30 सितंबर 2026
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आईआईटी दिल्ली और एसीएसआईआर के बीच MoU: पीएचडी-एमटेक छात्रों को मिलेगा दोहरा मार्गदर्शन

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आईआईटी दिल्ली और एसीएसआईआर के बीच MoU: पीएचडी-एमटेक छात्रों को मिलेगा दोहरा मार्गदर्शन

सारांश

आईआईटी दिल्ली और एसीएसआईआर ने एक ऐतिहासिक MoU पर हस्ताक्षर किए हैं, जो पीएचडी, एमटेक और एमएस छात्रों को दोहरा मार्गदर्शन और दोनों संस्थानों की विश्वस्तरीय प्रयोगशालाएँ — बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के — उपलब्ध कराएगा। यह साझेदारी CSIR और ICMR के संस्थानों तक भी विस्तृत है।

मुख्य बातें

आईआईटी दिल्ली और एसीएसआईआर ने 30 सितंबर 2026 को शोध एवं शिक्षा सहयोग के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए।
पीएचडी, एमटेक और एमएस छात्रों को कम से कम एक मार्गदर्शक आईआईटी दिल्ली से और एक मार्गदर्शक एसीएसआईआर से मिलेगा।
दूसरे संस्थान में अध्ययन के लिए छात्रों को अलग से प्रवेश या शुल्क नहीं देना होगा।
सहयोग का दायरा CSIR और ICMR से जुड़े शोध संस्थानों तक भी फैला है।
आईआईटी दिल्ली निदेशक प्रो.
रंगन बनर्जी और एसीएसआईआर निदेशक प्रो.
धर ने इस पहल का नेतृत्व किया।

आईआईटी दिल्ली और एकेडमी ऑफ साइंटिफिक एंड इनोवेटिव रिसर्च (एसीएसआईआर) ने 30 सितंबर 2026 को शिक्षा एवं शोध सहयोग के लिए एक महत्त्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जिससे दोनों संस्थानों के छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए अनुसंधान के नए द्वार खुल गए हैं। इस समझौते के तहत संयुक्त शोध, सह-मार्गदर्शन और संस्थागत सुविधाओं के साझा उपयोग की व्यवस्था की गई है। राष्ट्रीय महत्त्व के दोनों संस्थानों के बीच यह साझेदारी भारत के उच्च शिक्षा और शोध पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम है।

समझौते का दायरा और प्रमुख प्रावधान

इस MoU के अंतर्गत पीएचडी, एमटेक और एमएस कार्यक्रमों के शोध छात्रों के लिए संयुक्त मार्गदर्शन की व्यवस्था की गई है। इस प्रणाली में प्रत्येक छात्र को कम से कम एक मार्गदर्शक आईआईटी दिल्ली से और एक मार्गदर्शक एसीएसआईआर से मिलेगा। इससे शोधार्थियों को एक साथ दो प्रतिष्ठित संस्थानों की विशेषज्ञता और प्रयोगशाला सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

गौरतलब है कि इस व्यवस्था के तहत दूसरे संस्थान में जाकर अध्ययन या शोध करने वाले छात्रों को अलग से प्रवेश लेने या शिक्षण शुल्क देने की आवश्यकता नहीं होगी — यह प्रावधान इस साझेदारी को विशेष रूप से उल्लेखनीय बनाता है।

किन संस्थानों तक पहुँचेगा इस सहयोग का लाभ

इस समझौते का विस्तार केवल आईआईटी दिल्ली के परिसर तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) से संबद्ध शोध संस्थान भी इस सहयोग के दायरे में आएंगे। इससे देश भर में फैली अनुसंधान प्रयोगशालाओं का एक नेटवर्क छात्रों और शिक्षकों के लिए सुलभ हो सकेगा।

स्नातकोत्तर (PG) छात्र, शोधार्थी और शिक्षक दोनों संस्थानों में शैक्षणिक एवं शोध कार्य के लिए आवाजाही कर सकेंगे, जिससे संस्थागत सीमाओं से परे एक साझा अनुसंधान संस्कृति विकसित होगी।

नेतृत्व की राय

आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर रंगन बनर्जी ने बताया कि यह सहयोग पारंपरिक छात्र और शिक्षक आदान-प्रदान से आगे जाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य शोधकर्ताओं के बीच लगातार संवाद का मंच तैयार करना है और दोनों संस्थानों की प्रयोगशालाओं की क्षमताओं को साथ लाकर छात्रों और शिक्षकों को नए शोध विचारों पर काम करने का अवसर दिया जाएगा।

