एनसीपी विलय पर सुनील तटकरे का बड़ा बयान: 'अजित पवार होते तो 12 फरवरी को दोनों गुट एक हो जाते'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुनील तटकरे ने 6 नवंबर 2026 को मुंबई में कहा कि यदि पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार जीवित होते, तो एनसीपी के दोनों गुटों का विलय 12 फरवरी को ही हो चुका होता। तटकरे के इस बयान ने ऐसे समय में सियासी हलचल मचा दी है, जब एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और एनसीपी-एसपी प्रमुख शरद पवार के बीच गुरुवार रात मुलाकात हो चुकी है।
तटकरे का बयान और विलय की पृष्ठभूमि
तटकरे ने अपने बयान में स्पष्ट किया, 'अजित पवार दादा के जीवित रहने के दौरान विलय को लेकर निश्चित रूप से चर्चा हुई थी। उन्होंने यह भी बताया था कि विलय किस तरह होगा। अगर अजित दादा यहाँ होते तो 12 फरवरी को विलय हो गया होता।' उन्होंने जोड़ा कि यह अजित पवार की मजबूत इच्छाशक्ति के कारण संभव हो पाता और चूँकि वह उनके करीबी सहयोगियों में से एक थे, इसलिए उन्हें इस विषय की पूरी जानकारी है।
तटकरे ने बताया कि 28 जनवरी को एक दुर्घटना में अजित पवार के निधन के कारण यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। उनका यह बयान पार्टी के भीतर उस उम्मीद को फिर से जीवित करता है जो अजित पवार के निधन के बाद से दबी हुई थी।
सुप्रिया सुले और शरद पवार की स्थिति
एनसीपी-एसपी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने इससे पहले कहा था कि चूँकि यह बातचीत सीधे अजित पवार के साथ हुई थी और अब वह हमारे बीच नहीं हैं, इसलिए यह विषय लगभग समाप्त हो चुका है। हालाँकि सुले ने भी यह माना था कि यदि अजित पवार जीवित होते तो विलय हो भी सकता था।
इस बीच प्रफुल्ल पटेल ने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती शरद पवार से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। मुलाकात के बाद पटेल ने पुष्टि की कि दोनों के बीच राजनीति पर भी बातचीत हुई, हालाँकि उन्होंने विवरण साझा करने से मना कर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी की शरद पवार से बात और पार्टी के भीतर तनाव
इस घटनाक्रम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को शरद पवार को फोन कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। शरद पवार के करीबी सहयोगी विट्ठल मणियार ने बताया कि प्रधानमंत्री ने कहा, 'सुप्रिया और हम देश संभाल लेंगे, आप अपनी सेहत का ध्यान रखिए और आराम कीजिए। आपका आशीर्वाद हम पर बना रहे।'
इसी दौरान एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं और सांसद पार्थ पवार के बीच बढ़ते तनाव की खबरें भी सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार, सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार को छोड़कर पार्टी के लगभग सभी बड़े नेता रविवार रात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले थे और पार्थ पवार की एकतरफा कार्यशैली को लेकर शिकायत की थी। शाह ने कथित तौर पर संगठन को मजबूत करने की सलाह दी और कहा कि एनसीपी की संगठनात्मक कमजोरी महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन को नुकसान पहुँचा रही है।
विलय पर एनसीपी का आधिकारिक रुख
गौरतलब है कि सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने 25 अक्टूबर को हुई कोर कमेटी की बैठक के बाद स्पष्ट कहा था कि दोनों गुटों के बीच कोई विलय नहीं होगा। इसके बावजूद प्रफुल्ल पटेल और शरद पवार की मुलाकात के बाद विलय की अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं।
चुनाव आयोग से आधिकारिक मान्यता और चुनाव चिह्न प्राप्त कर चुकी एनसीपी (अजित गुट) खुद को पार्टी का वैध उत्तराधिकारी साबित करने पर जोर दे रही है और महायुति गठबंधन में अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखना चाहती है।
आगे क्या होगा
प्रफुल्ल पटेल ने संकेत दिया है कि वह 10 नवंबर के आसपास या उसके बाद शरद पवार से एक बार फिर मुलाकात कर सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पवार परिवार के भीतर बढ़ता तनाव, सुनील तटकरे के बयान और शरद पवार का स्वास्थ्य — ये तीनों मिलकर महाराष्ट्र की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ ला सकते हैं। अगले कुछ हफ्तों में दोनों गुटों के बीच जो भी समीकरण बनेंगे, वे राज्य में आगामी चुनावी रणनीति को सीधे प्रभावित करेंगे।