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IIT दिल्ली और वॉलमार्ट ग्लोबल टेक की ₹9 करोड़ की AI साझेदारी, 4 साल में शोध व फेलोशिप का लक्ष्य

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IIT दिल्ली और वॉलमार्ट ग्लोबल टेक की ₹9 करोड़ की AI साझेदारी, 4 साल में शोध व फेलोशिप का लक्ष्य

सारांश

आईआईटी दिल्ली और वॉलमार्ट ग्लोबल टेक ने ₹9 करोड़ की चार वर्षीय एआई साझेदारी की है। इसमें फेलोशिप, शिक्षक प्रशिक्षण और समाज-केंद्रित शोध शामिल हैं — यह भारत में उद्योग-शिक्षा सहयोग के बढ़ते चलन की एक नई कड़ी है।

मुख्य बातें

आईआईटी दिल्ली और वॉलमार्ट ग्लोबल टेक ने 6 नवंबर 2026 को ₹9 करोड़ की 4 साल की एआई साझेदारी की घोषणा की।
चालू वित्त वर्ष के लिए ₹2.3 करोड़ आवंटित; शोधार्थियों को विशेष फेलोशिप दी जाएगी।
यह पहल यार्डी स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तहत लागू होगी, जिसकी स्थापना 2020 में हुई थी।
स्कूल-कॉलेज के शिक्षकों को एआई प्रशिक्षण देकर शिक्षा को आईआईटी परिसर से बाहर पहुँचाया जाएगा।
शोध का दायरा स्वास्थ्य, रोबोटिक्स, जलवायु, परिवहन और उद्योग जैसे अनुप्रयोग क्षेत्रों तक फैला होगा।

आईआईटी दिल्ली ने 6 नवंबर 2026 को वॉलमार्ट ग्लोबल टेक के साथ ₹9 करोड़ की चार वर्षीय साझेदारी की घोषणा की, जिसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग और डेटा साइंस के क्षेत्र में उच्च स्तरीय शोध को बढ़ावा देना और कुशल प्रतिभाएं तैयार करना है। इस पहल के तहत शोधार्थियों को विशेष फेलोशिप दी जाएगी और शिक्षकों को प्रशिक्षण के ज़रिए एआई शिक्षा को देश के अन्य संस्थानों तक पहुँचाया जाएगा। चालू वित्त वर्ष के लिए इस पहल में करीब ₹2.3 करोड़ निर्धारित किए गए हैं।

साझेदारी की संरचना और वित्तीय प्रावधान

यह साझेदारी आईआईटी दिल्ली के यार्डी स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने की है, जिसकी स्थापना वर्ष 2020 में हुई थी। कुल ₹9 करोड़ की यह पहल चार वर्षों में चरणबद्ध रूप से लागू की जाएगी, और आईआईटी दिल्ली इसकी नियमित प्रगति समीक्षा की जिम्मेदारी संभालेगा। वित्तीय प्रावधानों के अनुसार, पहले वर्ष के लिए ₹2.3 करोड़ आवंटित किए गए हैं।

यार्डी स्कूल में विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ शिक्षक मिलकर स्वास्थ्य सेवाएं, रोबोटिक्स, पदार्थ विज्ञान, आधुनिक उद्योग, जलवायु और परिवहन जैसे अनुप्रयोग क्षेत्रों में एआई-आधारित शोध करते हैं।

शोध और फेलोशिप का दायरा

इस पहल के अंतर्गत ऐसे विषयों पर शोध को प्राथमिकता दी जाएगी जिनका उपयोग उद्योगों के साथ-साथ समाज की व्यापक ज़रूरतों को पूरा करने में हो सके। शोध करने वाले विद्यार्थियों को विशेष फेलोशिप प्रदान की जाएगी, ताकि वे बिना आर्थिक बाधा के अपने शोध कार्य को आगे बढ़ा सकें।

गौरतलब है कि यह पहल केवल उच्च शिक्षण संस्थानों तक सीमित नहीं रहेगी — इसमें उद्योगों में कार्यरत पेशेवरों और उन समुदायों के लोगों के लिए भी सीखने के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे, जिन्हें अब तक पर्याप्त तकनीकी शिक्षा नहीं मिल पाई है।

शिक्षक प्रशिक्षण और एआई शिक्षा का विस्तार

इस साझेदारी की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि आईआईटी दिल्ली के शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ स्कूलों और कॉलेजों के शिक्षकों को भी एआई से जुड़े विषयों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे एआई की पढ़ाई और तकनीकी जानकारी को आईआईटी दिल्ली परिसर से बाहर अन्य संस्थानों तक पहुँचाने में सहायता मिलेगी।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार 'इंडिया एआई मिशन' के तहत देश में एआई अवसंरचना और कौशल विकास को तेज़ी से आगे बढ़ा रही है। इस पहल को उस राष्ट्रीय प्रयास के पूरक के रूप में देखा जा रहा है।

