क्या जेएनयू में कुछ लोग विदेशी ताकतों के साथ मिल रहे हैं?

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क्या जेएनयू में कुछ लोग विदेशी ताकतों के साथ मिल रहे हैं?

सारांश

क्या जेएनयू में विदेशी ताकतों के साथ मिलकर देश विरोधी नारों का समर्थन किया जा रहा है? भाजपा नेता इस पर गंभीर चिंता जता रहे हैं।

Key Takeaways

  • जेएनयू में विदेशी ताकतों के संबंधों का आरोप
  • देशद्रोह के मामले की संभावनाएँ
  • राजनीतिक दलों के बीच टकराव
  • शैक्षणिक संस्थानों में देशभक्ति की आवश्यकता
  • किसी भी देश में रहते हुए देश के मूल्यों का सम्मान

नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कैंपस में उमर खालिद और शरजीत इमाम के लिए लगाए गए नारों के चलते जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी एक बार फिर से विवादों में आ गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने आरोप लगाया है कि जेएनयू में कुछ ताकतें विदेशी ताकतों के साथ मिली हुई हैं।

दिल्ली विधानसभा के डिप्टी स्पीकर मोहन सिंह बिष्ट ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि इस प्रकार के देश विरोधी नारे लगाना अनुपयुक्त है, विशेषकर उन शैक्षणिक संस्थानों में, जहां सरकार और पूरा देश छात्रों से यह उम्मीद करता है कि वे देश और उसके हित के लिए कार्य करने के लिए तैयार रहें। उन्होंने कहा कि ऐसे नारों का होना अस्वीकार्य है।

भाजपा विधायक तरविंदर सिंह मरवाह ने यह आरोप लगाया कि जेएनयू के अंदर कुछ ताकतें हैं, जिनके संबंध विदेशी तत्वों के साथ हैं। उन्होंने अनुशंसा की कि विवादास्पद नारेबाजी करने वालों पर देशद्रोह का मामला दर्ज होना चाहिए।

वहीं, अरविंदर सिंह लवली ने जेएनयू कैंपस में लगे नारों को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका ने जो भी निर्णय लिया है, वह सभी तथ्यों की जांच और हर पहलू पर विचार करने के बाद किया गया है। इस देश में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से ऊपर कोई प्राधिकरण नहीं है। भाजपा विधायक ने कहा कि विपक्षी दलों को समझना चाहिए कि उन्हें देश के साथ खड़ा होना चाहिए या उन लोगों का समर्थन करना चाहिए जो देश के खिलाफ हैं।

भाजपा विधायक अजय महावर ने कहा कि देश के कई स्थानों पर देश विरोधी तत्व सक्रिय हो गए हैं, और इसलिए उन्हें समाप्त करने में समय लग सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत में आतंकवाद और देश विरोधी मानसिकता को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। भारत में रहने वाले हर व्यक्ति को देश का सम्मान करना चाहिए, उसके मूल्यों को मानना चाहिए और 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' जैसे नारों के माध्यम से देश के प्रति अपनी वफादारी दिखानी चाहिए। अगर कोई भारत में रहना चाहता है, तो उसे भारतीयता की भावना का ध्यान रखना होगा।

Point of View

यह कहना उचित है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में देश के प्रति निष्ठा जरूरी है। ऐसे मुद्दों पर राजनीतिक दलों को एकजुट होकर काम करना चाहिए, ताकि देश की एकता और अखंडता बनी रहे।
NationPress
10/01/2026

Frequently Asked Questions

जेएनयू में विवादास्पद नारे क्यों लगे?
उमर खालिद और शरजीत इमाम के समर्थन में लगाए गए नारे विवाद का कारण बने हैं।
भाजपा नेताओं ने क्या कहा?
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि जेएनयू के अंदर कुछ ताकतें विदेशी ताकतों के साथ मिली हुई हैं।
क्या देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाएगा?
भाजपा विधायक तरविंदर सिंह मरवाह ने अपील की है कि विवादास्पद नारेबाजी करने वालों पर देशद्रोह का मुकदमा लगाया जाना चाहिए।
इस विवाद का राजनीतिक असर क्या हो सकता है?
यह विवाद राजनीतिक पार्टियों के बीच टकराव पैदा कर सकता है, जो देश की एकता को प्रभावित कर सकता है।
क्या जेएनयू में देशभक्ति की भावना जरूरी है?
हाँ, जेएनयू जैसे शैक्षणिक संस्थानों में देशभक्ति की भावना को बनाए रखना आवश्यक है।
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