14 जुलाई 2026
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डीएसईयू-एमएएसी साझेदारी: दिल्ली के युवाओं को मिलेगी उद्योग-आधारित डिग्री, 2030 तक 20 लाख पेशेवरों की माँग

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डीएसईयू-एमएएसी साझेदारी: दिल्ली के युवाओं को मिलेगी उद्योग-आधारित डिग्री, 2030 तक 20 लाख पेशेवरों की माँग

सारांश

दिल्ली सरकार ने डीएसईयू और एमएएसी के बीच 5 वर्षीय एमओयू के जरिए एनीमेशन, गेमिंग और विजुअल इफेक्ट्स में उद्योग-आधारित डिग्री की राह खोली। 20,000 छात्रों को निःशुल्क प्रशिक्षण और 300 से अधिक विशेषज्ञों का फेडरेशन — दिल्ली को देश की रचनात्मक अर्थव्यवस्था का केंद्र बनाने की दिशा में ठोस कदम।

मुख्य बातें

डीएसईयू और एमएएसी (एमईएल ट्रेनिंग एंड असेसमेंट्स लिमिटेड) के बीच 13 जुलाई 2026 को 5 वर्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।
कक्षा 12 के बाद विद्यार्थियों को एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और डिजाइन में उद्योग-आधारित प्रशिक्षण के साथ विश्वविद्यालय-मान्यता प्राप्त डिग्री मिलेगी।
राष्ट्रीय फिल्म एवं डिजाइन हैकाथॉन के तहत 20,000 विद्यार्थियों को निःशुल्क डिजिटल कंटेंट निर्माण प्रशिक्षण दिया जाएगा।
दिल्ली क्रिएटर्स एवं एवीजीसी-एक्सआर फेडरेशन में 300 से अधिक विशेषज्ञ शामिल होंगे।
एवीजीसी-एक्सआर क्षेत्र 16-17% सीएजीआर से बढ़ रहा है; 2030 तक 20 लाख प्रशिक्षित पेशेवरों की माँग अनुमानित।

दिल्ली सरकार ने 13 जुलाई 2026 को कौशल-आधारित उच्च शिक्षा की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाते हुए दिल्ली स्किल एंड एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी (डीएसईयू) और एमईएल ट्रेनिंग एंड असेसमेंट्स लिमिटेड (एमएएसी की मूल कंपनी) के बीच पाँच वर्षों के लिए एक औपचारिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कराए। इस साझेदारी के तहत रचनात्मक उद्योग — एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और डिजाइन — में उद्योग-आधारित प्रशिक्षण को विश्वविद्यालय की मान्यता प्राप्त डिग्री से जोड़ा जाएगा।

साझेदारी में क्या है खास

समझौते के अंतर्गत एमएएसी उद्योग की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करेगा और विद्यार्थियों को उद्योग में प्लेसमेंट उपलब्ध कराएगा। वहीं डीएसईयू परिसर, परीक्षा संचालन और विश्वविद्यालय-मान्यता प्राप्त डिग्री प्रदान करने की जिम्मेदारी निभाएगा। इससे कक्षा 12 उत्तीर्ण विद्यार्थियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार तथा उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे।

तीन प्रमुख पहलें घोषित

दिल्ली के शिक्षा, उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने इस अवसर पर तीन महत्वपूर्ण पहलों की घोषणा की।

पहली पहल — डीएसईयू–एमएएसी डिग्री साझेदारी: इसके तहत कक्षा 12 के बाद विद्यार्थियों को उद्योग-प्रशिक्षण के साथ-साथ विश्वविद्यालय-मान्यता प्राप्त डिग्री मिलेगी, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क के अनुरूप होगी।

दूसरी पहल — राष्ट्रीय फिल्म एवं डिजाइन हैकाथॉन: दिल्ली सरकार के विद्यालयों के माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 20,000 विद्यार्थियों को निःशुल्क डिजिटल कंटेंट निर्माण, फिल्म, मीडिया और डिजाइन में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह कार्यक्रम 'लर्न बाय डूइंग' की अवधारणा पर आधारित होगा।

तीसरी पहल — दिल्ली क्रिएटर्स एवं एवीजीसी-एक्सआर फेडरेशन का गठन: एनीमेशन, गेमिंग, विजुअल इफेक्ट्स और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के 300 से अधिक विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर दिल्ली सरकार की उद्योगोन्मुखी नीति निर्माण में सहयोग लिया जाएगा।

