6 नवंबर 2026
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ट्राई का टेलीकॉम इंटरकनेक्शन फ्रेमवर्क: चौथा संशोधन विनियमन जारी, 1 जनवरी 2027 से लागू

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ट्राई का टेलीकॉम इंटरकनेक्शन फ्रेमवर्क: चौथा संशोधन विनियमन जारी, 1 जनवरी 2027 से लागू

सारांश

ट्राई ने फ्लॉपी डिस्क युग को पीछे छोड़ दिया — 27 साल पुराने इंटरकनेक्ट रजिस्टर ढाँचे को डिजिटल पोर्टल से बदला जाएगा। 1 जनवरी 2027 से सभी टेलीकॉम कंपनियों को समझौते ऑनलाइन, टेक्स्ट-सर्चेबल पीडीएफ में 15 दिन के भीतर दर्ज करने होंगे।

मुख्य बातें

ट्राई ने 6 नवंबर 2026 को 'इंटरकनेक्ट समझौतों का रजिस्टर (चौथा संशोधन) विनियमन, 2026' अधिसूचित किया।
नए नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी; सभी सेवा प्रदाताओं पर लागू।
फ्लॉपी डिस्क और प्रिंटेड कॉपी की अनिवार्यता समाप्त; अब समर्पित ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण जरूरी।
नए और संशोधित समझौते लागू होने के 15 दिन के भीतर टेक्स्ट-सर्चेबल पीडीएफ में जमा करने होंगे।
रजिस्टर देखने का शुल्क ₹1,500 प्रति घंटा और प्रतियों के लिए ₹500 प्रति पेज तय।

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने 6 नवंबर 2026 को टेलीकॉम सेक्टर के इंटरकनेक्शन ढाँचे को आधुनिक बनाने के लिए 'इंटरकनेक्ट समझौतों का रजिस्टर (चौथा संशोधन) विनियमन, 2026' अधिसूचित किया। ये नए नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे और देश के सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं पर लागू होंगे।

इंटरकनेक्शन फ्रेमवर्क क्या है

दूरसंचार क्षेत्र में इंटरकनेक्शन उन वाणिज्यिक और तकनीकी व्यवस्थाओं को कहते हैं, जिनके ज़रिये दो या दो से अधिक नेटवर्क आपस में जुड़कर ट्रैफिक का आदान-प्रदान करते हैं। इसी के माध्यम से अलग-अलग सेवा प्रदाताओं के उपभोक्ता निर्बाध रूप से एक-दूसरे से संपर्क कर पाते हैं। इंटरकनेक्ट समझौतों का रजिस्टर विनियमन, 1999 से यह प्रक्रिया विनियमित होती आई है, और चौथा संशोधन उसी ढाँचे को डिजिटल युग के अनुकूल बनाता है।

मुख्य बदलाव क्या हैं

संशोधित नियमों के तहत अब सभी सेवा प्रदाताओं को ट्राई के समर्पित ऑनलाइन पोर्टल पर इंटरकनेक्ट समझौते और उनमें किए गए बाद के बदलाव पंजीकृत करने होंगे। फ्लॉपी डिस्क पर सॉफ्ट कॉपी और प्रिंटेड कॉपी जमा करने की पुरानी अनिवार्यता अब समाप्त कर दी गई है।

1 जनवरी 2027 तक जो समझौते लागू हों, उन्हें उस तारीख से 15 दिन के भीतर पोर्टल पर दर्ज करना होगा। नए समझौते या उनमें संशोधन को लागू होने अथवा संशोधित होने के 15 दिन के अंदर जमा करना अनिवार्य होगा।

दस्तावेज़ प्रारूप और पहुँच

सेवा प्रदाताओं को अपने समझौते और सहायक दस्तावेज़ 'टेक्स्ट-सर्च करने योग्य' पीडीएफ प्रारूप में जमा करने होंगे, ताकि रिकॉर्ड की प्रोसेसिंग, जाँच और उन्हें खोजने का काम कुशलतापूर्वक हो सके। इसके साथ ही, मौजूदा भौतिक (कागजी) माध्यम के अतिरिक्त, रजिस्टर के ज़रूरी हिस्सों तक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भी पहुँचा जा सकेगा — बशर्ते यह लागू नियमों के दायरे में हो।

