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क्या बीते एक दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार तीन गुना बढ़ा?

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क्या बीते एक दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार तीन गुना बढ़ा?

सारांश

भारतीय अर्थव्यवस्था ने पिछले एक दशक में अद्वितीय वृद्धि को दर्शाया है, जो न केवल घरेलू मांग का परिणाम है, बल्कि वैश्विक बाजार में भी एक सकारात्मक संकेत है। जानें कैसे भारत ने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया।

मुख्य बातें

भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार पिछले एक दशक में तीन गुना बढ़ा।
वित्त वर्ष 2024-25 में अर्थव्यवस्था का आकार 331.03 लाख करोड़ रुपए है।
आर्थिक वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत है, जो वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक है।
मजबूत घरेलू मांग और सार्वजनिक निवेश ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वैश्विक आर्थिक स्थिति चुनौतियों का सामना कर रही है, लेकिन भारत एक उज्ज्वल स्थान के रूप में उभर रहा है।

नई दिल्ली, 6 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। मजबूत आधार और निरंतर अच्छे प्रदर्शन के कारण, भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार पिछले एक दशक में तीन गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 331.03 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो कि वित्त वर्ष 2014-15 में 106.57 लाख करोड़ रुपए था। यह जानकारी रविवार को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों में दी गई।

आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2024-25 में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर से बढ़ी है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक है।

इस समय देश की अर्थव्यवस्था उस समय बढ़ रही है, जब विश्व की अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाएं विकास के लिए संघर्ष कर रही हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक को उम्मीद है कि यह गति 2025-26 में भी जारी रहेगी। अन्य अनुमानों में भी इसी आशावाद को दोहराया गया है। संयुक्त राष्ट्र ने इस वर्ष 6.3 प्रतिशत और अगले वर्ष 6.4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया है, जबकि भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने अपने अनुमान को थोड़ा अधिक 6.4 से 6.7 प्रतिशत पर रखा है।

सरकार के द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि यह निरंतर प्रदर्शन मजबूत घरेलू मांग से प्रेरित है। ग्रामीण खपत में तेजी आई है, शहरी खर्च बढ़ रहा है, और निजी निवेश में तेजी आ रही है। व्यवसाय क्षमता का विस्तार कर रहे हैं, जिनमें से कई अपने अधिकतम उत्पादन स्तर के करीब परिचालन कर रहे हैं।

साथ ही, सार्वजनिक निवेश खासकर बुनियादी ढांचे में उच्च स्तर पर बना हुआ है, जबकि स्थिर उधारी स्थितियां फर्मों और उपभोक्ताओं को दूरदर्शी निर्णय लेने में मदद कर रही हैं।

बयान में आगे कहा गया कि इसके विपरीत वैश्विक परिस्थितियां नाजुक बनी हुई हैं। संयुक्त राष्ट्र ने व्यापार तनाव, नीतिगत अनिश्चितताओं और सीमा पार निवेश में गिरावट का हवाला देते हुए विश्व अर्थव्यवस्था को "अनिश्चितता के दौर" में बताया है। इसके बावजूद, भारत एक उज्ज्वल स्थान के रूप में उभरकर सामने आ रहा है, वैश्विक संस्थाओं और उद्योग निकायों ने इसके विकास की संभावनाओं पर भरोसा जताया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि भारत की अर्थव्यवस्था ने पिछले एक दशक में अभूतपूर्व वृद्धि हासिल की है। यह न केवल घरेलू मांग के कारण है, बल्कि वैश्विक संकटों के बीच भारत की स्थिरता भी दर्शाता है। यह समय है जब हम भारत के विकास की संभावनाओं को समझें और उसे समर्थन दें।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार में वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?
भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि का मुख्य कारण मजबूत घरेलू मांग, शहरी खर्च और निजी निवेश में तेजी है।
भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर कितनी है?
भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2024-25 में 6.5 प्रतिशत है।
क्या भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है?
हां, जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं संघर्ष कर रही हैं, भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखा है।
क्या भारतीय रिजर्व बैंक भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर आशावादी है?
जी हां, भारतीय रिजर्व बैंक को उम्मीद है कि आर्थिक वृद्धि की यह गति 2025-26 में भी जारी रहेगी।
भारत की आर्थिक वृद्धि में सार्वजनिक निवेश की भूमिका क्या है?
पब्लिक इन्वेस्टमेंट विशेष रूप से बुनियादी ढांचे में उच्च स्तर पर बना हुआ है, जो आर्थिक वृद्धि को समर्थन दे रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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