भारतीय सेना के खाद्य मानकों पर बड़ी समीक्षा: 276 विषयों पर मंथन, जवानों तक पौष्टिक राशन की गारंटी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना ने 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में अपने खाद्य मानकों की व्यापक समीक्षा की, जिसमें आपातकालीन स्थितियों में विमान से गिराए जाने वाले राशन से लेकर दुर्गम पहाड़ी इलाकों में तैनात जवानों तक सुरक्षित और पौष्टिक भोजन पहुँचाने की चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। सेना की क्वार्टर मास्टर जनरल शाखा के तत्वावधान में आयोजित खाद्य पदार्थों से संबंधित तकनीकी मानकीकरण समिति की इस बैठक में कुल 276 विषयों पर चर्चा की गई।
मुख्य घटनाक्रम
बैठक में रक्षा खाद्य मानकों और गुणवत्ता नियंत्रण के मानकों से जुड़े 276 विषयों पर विचार किया गया। खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग, संरक्षण, स्वाद और उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने वाली तकनीकों पर भी गहन चर्चा हुई।
विशेष रूप से विमान से गिराकर पहुँचाए जाने वाले राशन और जवानों द्वारा अपने साथ ले जाए जाने वाले राशन की जरूरतों पर ध्यान केंद्रित किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब सेना लगातार सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में अपनी परिचालन क्षमता बढ़ा रही है।
वरिष्ठ अधिकारियों की राय
सेना की आपूर्ति एवं परिवहन व्यवस्था के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल मुकेश चड्ढा ने बताया कि हाल के वर्षों में सैनिकों के राशन की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई महत्त्वपूर्ण पहल की गई हैं। इनमें 'भारत चावल' की उपलब्धता, अग्निवीरों के लिए अतिरिक्त राशन और कठिन परिचालन परिस्थितियों में तैनात जवानों के लिए विशेष राशन शामिल हैं।
बैठक में मुख्य संबोधन क्वार्टर मास्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल प्रशांत श्रीवास्तव ने दिया। इसमें विभिन्न रक्षा संस्थानों, खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों और वैज्ञानिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
आधुनिक तकनीक और क्षेत्र परीक्षण
सेना अब खाद्य सामग्री के संरक्षण, भंडारण और प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों की उपयोगिता पर मैदानी परीक्षण कर रही है। इन परीक्षणों का उद्देश्य ऐसी तकनीकों की पहचान करना है जो कठिन जलवायु वाले क्षेत्रों — जैसे ऊँचाई वाले पहाड़ी दर्रे और अत्यधिक ठंडे क्षेत्र — में भी राशन को सुरक्षित और पौष्टिक बनाए रख सकें।
गौरतलब है कि कठिन मौसम, लंबी दूरी के परिवहन और चुनौतीपूर्ण भंडारण के दौरान भोजन की पौष्टिकता बनाए रखना दुनिया भर की सेनाओं के लिए एक सतत चुनौती रही है। भारतीय सेना की यह पहल इसी दिशा में एक संरचनात्मक कदम है।
जैविक खाद्य पदार्थ और नए मानक
बैठक में सैनिकों के राशन में जैविक खाद्य पदार्थ शामिल करने की योजना पर भी विचार किया गया। इसके लिए अलग रक्षा खाद्य मानक बनाए जाएँगे। चर्चा में रक्षा खाद्य मानकों को राष्ट्रीय गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुरूप बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
आम जनता पर असर और आगे की दिशा
इस पूरी कवायद का लक्ष्य केवल राशन की गुणवत्ता तय करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सेना का जवान जहाँ भी तैनात हो — चाहे वह सियाचिन की बर्फीली चोटी हो या किसी दूरदराज़ जंगल का मोर्चा — वहाँ की कठिन परिस्थितियाँ उसके भोजन की सुरक्षा और पोषण के आड़े न आएँ। आने वाले समय में मैदानी परीक्षणों के नतीजों के आधार पर नई तकनीकों को सेना की आपूर्ति शृंखला में शामिल किया जाएगा।