भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में: मार्को रुबियो बोले — 'बेहद करीब हैं'
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 19 अक्टूबर 2026 को — भारत यात्रा से ठीक एक दिन पहले — घोषणा की कि अमेरिका और भारत के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर अधिकांश काम पूरा हो चुका है और दोनों देश इसे अंतिम रूप देने के 'बेहद करीब' हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब महीनों की कठिन बातचीत के बाद भी डेयरी क्षेत्र जैसे संवेदनशील मुद्दे अनसुलझे बने हैं।
रुबियो का बयान और संदर्भ
रुबियो ने कहा, 'हम इस समय भारत के साथ एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। हम ऐसा करने के बहुत करीब हैं।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विदेश नीति में प्रत्येक देश की भौगोलिक वास्तविकताओं और ऊर्जा स्रोतों तक पहुँच जैसे कारकों का संतुलन बनाना जरूरी होता है।
गौरतलब है कि रुबियो के इस बयान से पहले, 2 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर ने कहा था कि समझौता 'तत्काल' नहीं होने वाला — जो संकेत देता है कि बीते कुछ हफ्तों में बातचीत में तेज़ी आई है।
समझौते की रूपरेखा और शुल्क ढाँचा
फरवरी 2026 में घोषित प्रारंभिक रूपरेखा के तहत अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर पारस्परिक शुल्क 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया था। साथ ही भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने पर लगाया जाने वाला अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क भी हटा लिया गया था।
इसके बदले भारत ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कई कृषि वस्तुओं — जिनमें ट्री नट्स, फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स शामिल हैं — पर शुल्क कम करने या पूरी तरह समाप्त करने की प्रतिबद्धता जताई थी। समझौते का मूल उद्देश्य भारतीय निर्यात के लिए अमेरिकी बाज़ार में कम और स्थिर शुल्क सुनिश्चित करना है।
रूसी तेल और प्रतिबंधों का समीकरण
रुबियो ने रूसी ऊर्जा के मुद्दे पर भी स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर पड़ने वाले असर के मद्देनज़र अमेरिका को पिछले कुछ महीनों में कई प्रतिबंधों में छूट देनी पड़ी है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' को लागू करने संबंधी आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर लगाए जाने वाले शुल्कों में छूट दी है।
यह भारत के लिए अहम है, क्योंकि भारत रूसी कच्चे तेल का एक प्रमुख खरीदार रहा है और यह मुद्दा द्विपक्षीय व्यापार वार्ता में लगातार जुड़ा रहा है।
भारत की स्थिति और प्रमुख बाधाएँ
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल पहले ही बता चुके हैं कि पहले चरण के समझौते को अंतिम रूप दिया जा चुका है और उसका कानूनी मसौदा तैयार किया जा रहा है। हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कार्यान्वयन भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को लेकर स्पष्टता मिलने पर निर्भर करेगा।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी हाल ही में कहा था कि बातचीत अब 'लैंडिंग प्वाइंट' यानी अंतिम चरण के करीब पहुँच चुकी है। बावजूद इसके, डेयरी क्षेत्र तक पहुँच का मुद्दा अब भी सबसे बड़ी बाधा बताया जा रहा है, क्योंकि भारत इस संवेदनशील क्षेत्र में व्यापक रियायत देने से परहेज करता रहा है।
भारत का व्यापार प्रदर्शन और आगे की राह
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में भारत का निर्यात प्रदर्शन उत्साहजनक रहा है। सितंबर 2026 में देश का माल निर्यात 23 प्रतिशत बढ़कर 44.4 अरब डॉलर पहुँच गया, जबकि व्यापार घाटे में भी कमी दर्ज की गई — जो वार्ताकारों को मेज़ पर बेहतर स्थिति में रखता है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका दोनों के लिए द्विपक्षीय व्यापार को नई संरचना देना रणनीतिक प्राथमिकता बन चुकी है। रुबियो की भारत यात्रा के दौरान अंतिम समझौते की दिशा में कोई ठोस कदम उठाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।