क्या दिल्ली ब्लास्ट केस में चार मुख्य आरोपियों की एनआईए रिमांड 10 दिन बढ़ी?

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क्या दिल्ली ब्लास्ट केस में चार मुख्य आरोपियों की एनआईए रिमांड 10 दिन बढ़ी?

सारांश

दिल्ली में हुए एक भयानक ब्लास्ट के चार मुख्य आरोपियों की एनआईए रिमांड को अदालत ने 10 दिन और बढ़ा दिया है। इस केस की जांच में एनआईए आतंकियों के विदेशी लिंक और फंडिंग के बारे में जानकारी हासिल करने का प्रयास कर रही है। जानिए इस मामले में और क्या हो रहा है।

मुख्य बातें

दिल्ली ब्लास्ट के चार मुख्य आरोपियों की रिमांड 10 दिन बढ़ी।
एनआईए से पूछताछ में आतंकियों के विदेशी लिंक की जानकारी हासिल करने का प्रयास।
लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए इस ब्लास्ट में कई निर्दोष लोगों की मौत हो गई।
गृह मंत्रालय ने एनआईए को इस हमले की जांच सौंपी थी।
एनआईए ने दो अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है।

नई दिल्ली, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। शनिवार को अदालत ने दिल्ली ब्लास्ट के चार आरोपियों की एनआईए रिमांड को 10 दिनों के लिए बढ़ा दिया है। इसके बाद एनआईए की टीम ने सभी को कोर्ट से अपने साथ ले लिया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी अब उनसे आतंकी मॉड्यूल की फंडिंग, योजना और विदेशी लिंक के बारे में जानकारी निकालने की कोशिश करेगी।

अदालत ने डॉ. मुजम्मिल गनी, अदील राथर, शाहिना सईद और मौलवी इरफान अहमद वागे को पहले भी 10 दिनों की रिमांड पर भेजा था।

इससे पहले 20 नवंबर को एनआईए को बड़ी सफलता मिली थी। एजेंसी ने चार अन्य आरोपियों- डॉ. मुजम्मिल, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद और आदिल अहमद को गिरफ्तार किया था। उन्हें दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें एनआईए की कस्टडी में भेज दिया गया।

एनआईए ने अदालत से आरोपियों की 15 दिन की हिरासत की मांग की थी ताकि उनसे पूछताछ कर पूरे मॉड्यूल को बेनकाब किया जा सके। हालांकि, कोर्ट ने चारों आरोपियों को 10 दिन की एनआईए कस्टडी में भेजने का आदेश दे दिया था। एनआईए के अनुसार, आरोपियों ने ब्लास्ट की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए इस ब्लास्ट में कई निर्दोष लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे।

एजेंसी ने इससे पहले इसी मामले में दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में आमिर राशिद अली, जिसके नाम पर धमाके में इस्तेमाल की गई कार रजिस्टर्ड थी, और जासिर बिलाल वानी उर्फ दानिश, जिसने आतंकी को तकनीकी सहायता प्रदान की थी, शामिल थे। इन दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और एनआईए इस पूरे आतंकी मॉड्यूल की गहन जांच कर रही है।

हमले की जांच केंद्र गृह मंत्रालय द्वारा एनआईए को सौंपी गई थी। इसके बाद से एजेंसी विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर इस मॉड्यूल से जुड़े हर सदस्य का पता लगाने और उसे न्याय के कठघरे में लाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। एनआईए का कहना है कि वह इस भीषण आतंकी साजिश की पूरी परतें खोलने और इसके मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए लगातार कोशिश कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि इस मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से गंभीरता है। एनआईए की जांच का उद्देश्य आतंकवाद के इस खतरे को समाप्त करना है। हमें इस मुद्दे पर सतर्क रहना चाहिए और इन घटनाओं के पीछे के कारणों को समझने का प्रयास करना चाहिए।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली ब्लास्ट केस में एनआईए की रिमांड क्या है?
दिल्ली ब्लास्ट केस में एनआईए की रिमांड का अर्थ है कि आरोपियों को एनआईए की हिरासत में रखा गया है ताकि उनसे पूछताछ की जा सके।
इस मामले में कितने आरोपी हैं?
इस मामले में कुल चार मुख्य आरोपी हैं, जिनकी एनआईए रिमांड बढ़ाई गई है।
एनआईए की जांच का उद्देश्य क्या है?
एनआईए की जांच का उद्देश्य आतंकियों के मॉड्यूल, उनकी फंडिंग और योजना के बारे में जानकारी हासिल करना है।
क्या इस ब्लास्ट में किसी की मौत हुई थी?
हाँ, इस ब्लास्ट में कई निर्दोष लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे।
इस मामले की जांच कौन कर रहा है?
इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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