इंडिया ब्लॉक की बैठक से पहले दिल्ली में विपक्ष पर 'दोगलापन' के पोस्टर, ईसीआई विवाद केंद्र में
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 30 सितंबर को इंडिया ब्लॉक की अहम बैठक से ठीक पहले कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के आसपास कई पोस्टर सामने आए, जिनमें विपक्षी नेताओं पर भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को लेकर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया गया। यह बैठक मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से बुलाई गई थी।
पोस्टरों में क्या था
पोस्टरों में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी, शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के सुप्रीमो एम. के. स्टालिन, कांग्रेस की सोशल मीडिया चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत, तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी और कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की तस्वीरें थीं।
एक पोस्टर पर लिखा था: 'जब स्कोरबोर्ड के साथ जवाब बदल जाए। हर जीत पर जबरदस्त जश्न, हर हार पर वोट चोरी का आरोप। ईसीआई सही है या गलत? यह बस इस बात पर निर्भर करता है कि वे जीते हैं या नहीं।' एक अन्य पोस्टर पर 'इंडी अलायंस का दोगलापन — जीते तो ईसीआई को ताली, हारे तो ईसीआई को गाली' लिखा था।
अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर सीधा निशाना
एक पोस्टर में अखिलेश यादव के दो अलग-अलग बयानों को आमने-सामने रखा गया — 2017 में समाजवादी पार्टी की जीत के बाद उनकी ईसीआई तारीफ और 2022 में पार्टी की हार के बाद चुनाव आयोग की आलोचना। पोस्टर पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी थी: 'कितना सुविधाजनक है, पूकी!'
एक अन्य पोस्टर में राहुल गांधी को सामान के साथ दर्शाते हुए लिखा गया: 'विदेशी धरती पर मस्ती में चूर, 59 दिन बिहार कैंपेन से रहे दूर। लेकिन जब जनता ने नतीजा सुनाया, तो सवाल ईसीआई पर उठाया। आए देर से, इल्जाम घड़ी पर।' इन पोस्टरों के पीछे किसका हाथ है, यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका।
इंडिया ब्लॉक की बैठक का संदर्भ
यह बैठक कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) द्वारा एक कड़ा प्रस्ताव पारित करने के एक दिन बाद आयोजित की गई, जिसमें सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को रोकने और मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए नामों को वापस जोड़ने की माँग की गई थी। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे CWC बैठक में उठाए गए मुद्दों को व्यापक विपक्षी मंच के सामने रखेंगे।
गौरतलब है कि विपक्षी नेताओं ने स्वयं माना है कि गठबंधन के पास संसद में सीईसी को हटाने के लिए आवश्यक संख्या बल नहीं है। इसके बावजूद, विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता के नाम पर एकजुटता का प्रदर्शन करना चाहते हैं।
गठबंधन की आंतरिक चुनौतियाँ
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब इंडिया ब्लॉक केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को सत्ता से बाहर करने में नाकाम रहा है और तब से कई राज्यों में उसे राजनीतिक झटके लगे हैं। विपक्षी एकजुटता की पहल में अग्रणी रहे जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ मजबूती से खड़े हैं।
ऐसे में बुधवार की बैठक गठबंधन की आंतरिक एकजुटता और उसके स्पष्ट राजनीतिक उद्देश्यों की एक और कसौटी बन सकती है। आलोचकों का कहना है कि संख्या बल के अभाव में यह बैठक प्रतीकात्मक दबाव की रणनीति से अधिक कुछ नहीं है।
आगे क्या होगा
बैठक के बाद विपक्षी गठबंधन की साझा रणनीति सार्वजनिक होने की उम्मीद है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या गठबंधन के सभी घटक दल SIR प्रक्रिया और सीईसी के इस्तीफे की माँग पर एकमत रह पाते हैं, या आंतरिक मतभेद फिर से उभरते हैं।