क्या झारखंड की हजारीबाग जेल से भागे तीन कैदी महाराष्ट्र में पकड़े गए?

Click to start listening
क्या झारखंड की हजारीबाग जेल से भागे तीन कैदी महाराष्ट्र में पकड़े गए?

सारांश

हजारीबाग जेल से भागे तीन कैदियों को महाराष्ट्र में गिरफ्तार कर लिया गया है। वे ईंट भट्ठा पर काम कर रहे थे। क्या यह घटना सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल उठाती है?

Key Takeaways

  • हजारीबाग जेल से तीन कैदियों का फरार होना एक गंभीर सुरक्षा चूक है।
  • पुलिस ने सोलापुर में उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
  • यह घटना जेल सुरक्षा पर सवाल खड़ा करती है।
  • कैदियों का आपराधिक इतिहास चिंताजनक है।
  • पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीमों का गठन किया।

हजारीबाग, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के हजारीबाग में स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा (जेपी सेंट्रल जेल) से पांच स्तर की सुरक्षा को तोड़कर भागे तीन सजायाफ्ता कैदियों को महाराष्ट्र के सोलापुर जिले से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने यह कार्रवाई करमाला थाना क्षेत्र के कोरटी गांव में एक ईंट भट्ठा पर छापेमारी करके की, जहां तीनों मजदूरी कर रहे थे। गिरफ्तार कैदियों को ट्रांजिट रिमांड पर हजारीबाग लाया गया है।

हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक अंजनी अंजन ने बताया कि तीनों कैदी 31 दिसंबर 2025 की रात लगभग 1:30 बजे जेल से फरार हो गए थे। सुबह 7 बजे जेल प्रशासन द्वारा सूचित किए जाने पर पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच में पता चला कि कैदियों ने जेल वार्ड की खिड़की के लोहे के रॉड को काटा, बेडशीट को फाड़कर रस्सी बनाई और उसी के सहारे नीचे उतरकर चारदीवारी फांदकर भाग गए।

फरार और बाद में गिरफ्तार कैदियों की पहचान देवा भुईयां उर्फ देव कुमार भुईयां, राहुल रजवार और जितेंद्र रवानी के रूप में हुई। तीनों धनबाद जिले के निवासी हैं और विभिन्न मामलों में क्रमशः 20 वर्ष, 27 वर्ष और आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे।

एसपी अंजनी अंजन ने कहा कि घटना की गंभीरता को देखते हुए सदर एसडीपीओ अमित आनंद (आईपीएस) के नेतृत्व में तीन विशेष जांच टीमों का गठन किया गया। एक टीम तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल्स पर काम कर रही थी, दूसरी टीम फरार कैदियों के मूवमेंट का ट्रेल खंगाल रही थी, जबकि तीसरी टीम संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही थी। पुलिस जांच में सामने आया कि जेल से भागने के बाद तीनों गया पहुंचे। वहां से ट्रेन पकड़कर वे जसीडीह पहुंचे, जहां पुणे जाने वाली ट्रेन के लिए उन्होंने लगभग दो दिन इंतजार किया।

चार जनवरी 2026 को तीनों जसीडीह–पुणे एक्सप्रेस से महाराष्ट्र के दौंड जंक्शन पहुंचे। इसके बाद वहां एक परिचित की सहायता से ईंट भट्ठा पर मजदूरी करने लगे। इसी दौरान पुलिस को सटीक सूचना मिली, जिसके आधार पर छापेमारी कर तीनों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार देवा भुईयां पूर्व में भी धनबाद जेल से फरार हो चुका है। वर्ष 2021 में वह अपने एक साथी के साथ जेल की खिड़की काटकर भाग गया था।

तीनों कैदियों का आपराधिक इतिहास लंबा है, और इनके खिलाफ पोक्सो, लूट, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर मामलों में कई प्राथमिकी दर्ज हैं।

Point of View

बल्कि यह भी दिखाया है कि कैसे कैदी कानून को चुनौती देते हैं। हमें सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
NationPress
12/01/2026

Frequently Asked Questions

कैदी कब फरार हुए थे?
कैदी 31 दिसंबर 2025 की रात को फरार हुए थे।
कैदियों की गिरफ्तारी कहाँ हुई?
कैदियों की गिरफ्तारी महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में हुई।
क्या कैदियों का आपराधिक इतिहास है?
हां, तीनों कैदियों का आपराधिक इतिहास लंबा है, जिसमें गंभीर मामले शामिल हैं।
Nation Press