मुंबई: जे.जे. अस्पताल में खोपड़ी के बेस से 1 सेमी गोली निकाली, न्यूरोसर्जरी-ENT की संयुक्त टीम की बड़ी उपलब्धि
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के सर जे.जे. अस्पताल में न्यूरोसर्जरी और ईएनटी विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने 15 अक्टूबर 2026 को एक अत्यंत जटिल और जोखिमभरी सर्जरी में खोपड़ी के बेस में फंसी लगभग 1 सेमी की गोली को सफलतापूर्वक निकाल दिया। यह गोली इंटरनल कैरोटिड आर्टरी के बेहद करीब स्थित थी — जो मस्तिष्क तक रक्त पहुँचाने वाली सबसे महत्वपूर्ण धमनियों में से एक है — जिसने इस ऑपरेशन को तकनीकी दृष्टि से असाधारण रूप से चुनौतीपूर्ण बना दिया।
सर्जिकल टीम और नेतृत्व
यह सर्जरी न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. वर्नोन वेल्हो और ईएनटी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. श्रीनिवास चव्हाण के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। न्यूरोसर्जरी से डॉ. हृषिकेश और ईएनटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नवीन सिंह ने प्रत्यक्ष रूप से ऑपरेशन में भाग लिया। एनेस्थीसिया टीम में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनंतन कृष्णन और एसआर डॉ. अरुनंधी शामिल थे, जिनका योगदान सर्जरी की सफलता में निर्णायक रहा।
तकनीकी चुनौती और सर्जिकल प्रक्रिया
खोपड़ी के बेस तक पहुँचना स्वयं में अत्यंत कठिन होता है — और इस मामले में गोली की छोटी साइज़ ने उसकी सटीक लोकेशन पहचानना और भी दुष्कर बना दिया। टीम ने एडवांस्ड न्यूरोनेविगेशन टेक्नोलॉजी, सी-आर्म इमेजिंग और एंडोस्कोपिक तकनीक का एकीकृत उपयोग किया। इन तीनों तकनीकों के संयोजन ने सर्जनों को गोली की ठीक-ठीक स्थिति का पता लगाने और उसे बिना किसी न्यूरोवैस्कुलर क्षति के बाहर निकालने में सहयोग किया। रिपोर्टों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया बिना किसी जटिलता के पूरी हो गई।
मल्टीडिसिप्लिनरी सहयोग का महत्व
यह केस स्कल बेस सर्जरी में ईएनटी और न्यूरोसर्जरी विभागों के अंतर-विभागीय सहयोग की अनिवार्यता को रेखांकित करता है। गौरतलब है कि ऐसे मामलों में जहाँ गोली या कोई विदेशी वस्तु मस्तिष्क की नाजुक नसों के निकट हो, किसी एक विभाग की विशेषज्ञता अकेले पर्याप्त नहीं होती — संयुक्त टीम का दृष्टिकोण ही परिणाम तय करता है। यह सर्जरी इस बात का व्यावहारिक प्रमाण है।
अस्पताल प्रशासन की भूमिका
सर्जिकल टीम ने सर जे.जे. अस्पताल के डीन डॉ. भंडारवार, एसोसिएट डीन डॉ. रंजीत मानकेश्वर और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. संजय सुरासे का आभार व्यक्त किया, जिनके निरंतर प्रोत्साहन और संसाधन-समर्थन ने दोनों विभागों की क्षमता को मज़बूत बनाया है। यह उपलब्धि अस्पताल की उन्नत, मरीज़-केंद्रित और बहुविभागीय स्वास्थ्य सेवा की प्रतिबद्धता का उदाहरण है।
आगे की राह
यह सफलता सार्वजनिक क्षेत्र के अस्पतालों में उन्नत न्यूरोसर्जिकल क्षमताओं के विस्तार की संभावनाओं को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की मल्टीडिसिप्लिनरी प्रक्रियाएँ देश के अन्य सरकारी मेडिकल संस्थानों के लिए एक मॉडल बन सकती हैं।