भारतीय मंदिरों में ईरान-इजरायल युद्ध का असर: इस्कॉन की 'प्रसाद सेवा' संकट में

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भारतीय मंदिरों में ईरान-इजरायल युद्ध का असर: इस्कॉन की 'प्रसाद सेवा' संकट में

सारांश

कोलकाता में इस्कॉन मंदिर की प्रसाद सेवा को ईरान-इजरायल के युद्ध से खतरा हो सकता है। एलपीजी संकट के चलते मंदिरों में भोजन बनाने में कठिनाई उत्पन्न हो रही है। जानें इस संकट की पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • ईरान-इजरायल युद्ध का भारतीय समाज पर गहरा असर है।
  • एलपीजी संकट से इसकॉन मंदिर की प्रसाद सेवा प्रभावित हो रही है।
  • सरकार को गैस सप्लाई में संतुलन लाने की आवश्यकता है।
  • स्टीव जॉब्स ने इस्कॉन की प्रसाद सेवा की तारीफ की थी।
  • अगर हालात नहीं सुधरे, तो सेवा में बड़ा संकट आ सकता है।

कोलकाता, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का प्रभाव अब भारतीय घरों और मंदिरों तक पहुँच चुका है। मध्य पूर्व में तनाव के कारण एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति पर गंभीर असर देखने को मिल रहा है।

सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए व्यावसायिक गैस की आपूर्ति पर कड़ी निगरानी रखी है। इससे होटेल, रेस्टोरेंट, और बड़े पैमाने पर भोजन तैयार करने वाली जगहों पर संकट उत्पन्न हो गया है। इस संदर्भ में कोलकाता के इस्कॉन मंदिर के राधारामन दास ने एलपीजी संकट के बारे में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

राधारामन दास ने कहा कि उन्होंने अपनी ज़िंदगी में ऐसा संकट पहले कभी नहीं देखा। मंदिर में बड़े पैमाने पर प्रसाद बनते हैं, इसलिए वे घरेलू और व्यावसायिक दोनों कनेक्शन का उपयोग करते हैं, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर प्रसाद बनाने के लिए केवल घरेलू कनेक्शन पर्याप्त नहीं होते।

उन्होंने बताया, "जब इस्कॉन के संस्थापक आचार्य श्रील प्रभुपाद ने इस संस्था की स्थापना की थी, तो उन्होंने निर्देश दिया था कि किसी भी इस्कॉन मंदिर के 10 किलोमीटर के दायरे में कोई भी खाली पेट नहीं सोएगा। इसी कारण से दुनिया भर में 1,250 से अधिक इस्कॉन मंदिर हर शाम मुफ्त प्रसाद वितरित करते हैं।"

उन्होंने कहा कि शाम के समय मंदिर में प्रसाद के लिए लंबी कतारें लगती हैं। उन्होंने कहा, "यदि आप शाम को 7 या 7:30 बजे इस्कॉन अल्बर्ट रोड आएंगे, तो आप देखेंगे कि वहां लंबी लाइन लगी होती है, जहां लोग टिफिन में प्रसाद ले जाते हैं।"

उन्होंने बताया कि यह सेवा इतनी प्रसिद्ध हो गई थी कि एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स अपने कॉलेज के दिनों में एक समय का भोजन लेने आते थे, और उन्होंने खुद स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में इसका खुलासा किया था। उन्होंने कहा, "आपको जानकर आश्चर्य होगा कि स्टीव जॉब्स ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में बताया था कि जब वे कॉलेज में पढ़ रहे थे, तो वे आर्थिक रूप से सक्षम नहीं थे, इसलिए वे एक समय का खाना पाने के लिए 7 मील पैदल चलकर इस्कॉन मंदिर जाते थे। इस्कॉन का 'पुट फॉर लाइफ' कार्यक्रम बहुत प्रसिद्ध है। आज तक, इस्कॉन ने दुनिया में 8 बिलियन प्लेट खाना बांटा है।"

उन्होंने चिंता व्यक्त की कि गैस संकट से यह सेवा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा, "यदि गैस नहीं मिली तो लोगों की सेवा करना मुश्किल हो जाएगा। सरकार ने गाँवों तक एलपीजी पहुँचाई है, लेकिन अगर सिलेंडर नहीं मिले तो लोग खाना कैसे बनाएंगे?"

Point of View

बल्कि हमारे समाज और संस्कृति पर भी गहरा असर डालती हैं।
NationPress
16/03/2026

Frequently Asked Questions

ईरान-इजरायल युद्ध का भारतीय मंदिरों पर क्या प्रभाव है?
इस युद्ध के कारण एलपीजी गैस की सप्लाई में कमी आई है, जिससे मंदिरों में प्रसाद बनाना मुश्किल हो रहा है।
इस संकट का समाधान क्या है?
सरकार को घरेलू और कमर्शियल गैस सप्लाई को संतुलित करना होगा ताकि सेवा जारी रखी जा सके।
इस संकट का प्रभाव इस्कॉन मंदिर पर कैसे पड़ा है?
इस संकट के कारण इस्कॉन मंदिरों में प्रसाद बनाने में कठिनाई हो रही है, जिससे सेवा प्रभावित हो रही है।
क्या स्टीव जॉब्स ने इस्कॉन की सेवा के बारे में बात की थी?
हाँ, स्टीव जॉब्स ने कहा था कि वे कॉलेज के दिनों में इस्कॉन मंदिर से मुफ्त खाना लेने जाते थे।
क्या इस्कॉन मंदिरों में प्रसाद की सेवा जारी रहेगी?
यदि गैस संकट का समाधान नहीं हुआ, तो यह सेवा खतरे में पड़ सकती है।
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