान
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वायुसेना ने 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वायुसेना इस अवसर पर कॉमन योग प्रोटोकॉल के तहत देशव्यापी कार्यक्रमों का आयोजन करेगी और फिटनेस, मानसिक दृढ़ता तथा समग्र स्वास्थ्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित करेगी। यह आयोजन भारत के लगभग हर भौगोलिक कोने में वायुसेना की उपस्थिति को योग के माध्यम से दर्शाएगा।
लेह से द्वारका तक फैला अभियान
इस वर्ष के योग कार्यक्रम केवल किसी एक स्थान तक सीमित नहीं हैं। उत्तर में लेह के ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर दक्षिण में कार निकोबार के समुद्री तटों तक, पूर्व में तवांग की सीमाओं से लेकर पश्चिम में पवित्र नगरी द्वारका तक — देशभर के विभिन्न एयरफोर्स स्टेशनों पर एक साथ योग सत्र आयोजित होंगे। यह भौगोलिक विस्तार स्वयं में इस अभियान की व्यापकता को दर्शाता है।
कौन होगा शामिल
इन कार्यक्रमों में वायुसेना के जवान और उनके परिजन तो भाग लेंगे ही, साथ ही स्कूली विद्यार्थी और एनसीसी कैडेट भी बड़ी संख्या में हिस्सा लेंगे। इस समावेशी दृष्टिकोण से यह आयोजन केवल सैन्य कार्यक्रम न रहकर एक व्यापक सामाजिक स्वास्थ्य पहल का रूप लेता है।
इस वर्ष की थीम: 'योग फॉर हेल्दी एजिंग'
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम 'योग फॉर हेल्दी एजिंग' रखी गई है। यह थीम जीवन के हर पड़ाव पर शारीरिक ऊर्जा, मानसिक स्थिरता और समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखने में योग की भूमिका को रेखांकित करती है। रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि योग न केवल शरीर को सक्षम बनाता है, बल्कि मन को शांत और एकाग्र भी रखता है।
वायुसेना की प्राथमिकता में योग
वायुसेना का मानना है कि शारीरिक फिटनेस, मानसिक दृढ़ता और आंतरिक संतुलन प्रत्येक एयर वॉरियर की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ हैं। इसी सोच के अनुरूप वायुसेना प्रतिवर्ष योग दिवस को संस्थागत स्तर पर मनाती है। गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस प्रतिवर्ष 21 जून को विश्वभर में मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत 2015 में संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के बाद हुई थी।
आगे क्या
21 जून को होने वाले इन कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय वायुसेना स्वास्थ्य और फिटनेस के प्रति अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को सार्वजनिक रूप से दोहराएगी। यह आयोजन देश के सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों तक योग की पहुँच सुनिश्चित करने का भी एक माध्यम है।