एवीजीसी-एक्सआर क्षेत्र का बढ़ता महत्व

मंत्री सूद ने बताया कि भारत सरकार ने एवीजीसी-एक्सआर (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट, गेमिंग, कॉमिक्स एवं एक्सटेंडेड रियालिटी) क्षेत्र को देश का प्रमुख 'सनराइज सेक्टर' घोषित किया है। यह क्षेत्र वर्तमान में 16 से 17 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ रहा है। आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2030 तक देश में लगभग 20 लाख प्रशिक्षित पेशेवरों की माँग अनुमानित है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत का रचनात्मक उद्योग वैश्विक ओटीटी प्लेटफार्मों और गेमिंग कंपनियों की बढ़ती माँग के कारण तेजी से विस्तार कर रहा है। गौरतलब है कि दिल्ली को 'ऑरेंज इकोनॉमी' — यानी रचनात्मक एवं सांस्कृतिक उद्योग — का प्रमुख केंद्र बनाने का लक्ष्य इसी व्यापक राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा है।

सरकार का दृष्टिकोण

मंत्री आशीष सूद ने कहा कि ये पहलें विद्यालय स्तर पर प्रशिक्षण, विश्वविद्यालय स्तर की डिग्री और उद्योग-समर्थित नीति निर्माण के तीन स्तंभों पर टिकी हैं। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'क्रिएट इन इंडिया, क्रिएट फॉर द वर्ल्ड' के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

आगामी महीनों में इस साझेदारी के तहत पाठ्यक्रम की रूपरेखा सार्वजनिक होने और पहले बैच के नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि एमओयू की संख्या। एवीजीसी क्षेत्र में 2030 तक 20 लाख पेशेवरों की माँग का अनुमान उत्साहजनक है, परंतु यह माँग तभी पूरी होगी जब पाठ्यक्रम वास्तव में उद्योग की बदलती जरूरतों के साथ अपडेट होता रहे — जो भारत के सरकारी विश्वविद्यालयों की परंपरागत कमजोरी रही है। 20,000 छात्रों को निःशुल्क प्रशिक्षण देने की घोषणा स्वागत योग्य है, किंतु इसके क्रियान्वयन की समयसीमा और गुणवत्ता-मानक अभी स्पष्ट नहीं हैं।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीएसईयू और एमएएसी के बीच एमओयू से क्या बदलेगा?
इस 5 वर्षीय समझौते के तहत एनीमेशन, गेमिंग, विजुअल इफेक्ट्स और डिजाइन जैसे रचनात्मक क्षेत्रों में उद्योग-आधारित प्रशिक्षण को डीएसईयू की विश्वविद्यालय-मान्यता प्राप्त डिग्री से जोड़ा जाएगा। कक्षा 12 के बाद विद्यार्थियों को अब अलग-अलग संस्थानों में जाने की जरूरत नहीं होगी।
राष्ट्रीय फिल्म एवं डिजाइन हैकाथॉन क्या है और इसमें कौन भाग ले सकता है?
यह दिल्ली सरकार के विद्यालयों के माध्यम से आयोजित होने वाला कार्यक्रम है, जिसमें लगभग 20,000 विद्यार्थियों को निःशुल्क डिजिटल कंटेंट निर्माण, फिल्म, मीडिया और डिजाइन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह 'लर्न बाय डूइंग' की अवधारणा पर आधारित होगा।
एवीजीसी-एक्सआर क्षेत्र में करियर की कितनी संभावनाएँ हैं?
भारत सरकार ने एवीजीसी-एक्सआर को 'सनराइज सेक्टर' घोषित किया है, जो 16 से 17 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है। आँकड़ों के अनुसार, 2030 तक देश में लगभग 20 लाख प्रशिक्षित पेशेवरों की माँग अनुमानित है।
दिल्ली क्रिएटर्स एवं एवीजीसी-एक्सआर फेडरेशन का क्या उद्देश्य है?
इस फेडरेशन में एनीमेशन, गेमिंग, विजुअल इफेक्ट्स और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के 300 से अधिक विशेषज्ञों को एकजुट किया जाएगा। इसका मकसद दिल्ली सरकार की उद्योगोन्मुखी नीति निर्माण में विशेषज्ञ सहयोग सुनिश्चित करना है।
यह साझेदारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) से कैसे जुड़ी है?
यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क के अनुरूप तैयार की गई है, जो कौशल-आधारित शिक्षा को मुख्यधारा की डिग्री से जोड़ने पर जोर देती है। इससे विद्यार्थियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार और उच्च शिक्षा के अवसर मिलेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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