क्या जेकेएसए ने ईरान से कश्मीरी छात्रों को निकालने के लिए पीएम मोदी से मदद मांगी?

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क्या जेकेएसए ने ईरान से कश्मीरी छात्रों को निकालने के लिए पीएम मोदी से मदद मांगी?

सारांश

जम्मू-कश्मीर छात्र एसोसिएशन ने ईरान में फंसे कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा के लिए पीएम मोदी से मदद की अपील की है। यह स्थिति छात्रों के माता-पिता के लिए चिंता का कारण बन गई है। जेकेएसए ने तत्काल कार्रवाई के लिए सरकार से अनुरोध किया है।

Key Takeaways

  • जेकेएसए ने छात्रों की सुरक्षा के लिए मदद मांगी।
  • ईरान में कश्मीरी छात्रों की संख्या लगभग 2,000 है।
  • माता-पिता की चिंता बढ़ती जा रही है।
  • सरकार को आपातकालीन योजना बनाने की आवश्यकता है।
  • छात्रों के लिए संचार चैनल स्थापित करने की मांग की गई है।

श्रीनगर, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर छात्र एसोसिएशन (जेकेएसए) ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से ईरान से कश्मीरी छात्रों को निकालने में सहायता की अपील की।

जेकेएसए ने जोर दिया है कि वे ईरान में अध्ययन कर रहे भारतीय छात्रों, विशेष रूप से कश्मीर घाटी के छात्रों की सुरक्षा, गरिमा और कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए तुरंत हस्तक्षेप करें।

जम्मू-कश्मीर छात्र एसोसिएशन ने कहा कि ईरान में चल रही अशांति के कारण कश्मीरी छात्रों के माता-पिता बेहद चिंतित हैं और उन्हें अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर डर सता रहा है।

एसोसिएशन के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने सैकड़ों भारतीय छात्रों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की, जिनमें से अधिकांश जम्मू और कश्मीर के हैं। ये छात्र ईरान की सस्ती शिक्षा प्रणाली और भारत के साथ लंबे समय से चले आ रहे शैक्षणिक संबंधों के कारण वहां एमबीबीएस और अन्य व्यावसायिक चिकित्सा पाठ्यक्रम कर रहे हैं।

खुएहामी ने कहा कि कई माता-पिता पिछले चार दिनों से अपने बच्चों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। फोन कॉल कनेक्ट नहीं हो रहे हैं, मैसेजिंग सेवाएं बंद हैं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पूरी तरह से निष्क्रिय हो गए हैं, जिससे परिवारों में तीव्र मनोवैज्ञानिक तनाव उत्पन्न हो गया है।

उन्होंने कहा कि लगभग 2,000 कश्मीरी छात्र वर्तमान में ईरान के विभिन्न प्रांतों में स्थित मेडिकल विश्वविद्यालयों में नामांकित हैं और स्थानीय छात्रावासों, विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक परिवहन और आवश्यक नागरिक सेवाओं पर निर्भर हैं। मौजूदा स्थिति ने कई छात्रों को असुरक्षित और फंसे हुए महसूस करा दिया है।

उन्होंने कहा, "जेकेएसए को छात्रों और उनके परिवारों से लगातार संकटकालीन कॉल मिल रहे हैं, जिनमें सीमित आवाजाही, इंटरनेट का बार-बार बंद होना, समय पर सुरक्षा सलाह का अभाव और प्रत्यक्ष आकस्मिक या निकासी उपायों की अनुपस्थिति को उजागर किया गया है।"

एसोसिएशन ने तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि वे विदेश मंत्रालय को ईरान में भारतीय छात्रों और तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के बीच 24 घंटे संचार चैनल स्थापित करने का निर्देश दें, जिसमें समर्पित आपातकालीन हेल्पलाइन, दूतावास के अधिकारियों द्वारा नियमित संपर्क और स्पष्ट, समय पर सलाह शामिल हो।

एसोसिएशन ने व्यापक निकासी और आपातकालीन योजना तैयार करने की भी अपील की। खुएहामी ने कहा कि यदि सुरक्षा स्थिति और बिगड़ती है या महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा खतरे में आता है, तो समय पर निकासी जीवनरक्षक साबित हो सकती है।

उन्होंने कहा, "यदि परिस्थितियां ऐसी हों तो भारत सरकार को भारतीय छात्रों को सुरक्षित रूप से घर वापस लाने के लिए त्वरित कार्रवाई करने के लिए तैयार रहना चाहिए।"

एसोसिएशन ने विदेश मंत्रालय से तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के साथ घनिष्ठ समन्वय स्थापित करने और ईरानी अधिकारियों के साथ राजनयिक रूप से जुड़कर भारतीय छात्रों की सुरक्षा, संरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने का आग्रह किया, साथ ही ईरान में अध्ययनरत भारतीय नागरिकों को किसी भी प्रकार की हानि से बचाने के लिए सभी उपलब्ध चैनलों के माध्यम से शीघ्र कार्रवाई करने की अपील की।

Point of View

यह आवश्यक है कि हम अपने छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। यह न केवल उनकी गरिमा का सवाल है, बल्कि हमारे देश के भविष्य का भी। हमें मदद की आवश्यकता है और हर संभव प्रयास करना चाहिए।
NationPress
12/01/2026

Frequently Asked Questions

जेकेएसए ने किससे मदद मांगी?
जेकेएसए ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मदद मांगी है।
कितने कश्मीरी छात्र ईरान में हैं?
लगभग 2,000 कश्मीरी छात्र वर्तमान में ईरान के विभिन्न मेडिकल विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं।
छात्रों के माता-पिता क्यों चिंतित हैं?
ईरान में जारी अशांति के कारण छात्रों के माता-पिता बेहद परेशान हैं।
क्या कदम उठाए जाने की आवश्यकता है?
आवश्यक है कि सरकार एक आपातकालीन योजना तैयार करे और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
क्या सरकार ने इस पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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