असम कैबिनेट का बड़ा फैसला: होमस्टे रजिस्ट्रेशन आसान, प्राइवेट यूनिवर्सिटी के लिए जमीन की शर्त घटाई
सारांश
मुख्य बातें
असम कैबिनेट ने मंगलवार, 23 जून 2026 को गुवाहाटी के लोक सेवा भवन, दिसपुर में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में हुई बैठक में दो अहम नीतिगत सुधारों को हरी झंडी दी — होमस्टे पंजीकरण को सरल बनाने वाले नए पर्यटन नियम और निजी विश्वविद्यालयों के लिए भूमि आवश्यकता में बड़ी कटौती। इन फैसलों का मकसद असम में टिकाऊ पर्यटन और उच्च शिक्षा में निजी निवेश को बढ़ावा देना है।
होमस्टे के लिए नए पर्यटन नियम
कैबिनेट ने 'असम टूरिज्म एकोमोडेशन (डेवलपमेंट एंड रजिस्ट्रेशन) रूल्स, 2026' को मंजूरी दी। इसके तहत होमस्टे और अन्य पर्यटन आवास सुविधाओं के लिए सिंगल-विंडो रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे पंजीकरण की प्रक्रिया काफी सरल हो जाएगी।
नए नियमों में हर तीन साल में स्वतः नवीनीकरण (ऑटोमैटिक रिन्यूअल) की व्यवस्था भी की गई है, जिससे संचालकों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। मुख्यमंत्री सरमा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इस कदम से अधिक स्थानीय लोग — विशेषकर ग्रामीण और इको-टूरिज्म क्षेत्रों में — पर्यटन अर्थव्यवस्था से जुड़ सकेंगे और पर्यटकों के लिए आवास की गुणवत्ता व उपलब्धता दोनों बेहतर होंगी।
प्राइवेट यूनिवर्सिटी के लिए भूमि शर्त में कटौती
कैबिनेट ने 'असम प्राइवेट यूनिवर्सिटीज एक्ट, 2007' में संशोधन को भी स्वीकृति दी। संशोधित प्रावधानों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए न्यूनतम भूमि की आवश्यकता 60 बीघा से घटाकर 35 बीघा कर दी गई है। शहरी क्षेत्रों में यह सीमा 30 बीघा से घटाकर 21 बीघा की गई है।
मुख्यमंत्री सरमा के अनुसार, यह बदलाव उच्च शिक्षा क्षेत्र में अधिक निजी निवेश आकर्षित करने और असम में गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने की राह आसान करने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि नियमों में ढील के बावजूद नियामक निगरानी (रेगुलेटरी ओवरसाइट) बनी रहेगी।
पूर्वोत्तर में शिक्षा केंद्र के रूप में असम की स्थिति
यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत में उच्च शिक्षा के बुनियादी ढाँचे का विस्तार नीति-निर्माताओं की प्राथमिकता बनी हुई है। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि इन सुधारों से शिक्षा अवसंरचना के विकास में तेजी आएगी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच बेहतर होगी और पूर्वोत्तर भारत में एक उभरते शिक्षा केंद्र के रूप में असम की पहचान मजबूत होगी।
गौरतलब है कि असम में पर्यटन और शिक्षा — दोनों क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएँ लंबे समय से बड़ी मानी जाती रही हैं, लेकिन जटिल नियामक प्रक्रियाएँ और भूमि संबंधी कड़ी शर्तें निवेशकों के लिए बाधा बनती रही हैं।
आगे क्या होगा
ये दोनों फैसले राज्य सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं जिसका लक्ष्य असम को निवेश के लिए अनुकूल गंतव्य बनाना है। नए पर्यटन नियमों के लागू होने के बाद होमस्टे संचालकों को सिंगल-विंडो पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण कराने की सुविधा मिलेगी, जबकि निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने के इच्छुक निवेशकों के लिए भूमि अधिग्रहण की चुनौती अब कम हो जाएगी।