भारत-अमेरिका व्यापार समझौता बहुत करीब: मोंटाना गवर्नर ग्रेग जियानफोर्टे का एक्सक्लूसिव बयान
सारांश
मुख्य बातें
मोंटाना के गवर्नर ग्रेग जियानफोर्टे ने 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में दिए एक एक्सक्लूसिव साक्षात्कार में कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में है और जल्द ही इसके संपन्न होने की उम्मीद है। भारत दौरे पर पहुँचे जियानफोर्टे के साथ 30 से अधिक पेशेवरों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है, जिसमें उच्च शिक्षा, उन्नत प्रौद्योगिकी और कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हैं।
राजदूत ने दिलाया भरोसा
जियानफोर्टे ने बताया कि दिल्ली पहुँचने के तुरंत बाद उनकी मुलाकात भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से हुई। उनके अनुसार, राजदूत ने स्पष्ट किया कि दोनों देश व्यापार समझौते के बेहद करीब पहुँच चुके हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता महीनों से जारी है और दोनों पक्षों पर समझौते को जल्द अंतिम रूप देने का कूटनीतिक दबाव है।
कारोबारी निश्चितता पर जोर
गवर्नर ने कहा कि किसी भी सफल व्यापार संबंध की नींव स्पष्टता और भरोसे पर टिकी होती है। उन्होंने कहा, 'भारतीय और अमेरिकी कारोबारों को निश्चितता की जरूरत है। हमें एक पारस्परिक संबंध चाहिए, जो कारोबारों को यह भरोसा दे कि वे एक-दूसरे के साथ व्यापार कर सकते हैं और दोनों पक्षों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि पूंजी जोखिम से बचती है और स्पष्टता के अभाव में गहरे आर्थिक संबंध बनाना कठिन हो जाता है।
कृषि और तकनीक में सहयोग की संभावनाएँ
जियानफोर्टे ने भारत और मोंटाना के बीच कृषि क्षेत्र की समानताओं को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि मोंटाना अमेरिका का सबसे बड़ा दलहन उत्पादक राज्य है, जहाँ मटर, चना और मसूर जैसी फसलें बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं — वही फसलें जो भारतीय रसोई का आधार हैं। उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल में मोंटाना स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर के डीन भी शामिल हैं, और दोनों पक्षों के बीच कृषि अनुसंधान तथा प्रिसिजन एग्रीकल्चर (सटीक कृषि) में सहयोग की संभावनाएँ तलाशी जा रही हैं।
क्वांटम तकनीक और एयरोस्पेस पर नज़र
इस दौरे का दायरा केवल व्यापार समझौते तक सीमित नहीं है। जियानफोर्टे ने बताया कि क्वांटम टेक्नोलॉजी और फोटोनिक्स जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में भी दोनों देशों के विश्वविद्यालयों और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग पर चर्चा हो रही है। उन्होंने एयरोस्पेस और रक्षा तकनीक को भी साझेदारी का अहम क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा, 'मोंटाना में विमान के कलपुर्जे बनाए जाते हैं और भारत में एयरोस्पेस क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है, ऐसे में दोनों पक्षों के बीच सहयोग की बड़ी संभावनाएँ हैं।' गौरतलब है कि यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों में राज्य-स्तरीय कूटनीति के बढ़ते महत्व को भी दर्शाता है।
आगे क्या
प्रतिनिधिमंडल की भारतीय संस्थानों के साथ बैठकें जारी हैं। जियानफोर्टे के अनुसार, यह दौरा केवल व्यापार समझौते पर केंद्रित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक और तकनीकी सहयोग का एक दीर्घकालिक ढाँचा तैयार करने की कोशिश है। व्यापार समझौते की औपचारिक घोषणा कब होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन दोनों सरकारों के संकेत सकारात्मक दिशा में हैं।