जबलपुर में मूर्ति विसर्जन जुलूस पर हाईटेंशन तार गिरा, 2 की मौत और 10 से अधिक घायल
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के मझौली थाना क्षेत्र में 22 अक्टूबर की देर रात एक मूर्ति विसर्जन जुलूस के दौरान हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आने से दो युवकों की मौत हो गई और 10 से अधिक लोग घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, यह दुर्घटना उस समय हुई जब 50 से अधिक लोगों का एक समूह सिविल लाइंस पथ से नरिली तालाब की ओर मूर्ति विसर्जन के लिए जा रहा था।
दुर्घटना कैसे हुई
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जुलूस के दौरान रास्ते में नीचे लटक रहे 440 वोल्ट के एक तार को हटाने के लिए ऊपर उठाया गया। यह तार ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आ गया, जिसके बाद वह टूटकर ट्रैक्टर-ट्रॉली पर जा गिरा। इस करंट की चपेट में ट्रैक्टर पर सवार कई लोग आ गए।
मृतकों और घायलों की पहचान
हादसे में जान गंवाने वाले दोनों युवकों की पहचान 22 वर्षीय विकास राजपूत और 23 वर्षीय प्रिंस चौहान के रूप में हुई है। दोनों ट्रैक्टर पर सवार थे और मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई। गंभीर रूप से घायलों में मयंक राजपूत, विक्की रायकवार, मनीष राजपूत और आयुष रायकवार शामिल हैं। उन्हें पहले मझौली स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, किंतु हालत गंभीर होने के चलते उन्हें जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
स्वास्थ्य सेवा में देरी के आरोप
स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि मझौली स्वास्थ्य केंद्र पहुँचने के बाद घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिली। उनके अनुसार, शुरुआत में केंद्र पर कोई मेडिकल स्टाफ उपस्थित नहीं था और डॉक्टर लगभग 30 मिनट बाद पहुँचे। 108 एंबुलेंस सेवा की मदद से घायलों को जबलपुर भेजा गया।
प्रशासनिक चूक के आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि जुलूस से पहले पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और आयोजन समिति के बीच हुई बैठक में नीचे लटकती बिजली लाइनों का मुद्दा उठाया गया था। आरोप है कि बिजली विभाग को तारों को सुरक्षित करने के लिए कहा गया था, परंतु समय रहते कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया। मझौली थाना प्रभारी पूर्वा चौरसिया अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचीं और घटना की जाँच शुरू कर दी गई है।
आगे क्या होगा
पुलिस घटना से जुड़े समस्त हालात की जाँच कर रही है। जिम्मेदार व्यक्तियों और विभागों के खिलाफ संभावित कार्रवाई का अभी इंतजार है। यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब देशभर में विसर्जन जुलूसों के दौरान सुरक्षा प्रबंधों पर सवाल उठते रहे हैं, और यह घटना प्रशासनिक सतर्कता की गंभीर कमी को उजागर करती है।