भारत की नई ऊर्जा योजना: 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य
सारांश
Key Takeaways
- भारत 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखता है।
- वर्तमान में 24 परमाणु रिएक्टर चल रहे हैं।
- 2030 तक क्षमता 22 गीगावाट तक पहुँचने की उम्मीद है।
- तीन-चरणीय रणनीति पर आधारित है।
- परमाणु ऊर्जा भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण होगी।
नई दिल्ली, ११ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश २०४७ तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को बढ़ाकर कम से कम १०० गीगावाट (जीडब्ल्यू) करने की योजना बना रहा है। यह लक्ष्य भारत की स्वतंत्रता के १०० साल पूरे होने के अवसर से भी संबंधित है।
खलीज टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारत में २४ परमाणु रिएक्टर सक्रिय हैं, जिनकी कुल क्षमता ८,७८० मेगावाट इलेक्ट्रिक (एमडब्ल्यूई) है। इसके अतिरिक्त, ६,०२८ एमडब्ल्यूई क्षमता वाले ८ और रिएक्टर निर्माणाधीन हैं।
सरकारी अनुमानों के अनुसार, २०३० के प्रारंभिक वर्षों तक यह क्षमता लगभग २२ गीगावाट तक पहुँच सकती है, जिसके बाद इसे तेजी से बढ़ाकर १०० गीगावाट के लक्ष्य तक पहुँचाया जाएगा।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत दोहरी रणनीति पर कार्य कर रहा है, जिसमें बड़े परमाणु रिएक्टर जैसे स्वदेशी ७०० एमडब्ल्यूई प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) और ग्रीनफील्ड साइट्स पर आयातित बड़े प्लांट शामिल हैं। साथ ही, स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर जैसे २०० एमडब्ल्यूई भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (बीएसएमआर) और ५५ मेगावाट इलेक्ट्रिक एसएमआर-५५ यूनिट्स पर भी कार्य किया जा रहा है।
इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि ६ अप्रैल २०२६ को हासिल हुई, जब तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित ५०० मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने 'फर्स्ट क्रिटिकलिटी' प्राप्त की। इसका अर्थ है कि इसमें नियंत्रित परमाणु विखंडन की प्रक्रिया सफलतापूर्वक प्रारंभ हो गई है। यह भारत की स्वदेशी परमाणु तकनीक के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत का परमाणु कार्यक्रम एक विशेष तीन-चरणीय रणनीति पर आधारित है, जिसका उद्देश्य सीमित यूरेनियम संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना और देश के विशाल थोरियम भंडार का लाभ उठाना है।
प्रथम चरण में प्राकृतिक यूरेनियम से प्लूटोनियम तैयार किया जाता है। दूसरे चरण में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर इस प्लूटोनियम का उपयोग करके अधिक ईंधन का उत्पादन करते हैं। तीसरे चरण में थोरियम आधारित रिएक्टरों के माध्यम से यूरेनियम-२३३ का उत्पादन करके दीर्घकालिक ऊर्जा उत्पादन सुनिश्चित किया जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, पीएफबीआर में यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (एमओएक्स) ईंधन और तरल सोडियम कूलेंट का उपयोग किया जाता है, जिससे यह जितना ईंधन खपत करता है उससे अधिक उत्पन्न कर सकता है। यह तकनीक भविष्य में थोरियम-आधारित ऊर्जा उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करती है।
५०० मेगावाट इलेक्ट्रिक क्षमता वाला यह रिएक्टर लगभग ५ लाख घरों को बिजली प्रदान करने में सक्षम है। इससे यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में परमाणु ऊर्जा भारत की बिजली जरूरतों को पूरा करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।