अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026: रेड शील्ड डिवीजन ने लेइमाखोंग मिलिट्री स्टेशन में किया योग सत्र
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना की रेड शील्ड डिवीजन ने 17 जून 2026 को लेइमाखोंग मिलिट्री स्टेशन में एक विशेष योग सत्र का आयोजन किया, जो 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की तैयारियों का हिस्सा था। इस सत्र में बड़ी संख्या में जवानों ने उत्साह के साथ भाग लिया, जो सेना की समग्र स्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
योग सत्र में क्या शामिल रहा
इस आयोजन में विभिन्न आसन, श्वास अभ्यास (प्राणायाम) और ध्यान (माइंडफुलनेस) गतिविधियाँ शामिल थीं। इनका उद्देश्य जवानों में लचीलापन, एकाग्रता, सहनशक्ति और मानसिक संतुलन को बढ़ाना था। सेना के एक बयान के अनुसार, इस पहल के ज़रिये जवानों को सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
सैनिकों की फिटनेस और मानसिक दृढ़ता पर ज़ोर
आयोजन का मुख्य लक्ष्य सैनिकों की शारीरिक फिटनेस, मानसिक दृढ़ता और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाना था। प्रतिभागियों को योग को रोज़मर्रा की दिनचर्या में शामिल करने और समुदाय में इसके लाभों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया गया। बयान में कहा गया कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि एक स्वस्थ, मज़बूत और संतुलित समाज के निर्माण की दिशा में एक कदम है।
राष्ट्रीय समारोह की तैयारियाँ
21 जून 2026 को मनाए जाने वाले 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य राष्ट्रीय समारोह का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर करेंगे। आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने इसकी पुष्टि की।
इसके साथ ही, संस्कृति मंत्रालय देश भर में 100 प्रतिष्ठित स्थानों पर विशेष योग दिवस कार्यक्रमों का आयोजन करेगा। आयुष मंत्रालय ने 13 से 20 जून तक 'गंगोत्री से गंगासागर: गंगा तट योग यात्रा' का भी आयोजन किया है, जो योग को पर्यावरण जागरूकता, नदी संस्कृति और सामुदायिक भागीदारी से जोड़ता है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 2014 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाए जाने के बाद से प्रत्येक वर्ष 21 जून को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। लेइमाखोंग जैसे दूरस्थ सैन्य केंद्रों तक इस उत्सव का विस्तार यह दर्शाता है कि भारतीय सेना अपने जवानों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।