संस्थान प्रमुख की प्रतिक्रिया

आईआईटी दिल्ली के डीन प्रो. जयंत जैन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेज़ी से शोध, उद्योग और समाज को बदल रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योगों के साथ साझेदारी से उन्नत शोध, नए प्रयोग और तकनीक पर आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने में मदद मिलती है।

प्रो. जैन ने इस सहयोग से सार्थक और दीर्घकालिक प्रभाव डालने वाले परिणाम मिलने की उम्मीद जताई। संस्थान को आशा है कि फेलोशिप, शिक्षक प्रशिक्षण और शोध सुविधाओं के विकास से एआई क्षेत्र में शोधकर्ताओं और शिक्षकों की एक नई पीढ़ी तैयार होगी।

आगे की राह

आईआईटी दिल्ली अगले चार वर्षों तक इस पहल को लागू करेगा और प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी। यह साझेदारी भारत में उद्योग-शिक्षा सहयोग के बढ़ते चलन का प्रतिनिधित्व करती है, जहाँ प्रौद्योगिकी कंपनियाँ शैक्षणिक संस्थानों में सीधे निवेश कर रही हैं। आने वाले समय में इस मॉडल की सफलता देश के अन्य आईआईटी और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए भी एक संदर्भ बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि फेलोशिप और शिक्षक प्रशिक्षण के वादे ज़मीनी स्तर पर कितने संस्थानों तक पहुँचते हैं। अब तक ऐसे कई सहयोग आईआईटी परिसरों तक सिमट कर रह गए हैं और दूसरे और तीसरे दर्जे के संस्थानों तक प्रभाव सीमित रहा है। इसके अलावा, चार वर्षीय पहल में स्वतंत्र मूल्यांकन तंत्र का उल्लेख न होना एक सवाल छोड़ता है — क्या सफलता केवल फेलोशिप की संख्या से मापी जाएगी, या शोध के सामाजिक प्रभाव से भी?
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआईटी दिल्ली और वॉलमार्ट ग्लोबल टेक की एआई साझेदारी क्या है?
यह ₹9 करोड़ की चार वर्षीय साझेदारी है, जिसकी घोषणा 6 नवंबर 2026 को की गई। इसके तहत एआई, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस में शोध, छात्रों को फेलोशिप और शिक्षकों को प्रशिक्षण देने का प्रावधान है।
इस पहल में कितना पैसा खर्च होगा और किस पर?
कुल ₹9 करोड़ चार वर्षों में खर्च होंगे, जिनमें से चालू वित्त वर्ष के लिए ₹2.3 करोड़ निर्धारित किए गए हैं। यह राशि शोध, फेलोशिप, शिक्षक प्रशिक्षण और शोध सुविधाओं के विकास पर लगाई जाएगी।
यार्डी स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है?
यह आईआईटी दिल्ली में वर्ष 2020 में स्थापित एआई-केंद्रित स्कूल है, जहाँ विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ मिलकर स्वास्थ्य सेवाएं, रोबोटिक्स, जलवायु, परिवहन और आधुनिक उद्योग जैसे क्षेत्रों में एआई शोध करते हैं। यही स्कूल वॉलमार्ट ग्लोबल टेक के साथ इस साझेदारी का केंद्र है।
इस साझेदारी से किसे फायदा होगा?
शोधार्थी छात्रों को फेलोशिप मिलेगी, आईआईटी दिल्ली के शिक्षकों की क्षमता बढ़ेगी और स्कूल-कॉलेज के शिक्षकों को एआई प्रशिक्षण मिलेगा। इसके अलावा उद्योगों में कार्यरत पेशेवरों और उन समुदायों के लोगों को भी लाभ होगा जिन्हें अब तक तकनीकी शिक्षा के पर्याप्त अवसर नहीं मिले।
इस पहल की प्रगति की समीक्षा कैसे होगी?
आईआईटी दिल्ली अगले चार वर्षों तक इस पहल को लागू करने और उसकी प्रगति की नियमित समीक्षा करने की जिम्मेदारी संभालेगा। संस्थान ने संकेत दिया है कि फेलोशिप, शिक्षक प्रशिक्षण और शोध सुविधाओं के विकास के परिणामों की निगरानी की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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