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जम्मू-कश्मीर होमस्टे नीति 2026 अधिसूचित: ग्रामीण व सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन और आजीविका को मिलेगी नई उड़ान

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जम्मू-कश्मीर होमस्टे नीति 2026 अधिसूचित: ग्रामीण व सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन और आजीविका को मिलेगी नई उड़ान

सारांश

जम्मू-कश्मीर सरकार ने होमस्टे नीति 2026 अधिसूचित कर दी है — सिल्वर और गोल्ड श्रेणी के साथ सरल पंजीकरण, बेड एंड ब्रेकफास्ट का विकल्प, और ग्रामीण व सीमावर्ती इलाकों तक पर्यटन का विस्तार। यह नीति स्थानीय परिवारों के लिए आजीविका का नया रास्ता खोल सकती है।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर होमस्टे नीति, 2026 को मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के बाद 14 अक्टूबर 2026 को औपचारिक रूप से अधिसूचित किया गया।
होमस्टे को सिल्वर और गोल्ड दो श्रेणियों में पंजीकृत किया जाएगा, प्रक्रिया सरल और परेशानी-मुक्त होगी।
वे संपत्तियाँ जो परिवार स्वयं नहीं रहते, उन्हें बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) के रूप में पंजीकृत कराने की सुविधा दी गई है।
नीति का विशेष ध्यान ग्रामीण, सीमावर्ती, विरासत और उभरते पर्यटन स्थलों पर है।
सरकार का लक्ष्य पर्यटन के लाभ को दूर-दराज के समुदायों तक पहुँचाना और स्थानीय सतत आजीविका के अवसर बनाना है।

जम्मू-कश्मीर सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को जम्मू-कश्मीर होमस्टे नीति, 2026 को औपचारिक रूप से अधिसूचित कर दिया, जिसका उद्देश्य सतत पर्यटन को बढ़ावा देना और ग्रामीण, सीमावर्ती, विरासत तथा उभरते पर्यटन क्षेत्रों में स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहित करना है। मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के बाद लागू की गई यह नीति पर्यटन का लाभ केवल स्थापित गंतव्यों तक सीमित न रखकर दूर-दराज के गाँवों और बॉर्डर इलाकों तक पहुँचाने की कोशिश है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस निर्णय की जानकारी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर साझा की।

नीति की प्रमुख विशेषताएँ

नई नीति का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू इसकी सरल और परेशानी-मुक्त पंजीकरण प्रक्रिया है। होमस्टे को सिल्वर और गोल्ड दो श्रेणियों में पंजीकृत किया जाएगा, जिससे स्थानीय मकान मालिक बिना जटिल नौकरशाही के पर्यटकों की मेज़बानी कर सकेंगे। इस ढाँचे का लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण पर्यटक आवास का विस्तार करना है, विशेष रूप से उन इलाकों में जहाँ होटल और गेस्ट हाउस की भारी कमी है।

एक और उल्लेखनीय प्रावधान के तहत वे पात्र आवासीय संपत्तियाँ भी पंजीकृत हो सकेंगी, जिनका उपयोग परिवार स्वयं के निवास के लिए नहीं कर रहे। ऐसी संपत्तियों को बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) प्रतिष्ठान के रूप में दर्ज कराने की सुविधा मिलेगी, जो आतिथ्य अवसंरचना को मजबूत करेगी और परिवारों के लिए अतिरिक्त आमदनी का रास्ता खोलेगी।

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

सरकार के अनुसार, यह नीति स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को मज़बूत करने, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को प्रोत्साहित करने और पर्यटन के लाभों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस कदम है। होमस्टे संचालक न केवल जम्मू-कश्मीर की समृद्ध संस्कृति और आतिथ्य परंपरा का प्रदर्शन कर सकेंगे, बल्कि सतत आजीविका के अवसर भी पैदा कर सकेंगे।

गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। होटल और पारंपरिक गेस्ट हाउसों में क्षमता की कमी के कारण अनेक पर्यटकों को असुविधा का सामना करना पड़ता था। होमस्टे नीति से इस अंतर को भरने की उम्मीद है।

