दिल्ली हाईकोर्ट ने ISIS साजिश आरोपी फरहान अंसार सुसे को सर्जरी हेतु 30 दिन की कस्टडी बेल दी
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने 18 सितंबर 2026 को ISIS साजिश मामले के आरोपी फरहान अंसार सुसे को उम्बिलिकल हर्निया की सर्जरी और चिकित्सा उपचार के लिए 30 दिन की कस्टडी बेल प्रदान की। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुसे दिल्ली-एनसीआर के किसी भी निजी अस्पताल में अपने खर्च पर इलाज करा सकता है, लेकिन इस दौरान वह न्यायिक हिरासत में ही रहेगा।
मामले की पृष्ठभूमि
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की खंडपीठ ने यह आदेश सुसे की उस अपील पर सुनाया, जिसमें उसने पटियाला हाउस स्थित विशेष एनआईए अदालत द्वारा चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत याचिका खारिज किए जाने को चुनौती दी थी। सुसे पर 2023 में दर्ज राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) और गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है।
NIA के अनुसार, सुसे के खिलाफ मार्च 2024 में आरोपपत्र और जून 2024 में पूरक आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। फिलहाल मामला आरोप तय करने के चरण में है।
मुंबई में इलाज की माँग ठुकराई
अदालत ने सुसे की मुंबई में इलाज कराने की माँग अस्वीकार कर दी। खंडपीठ ने कहा कि महाराष्ट्र के पडघा और आसपास के क्षेत्रों में आरोपी के नेटवर्क को देखते हुए इस स्तर पर मुंबई में इलाज की अनुमति देना उचित नहीं होगा। यह टिप्पणी जांच एजेंसी की उस दलील के बाद आई, जिसमें NIA ने सुसे को भारत में ISIS का सक्रिय सदस्य और सहआरोपी साकिब नाचन द्वारा संचालित नेटवर्क का प्रमुख साजिशकर्ता बताया।
आरोपी की स्वास्थ्य स्थिति और शर्तें
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में दर्ज किया कि सुसे उम्बिलिकल हर्निया, ब्रोंकियल अस्थमा और टाइप-2 मधुमेह से पीड़ित है और दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल के चिकित्सकों ने सर्जरी की सलाह दी है। अदालत ने कहा कि चिकित्सकीय रूप से अस्वस्थ व्यक्ति को अपने खर्च पर निजी अस्पताल में इलाज कराने से नहीं रोका जा सकता।
अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान सुसे के साथ उसकी पत्नी या बच्चों में से अधिकतम दो करीबी परिवारजन रह सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह किसी अन्य रिश्तेदार, मित्र या परिचित से नहीं मिल सकेगा और न ही आरोपपत्र में नामित किसी व्यक्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संपर्क करेगा।
बचाव और अभियोजन पक्ष के तर्क
आरोपी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सत्यकाम ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ मुख्य आरोप रंगदारी वसूली का है और ISIS से संबंध अभी मुकदमे में साबित होना बाकी है। NIA ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सुसे रंगदारी के ज़रिए आतंकी संगठन के लिए धन जुटाने और उसके संदेश फैलाने में शामिल था।
आगे क्या होगा
30 दिन की कस्टडी बेल अवधि समाप्त होने पर सुसे को वापस जेल भेज दिया जाएगा। किसी भी अतिरिक्त अवधि पर निर्णय चिकित्सकीय सलाह के आधार पर लिया जाएगा। खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश की टिप्पणियाँ अन्य लंबित मामलों — जिनमें आरोपी की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका और माफी संबंधी अपील शामिल हैं — पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं डालेंगी। यह मामला आतंकी वित्तपोषण से जुड़े UAPA मुकदमों में न्यायिक मानवीय दृष्टिकोण की मिसाल बनता जा रहा है।