शुल्क संरचना

संचार मंत्रालय के बयान के अनुसार, रजिस्टर देखने का शुल्क ₹1,500 प्रति घंटा (या एक घंटे से कम समय के लिए भी यही दर) तय किया गया है। दस्तावेज़ों की प्रतियाँ लेने पर ₹500 प्रति पेज का शुल्क लिया जाएगा।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह संशोधन ऐसे समय में आया है जब भारत का दूरसंचार उद्योग 5G विस्तार और नेटवर्क आधुनिकीकरण के दौर से गुज़र रहा है। डिजिटल पोर्टल आधारित पंजीकरण प्रक्रिया इंटरकनेक्ट समझौतों की निगरानी को अधिक पारदर्शी और वास्तविक समय में सुलभ बनाएगी। 1 जनवरी 2027 की समयसीमा सेवा प्रदाताओं को तकनीकी और परिचालन तैयारी के लिए पर्याप्त अवसर देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि नया डिजिटल पोर्टल वास्तव में कितना सुलभ और सशक्त होगा। फ्लॉपी डिस्क हटाना महज़ प्रतीकात्मक आधुनिकीकरण है — ज़रूरत इस बात की है कि पोर्टल पर दर्ज डेटा नागरिकों, शोधकर्ताओं और प्रतिस्पर्धा नियामकों के लिए वास्तव में खुला और उपयोगी हो। ₹1,500 प्रति घंटे का शुल्क जनता की पहुँच में बाधा बन सकता है, जो पारदर्शिता के उद्देश्य के विपरीत है। पंद्रह दिन की समयसीमा सराहनीय है, लेकिन इसके अनुपालन की निगरानी और उल्लंघन पर दंड का स्पष्ट ढाँचा न हो तो यह भी कागजी खानापूरी बन सकती है।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्राई का इंटरकनेक्ट समझौतों का रजिस्टर (चौथा संशोधन) विनियमन, 2026 क्या है?
यह ट्राई द्वारा 6 नवंबर 2026 को जारी नया विनियामक ढाँचा है, जो 1999 से चले आ रहे इंटरकनेक्ट समझौते पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटल बनाता है। इसके तहत सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को अपने इंटरकनेक्ट समझौते ऑनलाइन पोर्टल पर जमा करने होंगे।
ये नए नियम कब से लागू होंगे और किन पर लागू होंगे?
ये विनियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे और देश के सभी टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं पर लागू होंगे। उस तारीख तक लागू समझौतों को 15 दिनों के भीतर और नए समझौतों को लागू होते ही 15 दिन के अंदर पंजीकृत करना होगा।
पुरानी व्यवस्था में क्या बदला है?
पहले सेवा प्रदाताओं को फ्लॉपी डिस्क पर सॉफ्ट कॉपी के साथ प्रिंटेड कॉपी जमा करनी होती थी, जो अब पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। अब ट्राई के समर्पित ऑनलाइन पोर्टल पर टेक्स्ट-सर्चेबल पीडीएफ में दस्तावेज़ जमा करने होंगे।
इंटरकनेक्ट रजिस्टर देखने का शुल्क क्या होगा?
संचार मंत्रालय के बयान के अनुसार, रजिस्टर देखने का शुल्क ₹1,500 प्रति घंटा (एक घंटे से कम समय के लिए भी यही दर) तय किया गया है। दस्तावेज़ों की प्रतियाँ लेने पर ₹500 प्रति पेज अलग से देना होगा।
इंटरकनेक्शन फ्रेमवर्क का आम उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ता है?
इंटरकनेक्शन व्यवस्था ही यह सुनिश्चित करती है कि अलग-अलग कंपनियों के ग्राहक एक-दूसरे को कॉल कर सकें और डेटा सेवाओं का निर्बाध आदान-प्रदान हो सके। डिजिटल पंजीकरण से इन समझौतों की निगरानी बेहतर होगी, जिससे दीर्घकालिक रूप से सेवा गुणवत्ता और नेटवर्क पारदर्शिता में सुधार की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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