क्या इसरो-जैक्सा के संयुक्त अंतरिक्ष मिशन से स्टार्टअप्स के सहयोग को बढ़ावा मिलेगा?: पीएम मोदी

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क्या इसरो-जैक्सा के संयुक्त अंतरिक्ष मिशन से स्टार्टअप्स के सहयोग को बढ़ावा मिलेगा?: पीएम मोदी

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टोक्यो में इसरो और जैक्सा के संयुक्त अंतरिक्ष मिशन के माध्यम से स्टार्टअप्स के सहयोग को बढ़ावा देने की बात कही। यह मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की गहन समझ में मदद करेगा और दोनों देशों के उद्योगों के बीच सहयोग को नया आयाम देगा।

Key Takeaways

  • इसरो और जैक्सा का संयुक्त मिशन उद्योगों और स्टार्टअप्स के लिए अवसर प्रदान करेगा।
  • अंतरिक्ष में सहयोग से नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
  • यह मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जल-बर्फ की खोज करेगा।
  • भारत और जापान के बीच संबंध मजबूत होंगे।
  • यह मिशन 2027-28 में शुरू होगा।

टोक्यो, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जैक्सा) का संयुक्त अंतरिक्ष मिशन दोनों देशों के उद्योगों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को नई दिशा प्रदान करेगा। यह जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को टोक्यो में साझा की।

जापान के समाचार पत्र द योमिउरी शिम्बुन को दिए गए एक साक्षात्कार में पीएम मोदी ने कहा कि यह संयुक्त मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के छायायुक्त क्षेत्रों की गहरी समझ विकसित करने में भी सहायक होगा।

उन्होंने कहा, “अंतरिक्ष क्षेत्र में हमारी सरकार-से-सरकार साझेदारी इसरो और जैक्सा के बीच सहयोग की एक ऐसी संस्कृति का निर्माण कर रही है, जिससे दोनों देशों के उद्योग और स्टार्टअप्स भी जुड़ रहे हैं। इससे एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार हो रहा है, जहां प्रयोगशालाओं से लॉन्चपैड तक और शोध से वास्तविक जीवन अनुप्रयोगों तक नवाचार का प्रवाह दोनों तरफ हो रहा है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “मुझे खुशी है कि भारत और जापान चंद्रयान श्रृंखला के अगले मिशन, जिसे लूपेक्स (लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन) कहा जाता है, के लिए सहयोग कर रहे हैं। यह मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थायी छाया वाले क्षेत्रों की हमारी समझ को और गहरा करेगा।”

चंद्रयान-5 चंद्रयान श्रृंखला का पांचवां मिशन है, जिसे लूपेक्स भी कहा जाता है। इसरो और जैक्सा का यह संयुक्त मिशन वर्ष 2027-28 में जापान के एच3 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन में जैक्सा का रोवर और इसरो का लैंडर शामिल होगा, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में जल-बर्फ की खोज और विश्लेषण करेगा।

पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि दोनों देशों की वैज्ञानिक टीमें मिलकर अंतरिक्ष विज्ञान की नई सीमाओं को छूने में सक्षम होंगी। उन्होंने कहा, “हमारी साझेदारी न केवल अंतरिक्ष में क्षितिज का विस्तार करेगी, बल्कि धरती पर जीवन को भी बेहतर बनाएगी।”

भारत की अंतरिक्ष यात्रा को प्रधानमंत्री ने “हमारे वैज्ञानिकों के संकल्प, मेहनत और नवाचार की कहानी” बताते हुए कहा कि अंतरिक्ष भारत के लिए अगला आयाम है।

उन्होंने कहा, “चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता से लेकर हमारी अंतरग्रहीय मिशनों में प्रगति तक, भारत ने लगातार साबित किया है कि अंतरिक्ष अंतिम सीमा नहीं, बल्कि अगली सीमा है।”

पीएम मोदी ने यह भी बताया कि कैसे अंतरिक्ष विज्ञान का प्रभाव हमारे दैनिक जीवन में कृषि से लेकर आपदा प्रबंधन, संचार और अन्य क्षेत्रों में दिखता है।

प्रधानमंत्री मोदी 29-30 अगस्त तक जापान की दो दिवसीय यात्रा पर हैं। यह यात्रा जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के आमंत्रण पर हो रही है। यह उनका जापान का आठवां दौरा है। इससे पहले वे मई 2023 में जापान आए थे।

Point of View

यह स्पष्ट है कि इस संयुक्त मिशन का महत्व केवल तकनीकी दृष्टिकोण से नहीं है, बल्कि यह भारत और जापान के बीच मजबूत संबंधों को भी दर्शाता है। यह सहयोग न केवल अंतरिक्ष में, बल्कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के विकास में भी सहायक होगा।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

इसरो और जैक्सा के संयुक्त मिशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसरो और जैक्सा का संयुक्त मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के क्षेत्रों की गहन समझ विकसित करना और दोनों देशों के उद्योगों तथा स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है।
लूपेक्स मिशन कब शुरू होगा?
लूपेक्स मिशन, जो चंद्रयान श्रृंखला का हिस्सा है, 2027-28 में जापान के एच3 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा।
इस मिशन से भारत को क्या लाभ होगा?
इस मिशन से भारत को अंतरिक्ष विज्ञान में नई उपलब्धियों के साथ-साथ जल-बर्फ की खोज में भी मदद मिलेगी, जिससे वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।