आरआरयू और एसएसबी के बीच ऐतिहासिक एमओयू, जवानों को मिलेगी वैश्विक डिग्री और डिप्लोमा

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आरआरयू और एसएसबी के बीच ऐतिहासिक एमओयू, जवानों को मिलेगी वैश्विक डिग्री और डिप्लोमा

सारांश

भारत की आंतरिक सुरक्षा को सशक्त बनाने के लिए आरआरयू और एसएसबी के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है, जो जवानों को वैश्विक मान्यता वाले पाठ्यक्रमों का लाभ दिलाएगा।

मुख्य बातें

आरआरयू और एसएसबी के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ।
जवानों को वैश्विक डिग्री और डिप्लोमा मिलेगा।
समझौते का उद्देश्य सुरक्षा प्रशिक्षण को सशक्त बनाना है।
समर्पित आरआरयू डेस्क की स्थापना की जाएगी।
यह पहल आंतरिक सुरक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाएगी।

नई दिल्ली, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत की आंतरिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूती प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) अकादमी के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता दिल्ली स्थित एसएसबी मुख्यालय में आयोजित एक औपचारिक समारोह में संपन्न हुआ, जिसमें दोनों संस्थानों के उच्च अधिकारी मौजूद थे।

इस अवसर पर आरआरयू के प्रो-वाइस चांसलर प्रो. कल्पेश एच वांड्रा, संबद्धता और प्रत्यायन के डीन अविनाश खरेल, और एसएसबी के महानिदेशक संजय सिंघल जैसे कई प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे। इस रणनीतिक सहयोग का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी, आधुनिक और अकादमिक रूप से मान्यता प्राप्त बनाना है।

समझौते के अनुसार, आरआरयू, एसएसबी अकादमी में चलाए जा रहे विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों को शैक्षणिक मान्यता प्रदान करेगा। इसके माध्यम से एक औपचारिक संरचना तैयार की जाएगी, जिसमें प्रशिक्षण और शिक्षा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। इस प्रयास का मुख्य लक्ष्य राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित अकादमिक अनुसंधान और जमीनी स्तर पर काम कर रहे सुरक्षा बलों की व्यावहारिक आवश्यकताओं के बीच की दूरी को कम करना है।

कार्यक्रम के दौरान प्रो. वांड्रा ने बताया कि इस सहयोग के तहत पहले ही “स्मार्ट सीमा प्रबंधन” जैसे विशिष्ट पाठ्यक्रम शुरू किए जा चुके हैं। आरआरयू अपनी अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और क्षेत्र-आधारित कार्यशालाओं के माध्यम से एसएसबी कर्मियों को व्यावहारिक और तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करेगा, जिससे उनकी पेशेवर क्षमता में वृद्धि होगी।

एसएसबी के महानिदेशक संजय सिंघल ने इस साझेदारी को बल के लिए अत्यंत लाभकारी बताते हुए कहा कि इससे अधिकारियों के कौशल विकास और पुनः कौशल (री-स्किलिंग) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह पहल बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप बल को और अधिक सक्षम बनाएगी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में स्थापित आरआरयू का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और पुलिसिंग के क्षेत्र में उत्कृष्टता का केंद्र बनना है। इस समझौते के माध्यम से एसएसबी के मौजूदा और भविष्य के पाठ्यक्रमों को प्रमाणपत्र, डिप्लोमा से लेकर स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर तक मान्यता दी जा सकेगी।

एमओयू के तहत पाठ्यक्रमों का मूल्यांकन, पाठ्यचर्या में सुधार और मानकीकृत मूल्यांकन प्रणाली विकसित की जाएगी। इसके अलावा, एसएसबी अकादमी में एक समर्पित आरआरयू डेस्क भी स्थापित किया जाएगा, जो समन्वय और कार्यान्वयन की प्रक्रिया को सरल बनाएगा।

यह साझेदारी न केवल एसएसबी कर्मियों के पेशेवर विकास को बढ़ावा देगी बल्कि उन्हें शैक्षणिक पहचान भी प्रदान करेगी। साथ ही, यह पहल देश की आंतरिक सुरक्षा प्रणाली को आधुनिक, तकनीक संचालित और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में शैक्षणिक उत्कृष्टता को भी बढ़ावा देगा। यह एक सकारात्मक कदम है जो भारत की आंतरिक सुरक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में उठाया गया है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरआरयू और एसएसबी के बीच समझौता कब हुआ?
यह समझौता 21 मार्च को नई दिल्ली में हुआ।
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी और अकादमिक रूप से मान्यता प्रदान करना है।
क्या लाभ होगा इस समझौते से?
इससे जवानों को वैश्विक स्तर की डिग्री और डिप्लोमा प्राप्त होंगे, जिससे उनकी पेशेवर क्षमता में वृद्धि होगी।
इस समझौते के तहत कौन से पाठ्यक्रम उपलब्ध होंगे?
इसमें 'स्मार्ट सीमा प्रबंधन' जैसे विशेष पाठ्यक्रम शामिल हैं।
क्या यह समझौता केवल एसएसबी के लिए है?
नहीं, यह समझौता सभी सुरक्षा बलों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।
राष्ट्र प्रेस
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