सीमावर्ती क्षेत्रों पर विशेष ध्यान

यह नीति ऐसे समय में आई है जब केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर सीमावर्ती पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दे रही हैं। सीमावर्ती गाँवों और दुर्गम क्षेत्रों में होमस्टे खुलने से स्थानीय निवासियों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा और क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा। आलोचकों का कहना है कि नीति की सफलता काफी हद तक इसके क्रियान्वयन और ज़मीनी स्तर पर जागरूकता अभियानों पर निर्भर करेगी।

आगे की राह

नीति के अधिसूचित होने के बाद अब संबंधित विभागों द्वारा पंजीकरण प्रक्रिया की विस्तृत गाइडलाइन जारी किए जाने की उम्मीद है। पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कार्यान्वयन सुचारू रहा तो यह नीति जम्मू-कश्मीर को भारत के प्रमुख होमस्टे गंतव्यों की सूची में स्थापित करने में सहायक होगी और स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए द्वार खोलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा ज़मीनी क्रियान्वयन में होगी — विशेष रूप से उन सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में जहाँ डिजिटल साक्षरता और कनेक्टिविटी की कमी अब भी बड़ी चुनौती है। सिल्वर-गोल्ड श्रेणी का ढाँचा गुणवत्ता मानक तय करने की कोशिश है, लेकिन बिना स्वतंत्र निगरानी तंत्र के यह महज कागज़ी वर्गीकरण बनकर रह सकता है। पर्यटन के व्यापक वितरण का इरादा सराहनीय है, पर नीति की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या पंजीकरण प्रक्रिया वास्तव में उतनी सरल है जितनी बताई जा रही है — और क्या सरकार स्थानीय परिवारों को पर्यटन अर्थव्यवस्था में सक्रिय भागीदार बनाने के लिए प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराएगी।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर होमस्टे नीति 2026 क्या है?
यह जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा 14 अक्टूबर 2026 को अधिसूचित एक नई पर्यटन नीति है, जो ग्रामीण, सीमावर्ती, विरासत और उभरते पर्यटन क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण आवास के विस्तार के लिए सरल पंजीकरण ढाँचा प्रदान करती है। इसका उद्देश्य सतत पर्यटन और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देना है।
होमस्टे नीति के तहत पंजीकरण कैसे होगा?
नीति के तहत होमस्टे को सिल्वर और गोल्ड दो श्रेणियों में पंजीकृत किया जाएगा। प्रक्रिया सरल और परेशानी-मुक्त रखी गई है ताकि स्थानीय मकान मालिक आसानी से पर्यटकों की मेज़बानी शुरू कर सकें।
क्या खाली पड़ी संपत्तियाँ भी इस नीति का लाभ उठा सकती हैं?
हाँ, वे पात्र आवासीय संपत्तियाँ जिनमें परिवार स्वयं नहीं रहते, उन्हें बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) प्रतिष्ठान के रूप में पंजीकृत कराया जा सकता है। इससे परिवारों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा और आतिथ्य अवसंरचना को भी बल मिलेगा।
यह नीति सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?
सीमावर्ती गाँवों में होटल और गेस्ट हाउस की भारी कमी है, जिससे पर्यटकों को असुविधा होती है और स्थानीय निवासी पर्यटन अर्थव्यवस्था से वंचित रहते हैं। होमस्टे नीति इन क्षेत्रों में आवास की कमी दूर करने के साथ-साथ सीधे स्थानीय परिवारों की आजीविका को भी मजबूत करेगी।
नीति लागू होने के बाद अगला कदम क्या होगा?
नीति के अधिसूचित होने के बाद संबंधित विभागों द्वारा पंजीकरण की विस्तृत गाइडलाइन जारी किए जाने की उम्मीद है। पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार, क्रियान्वयन और ज़मीनी जागरूकता अभियान इस नीति की सफलता के लिए निर्णायक साबित होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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