23 जुलाई 2026
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टीएमसी संकट के बीच ममता और अभिषेक बनर्जी 'इंडिया' ब्लॉक बैठक में शामिल, सीआईडी पेशी टली

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टीएमसी संकट के बीच ममता और अभिषेक बनर्जी 'इंडिया' ब्लॉक बैठक में शामिल, सीआईडी पेशी टली

सारांश

पश्चिम बंगाल चुनाव में हार और पार्टी में बगावत के बीच ममता और अभिषेक बनर्जी 'इंडिया' ब्लॉक बैठक में समर्थन जुटाने पहुँचे हैं — जबकि अभिषेक पर सीआईडी का समन लटका है और 10 जून को कोलकाता हाई कोर्ट में उनकी याचिका पर सुनवाई होनी है।

मुख्य बातें

ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी 8 जून 2026 को नई दिल्ली में 'इंडिया' ब्लॉक की बैठक में शामिल हो रहे हैं।
विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के एक बड़े गुट ने पार्टी से अलग होकर विधानसभा में स्वतंत्र पहचान बना ली है।
काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में संसदीय इकाई में भी बहुमत वाला बागी गुट बनने की आशंका जताई जा रही है।
अभिषेक बनर्जी की सीआईडी के समक्ष पेशी दूसरी बार टली — पहले 1 जून , अब सोमवार को भी अनुपस्थित।
सीआईडी नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर 10 जून को कोलकाता की एकल-न्यायाधीश अवकाश पीठ में सुनवाई होनी है।

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी 8 जून 2026 को नई दिल्ली में विपक्षी 'इंडिया' ब्लॉक की अहम बैठक में शामिल हो रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस अस्तित्व के गहरे संकट से जूझ रही है और पार्टी के भीतर विद्रोही गुट सक्रिय हो चुके हैं।

मुख्य घटनाक्रम

अभिषेक बनर्जी शनिवार दोपहर को ही नई दिल्ली पहुँच गए थे, जबकि ममता बनर्जी रविवार शाम को राजधानी पहुँचीं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 'इंडिया' ब्लॉक के अन्य सहयोगियों की तुलना में यह बैठक दोनों बनर्जी के लिए कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र के अनुसार, लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के लगभग सभी तृणमूल सांसद इस समय नई दिल्ली में मौजूद हैं।

टीएमसी का आंतरिक संकट

विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के एक बड़े गुट ने पार्टी से अलग होकर विधानसभा में अपनी स्वतंत्र पहचान बना ली है। अब बागी तृणमूल कांग्रेस लोकसभा सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में संसदीय इकाई में भी इसी प्रकार का बहुमत वाला गुट बनने की आशंका व्यक्त की जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी पहले से ही नेतृत्व और संगठन दोनों स्तरों पर दबाव में है।

सीआईडी पेशी और कानूनी पेचीदगियाँ

गौरतलब है कि अभिषेक बनर्जी को सोमवार दोपहर तक दक्षिण कोलकाता में पश्चिम बंगाल पुलिस के क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) के मुख्यालय में पेश होना था। यह पेशी पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के चार अहम पदों पर नियुक्ति से जुड़े एक प्रस्ताव पर कई तृणमूल विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित अंतर को लेकर चल रही सीआईडी जाँच के सिलसिले में होनी थी। हालाँकि, दिल्ली में 'इंडिया' ब्लॉक की बैठक में उपस्थिति के कारण उनके पेश होने की संभावना अब समाप्त हो गई है।

यह दूसरी बार है जब अभिषेक बनर्जी सीआईडी के समन पर उपस्थित नहीं होंगे — इससे पहले 1 जून को भी वे पेश नहीं हुए थे। उन्होंने कोलकाता की एकल-न्यायाधीश अवकाश पीठ में सीआईडी के नोटिस को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की है, जिसमें गिरफ्तारी सहित पुलिस की सख्त कार्रवाई से सुरक्षा की भी माँग की गई है। इस याचिका पर 10 जून को अहम सुनवाई निर्धारित है।

आगे की राह

सबकी निगाहें अब 'इंडिया' ब्लॉक की बैठक के नतीजों और तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी उठापटक पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि चौतरफा दबाव में घिरी ममता बनर्जी विपक्षी गठबंधन में अपनी स्थिति कितनी मजबूत कर पाती हैं और पार्टी के विद्रोही धड़े को संसद में किस दिशा में आगे बढ़ते देखा जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

संसद में संभावित विद्रोही गुट, और अभिषेक बनर्जी पर सीआईडी का कानूनी शिकंजा। विपक्षी एकता का मंच इस समय उनके लिए राजनीतिक वैधता का सबसे सुलभ स्रोत है। लेकिन सवाल यह है कि जो पार्टी अपने घर में ही बिखर रही है, वह गठबंधन में कितना भरोसा जगा सकती है। अभिषेक का बार-बार सीआईडी समन से बचना कानूनी रूप से जोखिम भरा है — 10 जून की सुनवाई तय करेगी कि अदालत इसे किस नज़रिए से देखती है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'इंडिया' ब्लॉक की बैठक में ममता बनर्जी की भागीदारी क्यों अहम है?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार और पार्टी में बगावत के बाद ममता बनर्जी के लिए यह बैठक विपक्षी गठबंधन में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने का अवसर है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, 'इंडिया' ब्लॉक के सहयोगियों का समर्थन उन्हें आंतरिक संकट के बीच राष्ट्रीय मंच पर मजबूती देगा।
तृणमूल कांग्रेस में मौजूदा संकट क्या है?
विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी का एक बड़ा गुट पार्टी से अलग होकर विधानसभा में स्वतंत्र पहचान बना चुका है। अब डॉ. काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में संसदीय इकाई में भी इसी तरह का बहुमत वाला विद्रोही गुट बनने की आशंका है, जो पार्टी के अस्तित्व के लिए गंभीर चुनौती है।
अभिषेक बनर्जी को सीआईडी ने किस मामले में समन भेजा है?
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के चार अहम पदों पर नियुक्ति से जुड़े एक प्रस्ताव पर कई तृणमूल विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित अंतर को लेकर सीआईडी जाँच चल रही है। अभिषेक बनर्जी इस मामले में 1 जून के बाद दूसरी बार समन पर पेश नहीं हुए हैं।
अभिषेक बनर्जी की कोलकाता हाई कोर्ट में याचिका क्या है?
अभिषेक बनर्जी ने कोलकाता की एकल-न्यायाधीश अवकाश पीठ में सीआईडी के नोटिस को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है, जिसमें गिरफ्तारी सहित पुलिस की कठोर कार्रवाई से सुरक्षा की माँग भी शामिल है। इस याचिका पर 10 जून को अहम सुनवाई होनी है।
क्या अभिषेक बनर्जी का सीआईडी के सामने न पेश होना कानूनी रूप से जोखिम भरा है?
यह दूसरी बार है जब अभिषेक बनर्जी सीआईडी समन पर पेश नहीं हुए हैं, जो कानूनी दृष्टि से उनकी स्थिति को जटिल बना सकता है। 10 जून को कोलकाता हाई कोर्ट की सुनवाई में अदालत का रुख यह तय करेगा कि उन्हें अंतरिम सुरक्षा मिलती है या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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