जम्मू-कश्मीर सीजीडी पॉलिसी 2026: सभी 20 जिलों में पीएनजी-सीएनजी विस्तार, औद्योगिक विकास को बड़ा बढ़ावा
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर सरकार ने 8 अक्टूबर 2026 को जम्मू-कश्मीर शहर गैस वितरण (सीजीडी) पॉलिसी, 2026 की आधिकारिक घोषणा की, जिसका उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेश के सभी 20 जिलों में पाइपयुक्त प्राकृतिक गैस (पीएनजी) और कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) की पहुँच सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) सरकार द्वारा मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के बाद जारी यह नीति ऊर्जा अवसंरचना को आधुनिक बनाने और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
नीति के प्रमुख प्रावधान
मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित इस पॉलिसी में एकल-खिड़की समयबद्ध मंजूरी प्रणाली, मानकीकृत 'राइट ऑफ वे' (आरओडब्ल्यू) मानदंड और सीएनजी स्टेशनों की सुव्यवस्थित स्थापना के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश शामिल हैं। यह नीति निवेशक-अनुकूल और समयबद्ध ढाँचा तैयार करती है, जिससे घरेलू, वाणिज्यिक, औद्योगिक और परिवहन क्षेत्र — चारों को स्वच्छ और किफायती ऊर्जा मिल सके।
प्राथमिकता के आधार पर कठुआ, सांबा और पुलवामा सहित प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को गैस कनेक्टिविटी दी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, इससे न केवल ईंधन की लागत घटेगी, बल्कि हरित निवेश आकर्षित होगा और रोज़गार, प्रशिक्षण व कौशल विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे।
अवसंरचना और पाइपलाइन नेटवर्क
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) की पहल के तहत इस नीति का व्यापक उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को गेल (GAIL) के गुरदासपुर-जम्मू नेटवर्क से जोड़ने वाली 325 किलोमीटर लंबी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन विकसित करना है। यह पाइपलाइन क्षेत्र को राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जोड़ेगी और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की नींव रखेगी।
गौरतलब है कि अभी तक जम्मू-कश्मीर में संगठित शहरी गैस वितरण नेटवर्क का अभाव रहा है, जिसके कारण उद्योग और घरेलू उपभोक्ता महँगे पारंपरिक ईंधन पर निर्भर रहे हैं। यह नीति उस संरचनात्मक खाई को पाटने का प्रयास है।
राष्ट्रीय कार्यक्रमों से तालमेल
यह नीति प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) और केंद्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय के राष्ट्रव्यापी प्रवर्तन अभियानों के अनुरूप है, जिनका उद्देश्य किफायती दामों पर ईंधन उपलब्ध कराना, ईंधन के दुरुपयोग को रोकना और एलपीजी व पीएनजी के विकल्पों का विस्तार करना है।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पूरे देश में 'हरित ऊर्जा संक्रमण' को प्राथमिकता दे रही है और जम्मू-कश्मीर जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में अवसंरचना निवेश बढ़ा रही है।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस नीति के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री सतीश शर्मा एवं उनके विभाग को बधाई दी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर इस नीति को 'जम्मू-कश्मीर में स्वच्छ ईंधन तक पहुँच बढ़ाने, औद्योगिक विकास में तेज़ी लाने और ऊर्जा के बुनियादी ढाँचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम' बताया।
आगे की राह
नीति के क्रियान्वयन की समयसीमा और क्षेत्रवार रोलआउट योजना अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में पाइपलाइन बिछाने में भौगोलिक चुनौतियाँ एक अहम परीक्षा होंगी। निवेशक-अनुकूल प्रावधानों और एकल-खिड़की मंजूरी के साथ, यह नीति निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी प्रोत्साहित करने के लिए तैयार की गई है।