'इंडिया' ब्लॉक की बैठक 8 जून को दिल्ली में, उद्धव ठाकरे वर्चुअल; DMK ने किया किनारा
सारांश
मुख्य बातें
'इंडिया' गठबंधन की अहम बैठक सोमवार, 8 जून को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में दोपहर 12 बजे आयोजित हुई, जिसमें 23 राजनीतिक दलों ने भागीदारी की पुष्टि की। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे वर्चुअल माध्यम से जुड़े, जबकि गठबंधन के प्रमुख सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने कांग्रेस पर 'विश्वासघात' का आरोप लगाते हुए बैठक से दूरी बनाए रखी।
बैठक का स्वरूप और प्रमुख उपस्थिति
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी इस बैठक में सशरीर शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार, यह बैठक गठबंधन सहयोगियों के बीच हुई आपसी चर्चा के बाद बुलाई गई, जिसमें TMC की भूमिका निर्णायक रही। बैठक का मुख्य एजेंडा विपक्षी एकता को मज़बूत करना और 2029 के आम चुनाव की रणनीति पर विचार-विमर्श बताया गया।
उद्धव ठाकरे की वर्चुअल भागीदारी
शिवसेना (यूबीटी) के नेता और सांसद संजय राउत ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर जानकारी दी कि उद्धव ठाकरे वर्चुअल रूप से बैठक में शामिल हुए। राउत ने लिखा, 'आज दिल्ली में 'इंडिया' ब्लॉक की बैठक में शिवसेना (यूबीटी) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे वर्चुअल रूप से शामिल होंगे। शिवसेना 'इंडिया' गठबंधन की एक प्रतिबद्ध सदस्य है। हमारा लगातार और आगे भी यही रुख रहेगा कि 'इंडिया' ब्लॉक को और अधिक एकजुट और मजबूत बनाया जाए। हम देश के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों के खिलाफ मिलकर लड़ेंगे और 2029 में सार्थक बदलाव लाएंगे।'
DMK की अनुपस्थिति और कांग्रेस से नाराज़गी
DMK ने इस बैठक में शामिल न होने का फैसला किया, और इसकी वजह तमिलनाडु में कांग्रेस का वह कदम बताया गया जिसे DMK 'विश्वासघात' मान रही है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने सरकार गठन के लिए अभिनेता-नेता विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) का समर्थन किया था। DMK इसी निर्णय से नाराज़ है और उसने इसे गठबंधन-धर्म के विरुद्ध बताया है। यह ऐसे समय में आया है जब 'इंडिया' ब्लॉक पहले से ही आंतरिक समन्वय की चुनौतियों से जूझ रहा है।
कांग्रेस का पक्ष और गठबंधन की स्थिति
कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि जो दल बैठक में शामिल नहीं हो सके, उन्होंने भी मोदी सरकार की नीतियों का विरोध दर्ज कराया है। उनके अनुसार, अनुपस्थित दलों ने मतदान अधिकारों पर कथित अंकुश, संविधान पर दबाव, जाँच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग, बढ़ती महँगाई, युवाओं में बेरोज़गारी और विदेश नीति से जुड़ी चिंताओं पर अपनी असहमति जताई है।
आगे की राह
गौरतलब है कि 'इंडिया' गठबंधन के भीतर DMK जैसे प्रमुख क्षेत्रीय दल की अनुपस्थिति विपक्षी एकता की सीमाओं को उजागर करती है। बैठक के समापन पर विपक्षी एकजुटता का संदेश देने की कोशिश अपेक्षित थी, लेकिन आंतरिक मतभेद गठबंधन के लिए दीर्घकालिक चुनौती बने हुए हैं। अब सभी की नज़रें इस बात पर हैं कि 2029 के चुनावी मुकाबले से पहले 'इंडिया' ब्लॉक अपनी दरारों को कितनी जल्दी पाट पाता है।