एसीएसआईआर के निदेशक प्रोफेसर मनोज के. धर ने कहा कि इस समझौते से दोनों संस्थानों की शोध सुविधाएं और विशेषज्ञता अधिक संख्या में छात्रों तक पहुँच सकेगी। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि छात्रों को ऐसे शोध विषयों पर काम करने के अवसर मिलेंगे जिनका उद्योग जगत से मजबूत संबंध है।

हस्ताक्षर समारोह और आगे की राह

समझौते पर हस्ताक्षर के अवसर पर दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी — निदेशक, डीन, सहायक डीन और विभागाध्यक्ष — उपस्थित रहे। इस दौरान दोनों संस्थानों ने अपनी अकादमिक और शोध गतिविधियों से संबंधित प्रस्तुतियाँ भी दीं।

यह समझौता ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' के तहत उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच अंतर-संस्थागत सहयोग को प्रोत्साहित करने पर जोर दे रही है। इस साझेदारी से उद्योग-उन्मुख शोध को बल मिलेगा और भारत की वैश्विक शोध प्रतिस्पर्धात्मकता को नई ऊँचाई मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — भारत में अंतर-संस्थागत सहयोग के समझौते अक्सर नौकरशाही और बजट की दीवारों से टकराकर ठंडे पड़ जाते हैं। CSIR और ICMR की प्रयोगशालाओं को इस नेटवर्क में शामिल करना महत्त्वाकांक्षी है, लेकिन इन संस्थानों के अपने प्रशासनिक ढाँचे इस प्रवाह को सुगम बनाएंगे या बाधित — यह देखना बाकी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों के साथ यह MoU सैद्धांतिक रूप से सटीक बैठता है, लेकिन बिना स्पष्ट समय-सीमा, लक्ष्य संख्याओं और समीक्षा तंत्र के, यह भी उन घोषणाओं की कतार में जुड़ सकता है जिनका अनुसरण करने वाले आँकड़े कभी सामने नहीं आते।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआईटी दिल्ली और एसीएसआईआर के बीच MoU से छात्रों को क्या फायदा होगा?
इस समझौते से पीएचडी, एमटेक और एमएस छात्रों को दोनों संस्थानों के मार्गदर्शक मिलेंगे और वे एक-दूसरे की प्रयोगशालाओं में बिना अतिरिक्त शुल्क के शोध कर सकेंगे। इससे छात्रों को विभिन्न विशेषज्ञताओं और शोध वातावरण में काम करने का अनूठा अवसर मिलेगा।
एसीएसआईआर क्या है और इसका महत्त्व क्यों है?
एकेडमी ऑफ साइंटिफिक एंड इनोवेटिव रिसर्च (एसीएसआईआर) राष्ट्रीय महत्त्व का एक संस्थान है जो CSIR और ICMR जैसी प्रमुख शोध परिषदों से जुड़ी प्रयोगशालाओं के नेटवर्क पर आधारित है। यह उन्नत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में शोध और शिक्षा के लिए देश के सबसे विस्तृत अकादमिक नेटवर्कों में से एक है।
क्या इस MoU के तहत दूसरे संस्थान में जाने के लिए अलग दाखिला लेना होगा?
नहीं। आईआईटी दिल्ली के अनुसार इस समझौते के तहत मेजबान संस्थान में शोध या अध्ययन के लिए अलग प्रवेश प्रक्रिया या शिक्षण शुल्क की आवश्यकता नहीं होगी। यह व्यवस्था छात्रों के लिए संस्थागत आवाजाही को सहज और सुलभ बनाती है।
इस सहयोग में CSIR और ICMR की क्या भूमिका होगी?
वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) से संबद्ध शोध संस्थान इस MoU के सहयोग ढाँचे में शामिल हैं। इससे आईआईटी दिल्ली के छात्र और शिक्षक इन परिषदों की विशेष प्रयोगशालाओं में भी शोध कर सकेंगे।
यह समझौता भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्यों से कैसे जुड़ता है?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच अंतर-संस्थागत सहयोग और बहु-विषयक शोध को प्रोत्साहित करती है। आईआईटी दिल्ली और एसीएसआईआर का यह MoU उसी दिशा में एक व्यावहारिक कदम है, जो संस्थागत सीमाओं को तोड़कर उद्योग-उन्मुख और बहु-विषयक शोध को बढ़ावा देता है।
राष्ट्र प्रेस
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