ट्राई का टेलीकॉम इंटरकनेक्शन फ्रेमवर्क: चौथा संशोधन विनियमन जारी, 1 जनवरी 2027 से लागू
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने 6 नवंबर 2026 को टेलीकॉम सेक्टर के इंटरकनेक्शन ढाँचे को आधुनिक बनाने के लिए 'इंटरकनेक्ट समझौतों का रजिस्टर (चौथा संशोधन) विनियमन, 2026' अधिसूचित किया। ये नए नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे और देश के सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं पर लागू होंगे।
इंटरकनेक्शन फ्रेमवर्क क्या है
दूरसंचार क्षेत्र में इंटरकनेक्शन उन वाणिज्यिक और तकनीकी व्यवस्थाओं को कहते हैं, जिनके ज़रिये दो या दो से अधिक नेटवर्क आपस में जुड़कर ट्रैफिक का आदान-प्रदान करते हैं। इसी के माध्यम से अलग-अलग सेवा प्रदाताओं के उपभोक्ता निर्बाध रूप से एक-दूसरे से संपर्क कर पाते हैं। इंटरकनेक्ट समझौतों का रजिस्टर विनियमन, 1999 से यह प्रक्रिया विनियमित होती आई है, और चौथा संशोधन उसी ढाँचे को डिजिटल युग के अनुकूल बनाता है।
मुख्य बदलाव क्या हैं
संशोधित नियमों के तहत अब सभी सेवा प्रदाताओं को ट्राई के समर्पित ऑनलाइन पोर्टल पर इंटरकनेक्ट समझौते और उनमें किए गए बाद के बदलाव पंजीकृत करने होंगे। फ्लॉपी डिस्क पर सॉफ्ट कॉपी और प्रिंटेड कॉपी जमा करने की पुरानी अनिवार्यता अब समाप्त कर दी गई है।
1 जनवरी 2027 तक जो समझौते लागू हों, उन्हें उस तारीख से 15 दिन के भीतर पोर्टल पर दर्ज करना होगा। नए समझौते या उनमें संशोधन को लागू होने अथवा संशोधित होने के 15 दिन के अंदर जमा करना अनिवार्य होगा।
दस्तावेज़ प्रारूप और पहुँच
सेवा प्रदाताओं को अपने समझौते और सहायक दस्तावेज़ 'टेक्स्ट-सर्च करने योग्य' पीडीएफ प्रारूप में जमा करने होंगे, ताकि रिकॉर्ड की प्रोसेसिंग, जाँच और उन्हें खोजने का काम कुशलतापूर्वक हो सके। इसके साथ ही, मौजूदा भौतिक (कागजी) माध्यम के अतिरिक्त, रजिस्टर के ज़रूरी हिस्सों तक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भी पहुँचा जा सकेगा — बशर्ते यह लागू नियमों के दायरे में हो।
शुल्क संरचना
संचार मंत्रालय के बयान के अनुसार, रजिस्टर देखने का शुल्क ₹1,500 प्रति घंटा (या एक घंटे से कम समय के लिए भी यही दर) तय किया गया है। दस्तावेज़ों की प्रतियाँ लेने पर ₹500 प्रति पेज का शुल्क लिया जाएगा।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह संशोधन ऐसे समय में आया है जब भारत का दूरसंचार उद्योग 5G विस्तार और नेटवर्क आधुनिकीकरण के दौर से गुज़र रहा है। डिजिटल पोर्टल आधारित पंजीकरण प्रक्रिया इंटरकनेक्ट समझौतों की निगरानी को अधिक पारदर्शी और वास्तविक समय में सुलभ बनाएगी। 1 जनवरी 2027 की समयसीमा सेवा प्रदाताओं को तकनीकी और परिचालन तैयारी के लिए पर्याप्त अवसर देती है।