क्या जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में बांग्लादेशी राजनयिक रियाज हमीदुल्लाह ने अल्पसंख्यकों की हत्या पर चिंता जताई?
सारांश
Key Takeaways
- रियाज हमीदुल्लाह की उपस्थिति ने बांग्लादेश-भारत संबंधों को लेकर नई संभावनाएँ खोलीं।
- अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा पर भारत की गहरी चिंता।
- पोलैंड के डिप्टी पीएम ने यूरोपीय स्थिति पर विचार साझा किए।
- दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा के मुद्दों पर सहमति जताई।
- यह कार्यक्रम साहित्य और राजनीति का संगम है।
जयपुर, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह ने जयपुर में आयोजित 'जयपुर लिटरेचर फेस्ट' में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने एशियन ड्रामा पैनल में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए उन्होंने कहा कि जयपुर लिटरेचर फेस्ट में आकर और प्रोफेसर सी. राजा मोहन, सुहासिनी हैदर, नवतेज सरना और शुभजीत रॉय के साथ 'एशियन ड्रामा' पैनल में शामिल होकर उन्हें बहुत खुशी हुई और उन्होंने बांग्लादेश-भारत संबंधों पर चर्चा की।
उन्होंने आगे लिखा, "दो दशक बाद सिर्फ साहित्यकारों, कवियों और प्रकाशकों ही नहीं, बल्कि सृजनकर्ताओं और विचारकों की जोशीली सभा को विचार देने और प्रस्तुत करने के लिए संजोय के. रॉय का धन्यवाद और सभी के लिए काल्पनिक से लेकर वास्तविक मुद्दों पर बोलने या बहस करने के लिए एक आजाद जगह बनाने के लिए धन्यवाद। 'दूसरों' की बात सुनना निश्चित रूप से एक गुण होना चाहिए।"
बांग्लादेश और भारत के बीच यूनुस की अंतरिम सरकार में तनाव बढ़ता जा रहा है। विशेष रूप से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा पर भारत ने गहरी चिंता जताई है। भारत ने बांग्लादेश में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव की आवश्यकता भी जताई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार के बाद दोनों देशों के बीच हालात सुधार सकते हैं।
इस कार्यक्रम में पोलैंड के डिप्टी पीएम रादोस्लाव सिकोर्स्की अपनी पत्नी के साथ शामिल हुए। उन्होंने एक पत्रकार और यूरोपीय स्टेट्समैन के तौर पर अपने अनुभव साझा किए, जिसमें रूस और यूक्रेन में बदलते हालात, संकट से निपटने में पोलैंड की भूमिका और तेजी से बदलती दुनिया में यूरोप का तालमेल शामिल है।
बांग्लादेश और भारत के बीच पिछले महीने नई दिल्ली में विदेश कार्यालय परामर्श (एफओसी) का 11वां दौर आयोजित हुआ, जिसमें दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर सहमति जताई। इस बैठक की सह-प्रमुखता विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज और पोलैंड के विदेश मामलों के सचिव व्लादिस्लाव टी. बार्तोशेव्स्की ने की।
वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों से मिलकर लड़ने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। पोलैंड ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को शीघ्र अंतिम रूप देने का भी समर्थन किया।
विदेश मंत्रालय ने बैठक के बाद जारी बयान में कहा, "भारत-पोलैंड विदेश कार्यालय परामर्श के 11वें दौर में दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की, विशेष रूप से उस पांचवर्षीय कार्ययोजना (2024-2028) के संदर्भ में, जिस पर अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोलैंड यात्रा के दौरान सहमति बनी थी।"
बयान में आगे कहा गया कि दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और एआई जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और तेज करने पर सहमति जताई। पोलैंड मध्य और पूर्वी यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।