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जमशेदपुर में स्वर्णरेखा नदी के पास फिर मिला द्वितीय विश्व युद्ध का जिंदा बम, तीसरी घटना एक महीने में

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जमशेदपुर में स्वर्णरेखा नदी के पास फिर मिला द्वितीय विश्व युद्ध का जिंदा बम, तीसरी घटना एक महीने में

सारांश

जमशेदपुर में स्वर्णरेखा नदी के किनारे फिर से एक जिंदा बम मिला है। यह पिछले एक महीने में क्षेत्र में विस्फोटक मिलने की तीसरी घटना है, जिससे स्थानीय निवासियों में चिंता बढ़ गई है।

मुख्य बातें

स्वर्णरेखा नदी के किनारे जिंदा बम मिलने की तीसरी घटना।
बम दशकों पुराना लेकिन विस्फोटक क्षमता अभी भी बरकरार।
पुलिस ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया है।
स्थानीय लोगों ने स्कैनिंग की मांग की है।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यह क्षेत्र सामरिक रूप से सक्रिय था।

जमशेदपुर, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा के पानीपोड़ा-नागुड़साईं क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया, जब स्वर्णरेखा नदी के किनारे द्वितीय विश्व युद्ध का एक बड़ा जिंदा बम मिला। यह पिछले एक महीने में इस क्षेत्र में विस्फोटक मिलने की तीसरी घटना है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, गर्मियों के कारण नदी का जलस्तर घटने से रेत के नीचे दबे हुए ये पुराने बम अब बाहर आ रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार की रात को नागुड़साईं गांव के कुछ लोग जब नदी किनारे मछली पकड़ने पहुंचे, तो उन्हें रेत में एक बड़ी संदिग्ध धातु दिखाई दी। जब वे करीब पहुंचे, तो पता चला कि वह एक बम है, जिससे अफरा-तफरी मच गई।

ग्रामीणों की सूचना पर बहरागोड़ा थाना पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र को घेर लिया है। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने ग्रामीणों को वहां जाने से रोक दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बम दशकों पुराना है, लेकिन इसकी विस्फोटक क्षमता बनी रह सकती है, जो किसी भी समय एक बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

इससे पहले, 17 मार्च को भी इसी क्षेत्र से दो शक्तिशाली बम मिले थे, जिन्हें सेना की टीम ने अमेरिकी निर्मित बताया था। उस समय करीब 227 किलोग्राम वजनी बम को निष्क्रिय करने में सेना के विशेषज्ञों को काफी मेहनत करनी पड़ी थी। क्षेत्र को छावनी में बदल दिया गया था और करीब डेढ़ किलोमीटर के दायरे को खाली कराया गया था।

बार-बार विस्फोटक मिलने की घटनाओं से यह स्पष्ट है कि इस पूरे क्षेत्र में अभी भी कई बम जमीन के नीचे दबे हो सकते हैं। स्वर्णरेखा नदी के किनारे रहने वाले लोगों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से पूरे क्षेत्र की आधुनिक उपकरणों से 'स्कैनिंग' कराने की मांग की है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पूरे क्षेत्र की गहन जांच नहीं हो जाती, तब तक खेतों और नदी किनारे जाना खतरनाक हो सकता है। जानकारों के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के समय यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बहुत सक्रिय था, जिसके कारण कई बम यहां जमीन में दबे रह गए थे। इस बीच, पुलिस ने उच्चाधिकारियों और सेना की बम निरोधक टीम को सूचित किया है और विशेषज्ञों के आने तक इलाके की निगरानी जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से इस क्षेत्र में बमों का मिलना एक गंभीर चिंता का विषय है। स्थानीय प्रशासन को तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जमशेदपुर में जिंदा बम मिलने का कारण क्या है?
गर्मी के कारण स्वर्णरेखा नदी का जलस्तर घटने से रेत में दबे पुराने बम बाहर आ रहे हैं।
क्या यह बम खतरनाक है?
हाँ, विशेषज्ञों के अनुसार, यह बम दशकों पुराना है लेकिन इसकी विस्फोटक क्षमता अभी भी बरकरार है।
पुलिस ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
पुलिस ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया है और ग्रामीणों को वहां जाने से रोक दिया है।
क्या पहले भी इसी क्षेत्र में बम मिले हैं?
हाँ, पिछले एक महीने में इसी क्षेत्र से दो अन्य बम भी मिले थे।
स्थानीय लोग इस स्थिति पर क्या कहते हैं?
स्थानीय लोग जिला प्रशासन से पूरे क्षेत्र की स्कैनिंग कराने की मांग कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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