'इंडिया' ब्लॉक की बैठक आज नई दिल्ली में, 23 दलों ने पुष्टि की; केंद्र की नीतियों पर विपक्ष एकजुट
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में 8 जून 2026 को 'इंडिया जनबंधन' गठबंधन की अहम बैठक आयोजित हो रही है, जिसमें 23 राजनीतिक दलों ने अपनी भागीदारी की पुष्टि की है। केंद्र सरकार की नीतियों के विरुद्ध साझा मोर्चा मज़बूत करने के उद्देश्य से बुलाई गई यह बैठक विपक्षी एकजुटता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
बैठक का उद्देश्य और एजेंडा
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि गठबंधन के सहयोगी दल कई प्रमुख मुद्दों पर एकमत हैं। इनमें मतदान अधिकारों पर कथित प्रतिबंध, संविधान पर हमले, जाँच एजेंसियों के ज़रिए विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के आरोप, बढ़ती महंगाई से घरेलू बजट पर असर, युवाओं की आकांक्षाओं को ठेस, निवेश माहौल को नुकसान और विदेश नीति में राष्ट्रीय हितों से कथित समझौते जैसे विषय शामिल हैं।
बैठक में गठबंधन की आगामी राजनीतिक रणनीति और सहयोगी दलों के बीच समन्वय को और पुख्ता करने पर व्यापक विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।
तृणमूल कांग्रेस की भूमिका
सूत्रों के अनुसार, यह बैठक गठबंधन सहयोगियों के बीच चर्चा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आग्रह पर बुलाई गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के इस बैठक में शामिल होने की उम्मीद है।
TMC के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ'ब्रायन ने गठबंधन की सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा, 'एक साझा मकसद और स्पष्ट इरादे के साथ बैठक। 'इंडिया' एकजुट है। कई पार्टियाँ आपसी भाईचारे की भावना के साथ मिलने को लेकर उत्साहित हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'खुद भारत की तरह ही, 'इंडिया जनबंधन' भी अपनी विविधता के बावजूद एकजुट है।'
अनुपस्थित दलों का रुख
रमेश ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए स्पष्ट किया कि कुछ दलों ने अपने कारणों से इस विशेष बैठक में शामिल न हो पाने की बात कही है। उन्होंने कहा, 'हालांकि, उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों के प्रति अपना कड़ा विरोध जताया है।' यह बयान यह संकेत देता है कि गठबंधन में मतभेद के बावजूद वैचारिक सहमति बनी हुई है।
गठबंधन की पृष्ठभूमि और महत्व
गौरतलब है कि 'इंडिया' (Indian National Developmental Inclusive Alliance) गठबंधन का गठन 2023 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत केंद्र सरकार के विरुद्ध एक व्यापक विपक्षी मोर्चे के रूप में हुआ था। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब गठबंधन के भीतर समन्वय और रणनीतिक दिशा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि विभिन्न विचारधाराओं वाले दलों को एकजुट रखना गठबंधन की सबसे बड़ी चुनौती है।
आगे क्या
बैठक के बाद गठबंधन की ओर से साझा प्रेस वार्ता और संयुक्त बयान जारी होने की संभावना है। आने वाले हफ्तों में सहयोगी दलों के बीच संसदीय रणनीति और ज़मीनी स्तर पर समन्वय को लेकर और बैठकें हो सकती हैं।